चंडीगढ़। वारिस पंजाब दे के चीफ व खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह को गुरूवार को दोहरा झटका लगा। अमृतपाल सिंह के वकील इमान सिंह खारा की तरफ से अमृतपाल समर्थक प्रधानमंत्री बाजेके समेत 5 लोगों के बारे में दाखिल हैबियस-कॉर्पस की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने उन्हें जमकर फटकार लगाई। वहीं श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने भी सरबत खालसा बुलाने की संभावनाओं को नकार दिया है। वारिस पंजाब दे के लीगल एडवाइजर ने हैबियस-कॉर्पस (बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका) दाखिल की थी। जिसमें अमृतपाल के साथ असम की डिब्रूगढ़ जेल भेजे गए प्रधानमंत्री बाजेके का नाम भी शामिल था। इसी मुद्दे को लेकर गुरूवार को सुनवाई हुई तो हाईकोर्ट ने कहा कि बाजेके पर एनएसए लगा हुआ है। वह असम की जेल में है। यह भी आपको पता है, फिर किस आधार पर यह हैबियस-कॉर्पस दाखिल की गई कि उसे पेश किया जाए। कोर्ट ने कहा लेडी जेलर को कैसे पार्टी बनाया किस आधार पर असम जेल के लेडी सुपरिटेंडेंट को इसमें बाई नेम पार्टी बनाया गया है?। क्या वकील को बेसिक कानून की भी जानकारी नहीं है। वकील ने बचाव में कहा कि वह डिब्रूगढ़ जेल में बंद है और उससे मिलना चाहते हैं। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि वह किसी दूसरे मजिस्ट्रेट के पास गए। असम हाईकोर्ट क्यों नहीं गए?। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि उनकी पिटीशन का ग्राउंड ठीक नहीं है। अब इस मामले की भी अमृतपाल मामले के साथ 11 अप्रैल को फिर सुनवाई होगी। बता दें कि हैबियस कॉर्पस उस सूरत में दाखिल की जाती है, जब आरोपी पुलिस पकड़ लेती है लेकिन गिरफ्तारी नहीं दिखाती और घरवालों को इसका पता नहीं होता। इस मामले में सभी को बाजेके को डिब्रूगढ़ जेल भेजने का पता था। अकाल तख्त जत्थेदार ने गुरमति समागम बुलाया वहीं दूसरी तरफ अमृतपाल सिंह की तरफ से जारी वीडियो में बार-बार 13 अप्रैल को सरबत खालसा बुलाने की बात कही जा रही थी। मगर, जत्थेदार ने बैसाखी के कार्यक्रम घोषित कर इस पर भी अंकुश लगा दिया है। जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने 12-13 अप्रैल को श्री दमदमा साहिब तलवंडी साबो में खालसा साजना दिवस और बैसाखी कसे समर्पित गुरमति समागम आयोजित करने के लिए कहा है। इस घोषणा के साथ ही 13 अप्रैल को अमृतपाल सिंह की मांग पर सरबत खालसा आयोजित करने की अटकलों को एक हद तक अंकुश लग गया है। पपलप्रीत के कहने पर भागा था अमृतपाल अभी तक अमृतपाल सिंह को गिरफ्तार नहीं किया जा सका है। पुलिस जांच में सामने आया कि अमृतपाल सिंह ने अपने चाचा से अधिक पपलप्रीत सिंह पर विश्वास कर उसके साथ भागने का फैसला किया। जबकि अमृतपाल सिंह का चाचा हरजीत सिंह उसे पुलिस के सामने सरेंडर करवाना चाहता था। पुलिस जांच में स्पष्ट हुआ कि अमृतपाल और चाचा हरजीत सिंह जालंधर में ही अलग हो गए थे। चाचा हरजीत सिंह ने पुलिस की सख्ती देखते हुए सरेंडर करने का फैसला किया था। इतना ही नहीं, हरजीत सिंह ने किसी व्यक्ति को फोन करके अपने सरेंडर की बात कही थी। इसके साथ ही अमृतपाल को भी सरेंडर करने के लिए कहा था। पप्लप्रीत ने की भागने की पूरी प्लानिंग अमृतपाल सिंह को सरेंडर ना करने और उसे भगोड़ा बनाने के लिए पपलप्रीत की गाइडेंस थी। पुलिस जांच में सामने आया कि अमृतपाल सिंह ने इस मोड़ पर अपने चाचा की बात मानने की जगह पपलप्रीत सिंह को सुन भागने का फैसला किया। इतना ही नहीं, पपलप्रीत सिंह ही वह इंसान था, जिसने कुछ ही घंटों में अमृतपाल के भागने की पूरी प्लानिंग भी कर दी।
Amritpals Lawyer Was Reprimanded By The High Court The Court Said The Lawyer Does Not Even Know The Basic Law Filed A Wrong Petition