यशपाल शर्मा, लुधियाना एक एनआरआई जसविंदर ढिल्लों की ओर से अपने पिता, चाचा, साउथ सिटी नहर पर बड़ा कारोबार करने वाले एक रियल इस्टेट मालिक और तहसील के सरकारी अफसरों के साथ मिलकर उसकी करोड़ों की जमीन (8 किले) हड़पने के आरोप लगाए हैं। ये जमीन मुल्लापुर दाखा तहसील के तहत आती देवतवाल गांव में पड़ती हैं। आज ये पूरा विवाद इसलिए सामने आया क्यों कि एनआरआई जसविंदर सिंह ढिल्लों इस आठ किले जमीन पर कब्जा करने को मशहूर रियल इस्टेट मालिक की ओर से करवाई जा रही चारदीवारी को रुकवाने के लिए पुलिस फोर्स लेकर पहुंचा था और एडीसी का इस विवाद में स्टे आर्डर दिखाकर मौके पर चल रहे काम को रुकवाने के प्रयास करता रहा। इस संबंध में युवक ने कोर्ट केस भी कर रखा है। जबकि उसकी ओर से डीजीपी विजिलेंस और एनआरआई थाने में भी शिकायत की है। जबकि दूसरा पक्ष रजिस्ट्रीइ इंतकाल अपने हक में होने के चलते व अपनी ऊंची पहुंच के चलते इस जमीन पर कब्जा करने को चारदीवारी करवा रहे हैं। शिकायतकर्ता जसविंदर सिंह ने बताया कि उनके मंगलवार को विजिलेंस ऑफिस में बयान भी हुए हैं। इस शिकायत में उन्होंने एसडीएम वेस्ट, तहसीलदार वेस्ट और हल्का पटवारी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। जिसकी विजिलेंस जांच चल रही है। जानकारी देते हुए जसविंदर सिंह ने बताया कि वे कैनेडा सरी में रहता है। जसविंदर अनुसार उसके चाचा चमकौर सिंह ने उसे बचपन में गोद ले लिया था। चमकौर सिंह चार भाई हैं। कोर्ट नोटिस के बावजूद सौदा फाइनल कर कर दी रजिस्ट्री जसविंदर ने आरोप लगाया कि वे कैनेडा से वापिस आया और अपने पिता चमकौर सिंह से हिस्सा मांगा। उन्होंने हिस्सा देने से इंकार कर दिया। जिस संबंध में पिछले तीन साल से कोर्ट में केस चल रहा है। इसी बीच चमकौर सिंह ने अपने भाई रणधीर सिंह के साथ मिलकर जमीन में से आठ किले बेच डाले। वे जमीन उन्होंने शहर के नामी रियल एस्टेट के मालिक को से सौदा कर लिया। जब उन्हें इसका पता चला तो उन्होंने कोर्ट के जरिए तहसीलदार, पटवारी व संबंधित रियल एस्टेट को नोटिस भेजा। लेकिन उसके बावजूद उन्होंने सौदा कर डाला जसविंदर ने आरोप लगाया कि उन्हें जब तीन महीने पहले जमीन का सौदा करने का पता चला तो उन्होंने नोटिस दिए। जिसके बावजूद अधिकारियों ने मिलीभुगत कर एक ही दिन में इंतकाल कर डाला। जबकि इसमें एसडीएम ने भी इंतकाल के लिए कह डाला। नोटिस की बात को अनदेखा किया गया। जसविंदर अनुसार इससे साफ जाहिर है कि आपसी मिलीभुगत से यह सब किया गया। जबकि रजिस्ट्री करवाकर चमकौर सिंह वापिस कैनेडा भी चले गए। पूरे सौदें में कई तरह के हेरफर, एडीसी स्टे की नहीं परवाह जसविंदर अनुसार चमकौर सिंह ने आठ किले की रजिस्ट्री करवाई है। एक किले की कीमत 3.41 करोड़ रुपए है। लेकिन सरकारी रेट 50 लाख रुपए हैं। इसी तरह करके सिर्फ चार किलो को ही दस्तावेजों में दिखाया गया है। उसने आरोप लगाया कि जमीन की खरीददारी में बड़ी हेरफेर की गई है। जिसके चलते उन्होंने विजिलेंस को शिकायत देकर मामले की जांच करने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि जमीन की रजिस्ट्री होने के बावजूद कोर्ट की तरफ से स्टे न मिला तो वे एडीसी के समक्ष पेश हुए। एडीसी ने जमीन पर स्टे लगाया। लेकिन उसके बावजूद भी कॉलोनाइजर नियमों का उल्लंघन करते हुए वहां निर्माण करवा रहे है। जिसके चलते पहले सोमवार को पुलिस ने उन्हें रोका। लेकिन वे फिर नहीं माने और फिर मंगलवार को दोबारा से निर्माण कार्य शुरु कर दिया। जिसके चलते उन्होंने मौके पर जाकर स्टे दिखाकर काम रुकवाया। -- जसविंदर सिंह की और से झूठे आरोप लगाए जा रहे है। उन्हें चमकौर सिंह की और से पहले ही बेदखल किया हुआ है। वे सिर्फ अपने निजी स्वार्थ के लिए यह आरोप लगा रहा हैं। -- बचाव पक्ष के वकील।
Nri Accuses Father Uncle And Famous Real Estate Owner Of South City Of Grabbing Land Worth Crores