चंडीगढ़। पंजाब सरकार द्वारा एक्वायर की जाने वाली जमीन में फर्जी तरीके से अमरूदों के बाग दिखाकर करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी करने के मामले की ED ने जांच तेज कर दी है। टीम ने बुधवार को चंडीगढ़, मोहाली और फिरोजपुर समेत 22 जगह पर दबिश दी। इस दौरान पंजाब के IAS वरूण रूजम के घर में भी टीम पहुंची। टीम को मौजूदा एक्साइज कमिश्नर वरुण रूजम के घर के पीछे एक पार्क में फटे हुए कुछ दस्तावेज मिले हैं। इन दस्तावेजों में अमरूद बाग घोटाले का जिक्र है। ED को शक है कि बचने के लिए इन्हें फाड़कर फेंका गया है। IAS वरुण रूजम के घर के बाहर जहां दस्तावेज फटे मिले हैं, वहां एक CCTV भी लगा है। ED अब उन कैमरों की भी जांच करेगी कि यह दस्तावेज बाहर से किसी ने फेंके हैं या अंदर से किसी ने फेंके हैं। अधिकारियों ने दस्तावेज कब्जे में ले लिए हैं। वहीं, वरुण की पत्नी पर भी आरोप है कि उसने करोड़ों रुपए का मुआवजा फर्जी तरीके से हासिल किया है। इसके अलावा फिरोजपुर के DC राजेश धीमान की पत्नी भी केस में आरोपी हैं। वहीं, ED कारोबारियों, प्रॉपर्टी डीलरों और अन्य लोगों के घर पहुंची है। ED काफी समय से इस केस की जांच कर रही थी। इसके तहत गमाडा से सारा रिकॉर्ड कब्जे में ले लिया गया था। पता चला है कि ED जालंधर के अधिकारी इन टीमों में शामिल हैं। ये टीमें स्थानीय पुलिस को साथ लेकर आई हैं। साथ ही इलाके को पूरी तरह सील कर दिया है। इस दौरान जो जोग घरों पर मिले हैं, उन्हें अंदर ही बैठा लिया गया है। किसी को फोन आदि करने की अनुमति नहीं है। इस जांच में क्या निकलता है, इसके बारे में शाम को ही ED का ऑपरेशन पूरा होने के बाद पता चल पाएगा। पटियाला में भी ED की रेड चल रही है। सूत्रों के मुताबिक पटियाला में IAS अधिकारी राजेश धीमान के CA के घर पर टीम पहुंची है। टीम यहां सात बजे सुबह पहुंच गई थी। घर के अंदर और बाहर किसी को जाने की अनुमति नहीं है। अब भी ऑपरेशन जारी है। एयरपोर्ट रोड पर ग्रेटर मोहाली डेवलपमेंट अथॉरिटी की तरफ से एयरोट्रोपोलिस प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण से जुड़ा हुआ मामला है। अधिग्रहण जमीन का मुआवजा गमाडा ने लैंड पूलिंग पॉलिसी के मुताबिक दिया था। उस जमीन में लगे अमरूद के पेड़ों की कीमत जमीन से अलग अदा की थी। फलदार पेड़ों की कीमत बागवानी विभाग की तरफ से निर्धारित की जाती है। इसके बाद जमीन अधिग्रहण कलेक्टर ने फलदार वृक्षों वाली जमीन की एक सर्वेक्षण सूची डायरेक्टर बागवानी को भेजकर पेड़ों की मूल्यांकन रिपोर्ट तैयार करवाई थी। जमीन अधिग्रहण से पहले यहां कुछ लोगों ने अमरूदों के पौधे लगा दिए थे, लेकिन गमाडा के अधिकारियों के साथ मिलकर इनकी उम्र 4 से 5 साल दिखाई गई। इस कारण इनका मुआवजा काफी ज्यादा बना। इस तरह से कई लोगों ने मिलकर गलत तरीके से मुआवजा लिया। विजिलेंस ने इसमें आरोपियों को गिरफ्तार भी किया था, लेकिन अदालत ने मुआवजा राशि वापस जमा करवाकर उन्हें जमानत दे दी।
Ed-Raids-In-Chandigarh-And-Punjab-Team-Reaches-Excise-Commissioners-House-Documents-Found-Torn-In-The-Park-Raids-At-22-Places