भाजपा उम्मीदवार रवनीत सिंह बिट्टू बेशक लुधियाना लोकसभा चुनाव कांग्रेस के उम्मीदवार अमरिंदर सिंह राजा वडिंग से हार गए, लेकिन चुनावी नतीजे ने यह जरूर साफ कर दिया कि लुधियाना के शहरी हिस्से में भाजपा का वोट बैंक पहले से कहीं अधिक बढ़ा है। इसका अंदाजा आप इस लोकसभा चुनाव के नतीजे में आए वोट शेयर के लिहाज से लगा सकते हैं। रवनीत सिंह बिट्टू लुधियाना के पांच विधानसभा हलके जो कि शहरी हिस्से में पड़ते हैं, में रिकॉर्ड तोड़ वोट हासिल करने में कामयाब रहे। लेकिन गांव के हिस्से में आती तीन विधानसभा में उन्हें लोगों ने वोट नहीं की। इससे साफ है कि शहरी हिस्से में अयोध्या राम मंदिर का पूरा असर देखने को मिला तो वही गांव की तीन विधानसभा क्षेत्र में किसानों के पीएम मोदी और भाजपा विरोधी चलने का पूरा असर देखने को मिला है। रवनीत सिंह बिट्टू को लुधियाना सेंट्रल हल्के से 50833, लुधियाना साउथ से 37378, आत्म नगर से 22753, सेंट्रल से 41450, वेस्ट से 45424, लुधियाना नॉर्थ से 53725 से रिकॉर्ड तोड वोट मिले, लेकिन वहीं गिल हल्के से 30154 वोट, दाखा से 7072, जगराओं से 12138 वोट ही पड़े। शहरी विधानसभा हलकों से आए इन वोटो के आंकड़ों ने आम आदमी पार्टी के मौजूदा विधायकों और कांग्रेस के पूर्व विधायकों के लिए भी खतरे की घंटी बजा दी है। बिट्टू को सबसे अधिक वोट लुधियाना नॉर्थ और लुधियाना सेंट्रल से पड़ते दिखे। केंद्रीय विधानसभा से आम आदमी पार्टी के विधायक और लुधियाना लोकसभा का चुनाव लड़ रहे अशोक पाराशर खुद अपने एरिया में बिट्टू से करीब 21000 वोट से पिछड़े। अशोक पराशर को सेंट्रल विधानसभा से मात्र 20039 वोट पोल हो पाई। भाजपा के वोट शेयर की बात करें तो उन्हें लुधियाना की साउथ, ईस्ट, वेस्ट, आत्म नगर, नॉर्थ, सेंट्रल विधानसभा से विधानसभा से कुल 2,51563 वोट पड़ी, जबकि जबकि यहां पर कांग्रेस के उम्मीदवार अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को 191433 वोट और आप उम्मीदवार अशोक पाराशर पप्पी को 140612 वोट ही मिल पाए। इन आंकड़ों से साफ है कि बिट्टू शहरी एरिया में वडिंग से करीब 60000 वोट से और पप्पी से करीब 110000 वोट से आगे रहे। वहीं किसानों के विरोध के चलते रवनीत सिंह बिट्टू मुल्लापुर दाखा गिल हल्का और जगराओं हल्के में खुलकर प्रचार ही नहीं कर पाए और कई जगह पर उनको किसानों का भी विरोध झेलना पड़ा। यही कारण है कि उन्हें दाखा, गिल और जगराओं हल्के से मात्र और 49,364 वोट मिले, जबकि उनके प्रतिबंध राजा वडिंग को सबसे अधिक 129991 वोट और अशोक पाराशर पप्पी को 96008 वोट पड़े। इतना ही नहीं इन तीनों विधानसभा में अकाली दल के उम्मीदवार रणजीत सिंह ढिल्लों भी अपना बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाए और उन्हें भी मात्र 51513 वोट ही पड़े। यह तीनों विधानसभा ही रवनीत सिंह बिट्टू की हार का सबसे बड़ा कारण बनी और किसानों का विरोध भाजपा के उम्मीदवारों की हार का बड़ा कारण बना।
Ravneet-Singh-Bittu-Got-Record-Breaking-Votes-In-The-City-Assembly-Three-Circles-Of-The-Village-Drowned-Him