अंबाला। किसान आंदोलन का आज (17 फरवरी) को 5वां दिन है। पंजाब के किसान दिल्ली जाने की जिद को लेकर शंभू बॉर्डर पर डटे हुए हैं। इस आंदोलन के दौरान हार्ट अटैक से एक किसान और दम घुटने से एक सब इंस्पेक्टर की मौत हो चुकी है। पंजाब का बड़ा किसान संगठन BKU (उगराहां) भी आंदोलन में आ गया है। आज से 2 दिन के लिए वे पंजाब के सभी टोल फ्री कराएंगे। इसके अलावा पंजाब भाजपा नेता पूर्व CM कैप्टन अमरिंदर सिंह, प्रदेश प्रधान सुनील जाखड़ और केवल ढिल्लो के घर का घेराव करेंगे। हरियाणा में BKU (चढ़ूनी) की तरफ से तहसीलों में ट्रैक्टर मार्च निकाला जा रहा है। किसानों का आंदोलन खत्म करवाने के लिए कल रविवार (18 फरवरी) चंडीगढ़ में केंद्रीय मंत्रियों और किसान नेताओं के बीच चौथी वार्ता होगी। तीन वार्ता बेनतीजा रहीं। हरियाणा के किसानों ने निकाला ट्रैक्टर मार्च हरियाणा-पंजाब के शंभू बॉर्डर पर किसानों के समर्थन में पानीपत में किसानों ने ट्रैक्टर मार्च निकाला। कुरुक्षेत्र में पिहोवा की अनाज मंडी से भारतीय किसान यूनियन चढ़ूनी के प्रधान गुरनाम सिंह चढूनी ने ट्रैक्टर मार्च की अगुवाई की। पंजाब के बरनाला में भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां ने पूर्व विधायक और भाजपा के प्रदेश कार्यकारिणी मेंबर केवल सिंह ढिल्लों के घर के बाहर धरना लगाया। धरना में बड़ी संख्या में किसान और महिलाएं शामिल हुईं। सोनीपत में किसान ट्रैक्टर मार्च निकाल रहे हैं। गन्नौर में ट्रैक्टर मार्च के बाद मुरथल से भी एक मार्च निकाला गया। मुरथल की लड़कियों ने भी ट्रैक्टर चला कर किसान आंदोलन में भागीदारी की। ट्रैक्टर चला रही शीतल ने कहा कि किसानों पर अन्याय हो रहा है। आंसू गैस के गोली छोड़े जा रहे हैं। हम भी किसान की बेटियां हैं, पीछे नहीं हटेंगी। सोनीपत में खरखौदा, गन्नौर, गोहाना में भी किसानों ने टैक्टर मार्च निकाला। किसानों को MSP कमेटी का प्रस्ताव दे सकती है केंद्र सरकार सूत्रों के मुताबिक कल चंडीगढ़ में किसानों से होने वाली मीटिंग में केंद्र सरकार MSP कमेटी बनाने का प्रस्ताव दे सकती है। जिसमें किसान नेताओं से भी सहमति ली जाएगी। इस कमेटी में किसान नेता भी शामिल किए जाएंगे। यह कमेटी टाइम बाउंड होगी। सरकार किसानों को आश्वस्त करेगी कि कमेटी जो भी रिपोर्ट देगी, उस पर प्रभावी एक्शन लिया जाएगा। पंधेर बोले- MSP का महंगाई से लेना-देना नहीं पंधेर ने कहा कि हमें धान व गेहूं पर एमएसपी मिल रही है। सरकार बताए कि इसका असर महंगाई पर कैसे पड़ा?। जिन फसलों की सरकार खरीद करती है, उनका रेट कम है। जिन फसलों की सरकार खरीद नहीं करती, उनके दाम ज्यादा हैं। जो ये कहा जा रहा है कि जो किसानों की मांगें हैं, उससे देश की बड़ी पूंजी किसानों पर लग जाएगी। ये भ्रमित करने वाली बात है। बहुत सी कैलकुलेशन सामने आ चुकी हैं। अगर हम 23 फसलों की भी बात करें तो उन पर 36 हजार करोड़ से चल सकता है। एक कैलकुलेशन ये बोल रही है कि दो-ढ़ाई लाख करोड़ से घाटा पूरा हो सकता है। सरकार जो खरीदेगी, वे बेचेगी भी। सर्कुलेशन शुरू हो जाएगा। पहले एक-दो साल पैसे अधिक लग सकते हैं, लेकिन अगले साल से ऐसा नहीं होगा।
Farmers-Movement-5th-Day-Tractor-March-In-Haryana-Today-Preparations-For-Demonstration-At-Punjab-Bjp-Presidents-House-Farmers-Put-Up-Tents