लुधियाना| सिविल अस्पताल में बीती रात करीब आधा घंटा लाइट गुल रही। मरीज अंधेरे में बिलखते रहे। आरोप है कि अस्पताल में इलेक्ट्रिशियन अपनी मनमर्जी से जनरेटर चलाता है। अंधेरे में परेशान मरीजों की पत्रकारों ने वीडियो बनाई तो इलेक्ट्रिशियन उनसे भी उलझ पड़ा। वीडियो बनती देख वह जनरेटर चलाने भागा। इस दौरान डॉक्टर और स्टाफ नर्स मोबाइल फोन की लाइटें जला कर मरीजों का इलाज करती दिखी। जानकारी अनुसार लुधियाना के सिविल अस्पताल में रात को करीब 10.15 बजे एकाएक बिजली गुल हो गई। अस्पताल में जनरेटर की सुविधा होने के बावजूद मरीजों ने अंधेरे से परेशानी झेली। लोगों को अस्पताल प्रबंधन की कुव्यवस्था के कारण बड़ी परेशानी उठानी पड़ी। बताते हैं कि अस्पताल में बार-बार लाइट जाने का कारण घटिया वायरिंग या फिर स्टाफ का ट्रेंड न होना है। वार्डों में स्टाफ इस दौरान मोबाइल की रोशनी में काम करने को मजबूर रहा। सूत्रों मुताबिक जनरेटर न चलाने पर मोबाइल और मोमबत्ती की रोशनी के सहारे ही मरीजों का इलाज करना यहां की आम बात है। सरकार की तरफ से मिलने वाले डीजल का खर्चा कहां जा रहा है, यह जांच का विषय है। एक मरीज के परिजन ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि लाइट बंद होने से परेशानी आ रही है। मरीज को बाथरुम लेकर जाना है, उसके लिए परेशान होना पड़ रहा है। वहीं लगातार जिन मरीजों का चैकअप और इंजेक्शन लग रहे हैं, उन्हें अंधेरे में अधिक दिक्कत हुई। उनका पंजाब सरकार से आग्रह है कि जनरेटर की सुविधा का सही से जमीनी स्तर पर इस्तेमाल करवाया जाए, ताकि मरीज परेशान न हो। बिजली गुल होने से इमरजेंसी, सर्कुलेटिंग एरिया, मेडिसिन वार्ड, नर्सिंग स्टेशन, शौचालय और महिला मरीजों के वार्डों में अंधेरा पसरा रहा। SMO मंदीप कौर सिद्धू से जब सिविल अस्पताल में अक्सर लाइट गुल होने और जनरेटर न चलाने के बारे पूछने के लिए संपर्क किया तो उन्होंने बिना बात बिना सुने ही कह दिया कि अभी दफ्तर आई हूं। बहुत काम होता है सुबह। SMO के इस बयान से ही पता चलता है कि सिविल अस्पताल में सुविधाओं के लिए अधिकारी कितने सजग हैं।
Darkness-At-Night-In-Civil-Hospital-Patients-Treated-In-Torchlight-Smo-Said-I-Have-Just-Come-There-Is-A-Lot-Of-Work