ई न्यूज पंजाब, लुधियाना भारत सरकार की ओर से 15 देशों के साथ क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) के तहत किए जाने वाले समझौते के विरोध में अब कारोबारी सड़कों पर उतरने शुरु हो गए हैं। शनिवार को आरसीईपी के विरोध में लुधियाना के गिल रोड स्थित साइकिल मार्केट में इंडस्ट्री एंड ट्रेड फोरम, फास्टनर्स मेन्यूफैक्चर्स एसोसिएशन आफ इंडिया, फास्टनर्स सप्लायर एसोसिएशन व फोपसिया के बैनर तले कारोबारियों ने मोदी सरकार का पुतला फूंक प्रदर्शन करते हुए केंद्र सरकार को चेतावनी देते कहा कि कारोबारी सरकार के इस समझौते के खिलाफ चुप नहीं बैठेंगे और दीवाली के बाद इस प्रदर्शन को तेज करते हुए भूख हड़ताल सहित हर तरह विरोध करने को कारोबारियों ने कमर कस ली है। इस अवसर पर कारोबारी बदिश जिंदल ने कहा कि केंद्र सरकार व्यापारियों का कारोबार पूरी तरह से बंद करवाना चाहती है और इसीलिए चाइना को भारत में फ्री ट्रेड के जरिए एंट्री देकर छोटे कारोबारियों को पूरी तरह से तबाह कर देगी। उन्होंने कहा कि पहले ही देश की इंडस्ट्री नोटबंदी और फिर जीएसटी की मार झेल रही है और अब फ्री ट्रेड के तहत चाइना से आने वाले सामान से साइकिल, मशीन टूल्स, साइकिल पार्टस और फास्टर्नर सहित कुल 86 फीसदी इंडस्ट्री बंद हो जाएगी। कारोबारी नरिंदर भमरा ने कहा कि आरसीईपी में भारत, चीन, जापान, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया, ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, न्यूजीलैंड, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड, वियतनाम सहित 16 देशों का एक समूह है। इससे भारत के बाजारों को चीनी उत्पादों से भर दिया जाएगा, क्योंकि समझौते से कस्टम ड्यूटी फ्री वस्तुओं की आपूर्ति की अनुमति मिलती है, तो यह भारत और अन्य देशों में उत्पादित 80 फीसदी से अधिक वस्तुओं को कवर कर लेगा और इससे पंजाब सहित पूरे देश के कारोबारियों के लिए नई मुसीबत खड़ी होनी तय है। बदिश जिंदल ने आंकडें पेश करते कहा कि ऐसी परिस्थितियों में यह स्पष्ट है कि RCEP के बाद देश का अनबैलेंस व्यापार 7,50 लाख करोड़ से बढ़कर 20 लाख करोड़ हो जाएगा। आरसीईपी के तहत 86% वस्तुओं को छूट दी जाएगी। भारत में 135 करोड़ आबादी का एक बड़ा उपभोक्ता बाजार है और ये सभी देश हैं दुनिया के इस सबसे बड़े बाजार को हथियाने की योजना बना रहे हैं। किसी साजिश के तहत मोदी सरकार भारत की अर्थव्यवस्था को नष्ट कर रहे हैं। भारत का कारोबारी पहले से SAFTA और asean जैसे समझौतों के कारण भारत का उद्योग पहले से ही परेशान है और अब आरसीईपी भारतीय उद्योगों के ताबूत में आखिरी कील साबित होगा। इस अवसर पर कारोबारी कुलदीप सिंह, जतिंदर सिंह, अरुण छाबड़ा, आशु राणा, विक्रम शर्मा, राजा किंग, चरणजीत सिंह विश्वकर्मा, जसविंदर बिरदी, राजीव जैन, हरमिंदर सिंह पाहवा, नरिंदर कुमार भमरा, नवीन गुप्ता, गुरजीत सिंह, हरजीत सग्गू, हनी सेठी, जीवन सिंगला, अमरजीत अमन शर्मा, मनीश सिंगला, रघुबीर सिंह, रमेश कुमार, अवतार सिंह, सुखराज सिंह, संदीप सचदेवा, संजय सिंगला, नीरज गुप्ता, नरिंदर राणा, प्रमोद कुमार, अरुण गुप्ता व अन्य मौजूद थे।
Businessmen burnt effigy of Modi government