यशपाल शर्मा, लुधियाना
लुधियाना में डिप्टी कमिश्नर की कोठी के ठीक साथ शहरवासियों के लिए दूसरी सबसे बड़ी सैरगाह हीरो रखबाग चोरों के लिए टू-व्हीलर चोरी का सेफ जोन बन गया है। हालात ऐसे हैं कि हर महीने हीरो रखबाग के करीब चार एंट्री एग्जिट से 50 से 75 स्कूटर व मोटर साइकिल चोरी हो रहे हैं। जिसमें अधिकतर हीरो स्पलैंडर और एक्टिवा शामिल हैं। आज भी थरीके निवासी तेजपाल नाम के युवक का हीरो स्पलैंडर मोटरसाइकिल चोरी हो गया और कंपलेंट के बाद पहुंचे पीसीआर कर्मी उसे बस अडडा, रेलवे स्टेशन, डीएमस, सीएमसी की पार्किंग जाकर अपना मोटरसाइकिल चैक करने की ताकीद करते दिखे। ये पूरा खेल शहर के सबसे वीआईपी एरिया जहां आईएएस, आईपीएस, जज और बडे़ कारोबारी की रिहायश है, के 100 मीटर के दायरे में हो रहा है। चोरी का ये पूरा खेल नया नहीं, ब्लकि पिछले करीब एक से दो साल से भी अधिक पुराना है। लेकिन इसे लेकर पुलिस डिपार्टमेंट और हीरो साइकिल जो रखबाग की संभाल देख रहा हैं, गंभीर नहीं है। अभी तक रखबाग की किसी भी एंट्री पर न पुलिस प्रशासन और न ही हीरो साइकिल की ओर से ही सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाए गए हैं और इसी का नतीजा है कि चोर आराम से एक गैंग बनाकर चोरी को अंजाम देते हैं और बाइक चोरी कर फरार हो जाते हैं। आम पब्लिक खासकर सामान्य परिवार के किसी सदस्य का मोटर साइकिल या स्कूटर चोरी होना बहुत बड़ी बात रहती है। सामान्य परिवारों के अधिकतर लोग नए मोटरसाइकिल की दो से तीन साल इंश्योरेंस करवाने के बाद दोबारा नहीं करवाते और इसका हर्जाना उन्हें चोरी के वक्त उठाना पड़ता है।
बहुत से लोगों ने छोड़ी रखबाग की सैर
लुधियाना में बहुत से शौकीन हैं, जो 5 से 12 किलोमीटर टू व्हीलर या कार पर आकर रखबाग में सैर करने को आते हैं। कारण ये है कि रखबाग का रखरखाब हीरो साइकिल के पास जाने के बाद साफ सफाई व बैठने के बेहतर प्रबंध हुए हैं। जिसके चलते यहां पर सुबह से लेकर रात 9 बजे तक सैर करने वाले लोगों का आना जाना रहता है। लोगों का रखबाग में इतना अधिक फुटफाल होने के बावजूद हीरो साइकिल्स ने यहां आने वाले लोगों के वाहनों की सिक्योरिटी का कोई प्रबंध नहीं किया। अवमूमन रखबाग का एक बड़ा चक्कर काटने 15 से 20 मिनट का समय लगता है और यहां आने वाले लोगों पर निगाह रखने वाले चोरों के लिए चोरी को 15 से 20 मिनट का समय बहुत है और वे 5 से 10 मिनट में अपनी चाेरी को अंजाम देकर गायब हो जाते हैं। रखबाग के आसपास लगातार बढ़ रही चोरियों का नतीजा है कि बहुत से पुराने लोगों ने यहां आकर सैर करना ही बंद कर दिया है।
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पुलिस की कारगुजारी भी शक के दायरे में
रखबाग के आसपास होने वाली चोरी के अधिकतर केस थाना डिवीजन नंबर आठ पहुंचते हैं। पीड़ित को पहले यहां डीडीआर लेने में ही दो दिन से दस दिन तक लग जाते हैं और इसके बाद पुलिस में अच्छी पकड़ रखने वालों की ही एफआईआर दर्ज हो पाती है। लगातार पुलिस के पास पहुंच रहे इतने अधिक चोरी के मामलों के बावजूद थाना डिवीजन नंबर आठ पुलिस इसे गंभीरता से क्यों नहीं ले रही, ये अपने आप में बड़ा सवाल है। कहीं यहां चोरी करने वाले पुलिस के जानकार तो नहीं, जिस कारण से यहां चोरी रुकने का नाम नहीं ले रही। अगर पुलिस की इसमें सही में मिलीभगत नहीं है तो आखिर इतने चोरी की शिकायतें लेकर कागजी कार्रवाई करने की बजाय यहां पर पांच से दस हजार रुपए के कैमरे लगाकर इसकी निगरानी क्यों नहीं करते। ये सवाल ऐसा है जो हर पब्लिक के जहन में आता है।
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