चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र के आखिरी दिन सरकार ने स्कूलों का फीस रेगुलेशन बिल पास करवा लिया। इस बिल के पास होने से स्कूलों पर पिछले 3 सालों में अभिभावकों से लिए 5% से ज्यादा बढ़ोतरी वाले पैसे वापस करने की तलवार लटक गई है। हालांकि, स्कूल भी पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट जाकर इस मामले में स्टे लेकर आ चुके हैं। वहीं, वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने सदन में पंजाब राज्य आउटसोर्स्ड पर्सनल बिल, 2026 पेश किया। उन्होंने कहा इस सर्विस के लिए हमने मुलाजिमों को दो श्रेणी में बांटा है। मुश्किल काम करने वाले मुलाजिमों के लिए 3 साल की शर्त रखी गई। इसमें बिजली कर्मी व सीवर कर्मी शामिल हैं। जबकि, दूसरी श्रेणी में 5 साल से कार्यरत मुलाजिमों को रखा गया है। इन सब मुलाजिमों को सरकार सीधे कांट्रेक्ट पर लेगी। इससे करीब 65 हजार आउटसोर्सड कर्मचारी सीधे सरकार के अंडर में आ गए हैं।
पढ़ाई सबसे बड़ी पूंजी, फीस पर 5% कैप
CM मान ने कहा कि पैसा, जमीन और संपत्ति चोरी हो सकती है, लेकिन पढ़ाई चोरी नहीं हो सकती। प्राइवेट स्कूलों की सालाना फीस बढ़ोतरी पर 5% की सीमा लगाई गई है, ताकि अभिभावकों पर मनमाना आर्थिक बोझ न पड़े। CM ने कहा कि जिन स्कूलों ने 3 साल में 15% से ज्यादा फीस बढ़ाई, उनका फोरेंसिक ऑडिट कराया जाएगा और नियमों के मुताबिक अतिरिक्त वसूली की रकम अभिभावकों को वापस कराई जाएगी। वर्दी, फीस की किस्तों और अन्य शुल्कों के नाम पर मनमानी वसूली पर भी रोक लगाने की बात कही।
कोरोना, स्कॉलरशिप और फीस के दबाव का मुद्दा
मान ने आरोप लगाया कि कोरोना काल में स्कूल और बसें बंद होने के बावजूद अभिभावकों से फीस वसूली गई। उन्होंने कांग्रेस सरकार के समय प्री-मैट्रिक/पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप में कथित गड़बड़ी, छात्रों की DMC रोके जाने और फीस के दबाव से जुड़े मामलों का भी जिक्र किया। अमृतसर की छात्रा की आत्महत्या का उदाहरण देते हुए कहा कि बच्चों पर फीस का दबाव कितना गंभीर हो सकता है।
सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदलने का दावा
CM ने कहा कि पहले गरीब और अमीर बच्चों के लिए शिक्षा व्यवस्था में बड़ा अंतर था और सरकारी स्कूलों को गरीबों की मजबूरी समझा जाता था। उन्होंने दिल्ली के सरकारी स्कूलों का उदाहरण देते हुए कहा कि AAP सरकार ने शिक्षा व्यवस्था में बदलाव किया, जिसकी चर्चा विदेशों तक हुई। इस बार 882 बच्चों के NEET पास करने का आंकड़ा भी उपलब्धि के तौर पर बताया।
विपक्ष को जवाब- बिल अभिभावकों के हित में
मान ने कहा कि बिल का विरोध करना विपक्ष का लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन अनावश्यक चिंता की जरूरत नहीं। उन्होंने कहा कि सरकार का मकसद स्कूलों को परेशान करना नहीं, बल्कि पैरेंट्स को “कस्टमर” की तरह ट्रीट किए जाने से रोकना और बच्चों के भविष्य की रक्षा करना है। उन्होंने विपक्ष से सरकार के अच्छे कामों की सराहना करने की अपील भी की।
Bill-Passed-Against-Private-Schools-In-Punjab-Assembly-Fee-Hikes-Exceeding-15-Percent-Over-Three-Years-Must-Be-Refunded-65000-Employees-Brought-Directly-Under-Government-Control