ई न्यूज पंजाब, लुधियाना चाइना को भारत में रीजनल कंपरीहेंसिव इकनॉमिक पार्टनरशिप (आरईसीपी) के जरिए फ्री ट्रेड में एंट्री दिए जाने की तैयारी से शहर की साइकिल, ऑटो पार्टस और मशीन टूल्स के कारोबारियों में हाहाकार की स्थिति पैदा हो गई। अगले कुछ दिनों में आरईसीपी को लेकर होने वाले करार को किस तरह से रोका जा सके, इसको लेकर शहर के कारोबारी अपनी मांगें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंचा उन्हें ये साफ करना चाहते हैं कि फ्री ट्रेड में चाइना को एंट्री मिलने से लुधियाना के साथ साथ पूरे पंजाब की साइकिल व ऑटो इंडस्ट्री पूरी तरह से तबाह हो जाएगी। सोमवार को शहर के कारोबारियों ने अपनी स्थिति पूर्व डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल से मुलाकात कर उनके समक्ष रखी। सुखबीर बादल दाखा विधानसभा के उपचुनाव को लेकर आज लुधियाना में थे और शहर के कारोबारी जिनमें यूसीपीएमए के प्रधान डीएस चावला, एवन साइकिल से ओंकार सिंह पाहवा, नीलम साइकिल से केके सेठ, फिको प्रधान गुरमीत सिंह कुलार, एसके बाइक से सुभाष लाकड़ा, तेजविंदर सिंह बिगबेन, विकी कलेर ने सुखबीर सिंह बादल को मिल इस समझौते से मिल इंडस्ट्री पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव के बारे विस्तृत जानकारी दी और उसमें हस्ताक्षेप करने का अनुरोध किया। बादल ने मोदी सरकार के साथ व्यक्तिगत रूप से बात करने का आश्वासन दिया। और मामले में माननीय केंद्रीय कैबिनेट मंत्री सुश्री हरसिमरत कौर बादल के साथ भी चर्चा करने की बात कही। वहीं शहर के अहम कारोबारियों ने सभी साइकिल व साइकिल पार्टस से जुड़ी एसोसिएशनों को इस मुददे पर एक हो जाने की अपील की है। वहीं कारोबारी राजीव जैन ने सभी कारोबारियों को एआईसीएमए के बैनर तले प्रधानमंत्री को अलग अलग चिटठी लिख इस मुददे से अवगत करवाने की बात कही है, तांकि इस मामले में गंभीरता से फैसला लिया जा सके। यूसीपीएमए के प्रधान डीएस चावला ने सभी मैंबर्स को बताया है कि स्वदेशी जागरण मंच ने इस मामले में नेशनल स्तर पर उनके साथ खडे़ होने की बात कही है। कारोबारियों ने इस इशयू की गंभीरता को देखते हुए एक मैसेज भी तैयार किया है, जो इस खबर के नीचे रखा गया है, को भी अधिक से अधिक शेयर करने की बात कही है। -आरईसीपी से चाइना को बड़ा फायदा, हिल जाएगी भारतीय इंडस्ट्री अगर आरईसीपी के तहत चाइना को भारत में ट्रेड करने की बिना टैक्स एंट्री मिल जाती है तो इसका असर पूरे भारत की इंडस्ट्री पर पड़ना तय है। इससे करीब 4 हजार एमएसएमई पर बड़ा असर आएगा और वहीं साइकिल इंडस्ट्री से जुड़ी करीब दस लाख लोगों की नौकरी तक खतरे में पड़नी तय मानी जा रही है। फिलहाल अमेरिका की ओर से चाइना की इंडस्ट्री के एक्सपोर्ट पर मोटा टैक्स स्लैब लागू किए जाने से चाइनीज मार्केट बुरी तरह हिली हुई है और अगर उसे भारत में फ्री ट्रेड की मंजूरी मिल जाती है तो ये उसके लिए आक्सीजन का काम करेगी। चाइना साल भर में 17 करोड़ साइकिल बेच रहा है, वहीं उसके मुकाबले में भारत मात्र 1.70 करोड़ साइकिल ही बेच पा रहा है। इस समझौते से चाइना भारत में इंडियन बाइसाइकिल के दामों से कम रेट पर साइकिल उपलब्ध करवाएगा। जिससे लुधियाना की साइकिल इंडस्ट्री बुरी तरह से तबाह हो जाएगी। इस संबंध में साइकिल इंडस्ट्री के विभिन्न संगठनों की एक संयुक्त बैठक गिल रोड स्थित यूनाइटेड साइकिल एंड पार्टस मैन्यूफेक्चर्स एसोसिएशन (यूसीपीएमए) कार्यालय में दस दिन पहले हुई थी। जिसमें इंडिया साइकिल मैन्यूफेक्चरर एसोसिएशन, फेडरेशन आफ इंडस्ट्रीयल एंव कमर्शियल आर्गेनाइजेशन, चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीयल एंव कमर्शियल अंडरटेकिंग, इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट एसोसिएशन एंव बराडो शामिल हुए थे। इस समय कंपलीट साइकिल पर 30 और पार्टस पर 20 प्रतिशत डयूटी है। नए समझौते में 6 नए देश चीन, जापान, इंडिया, साउथ कोरिया, आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड शामिल किए गए हैं। अब ट्रेड एग्रीमेंट में 16 देश एक साथ हो जाएंगे।
negative impact of RECP agreement on Cycle Industry