लुधियाना। ईडी की और से पीएसआईडीसी (पंजाब कोर इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट कॉर्प) के प्लॉटों की सेल परचेज को लेकर हुए घोटाले में लुधियाना की छह कंपनियों को रडार पर ले लिया है। जिसके चलते इन कंपनियों का ग्लाडा से रिकॉर्ड मांगा गया है। जिसमें फोकल पॉइंट, फेज-8, ढंडारी कलां में स्थित छह कंपनियों के नाम लिखकर उन्हें पीएसआईडीसी द्वारा अलॉट किए प्लॉटों की जानकारी मांगी गई है। इसमें एवन साइकिल लिमिटेड को 20 एकड़, वर्धमान एंड महावीर स्पिनिंग जनरल मिल्स लिमिटेड को 60 एकड़, रॉयल इंडस्ट्रीज लिमिटेड को 20 एकड़, हीरे साइकिल लिमिटेड को 100 एकड़, ओसवाल फैट्स एंड ऑयल लिमिटेड को 100 एकड़, रितेश इंडस्ट्रीज लुधियाना को 40 एकड़ जमीन का रिकॉर्ड मांगा गया है। आरोप है कि इन कंपनियों ने विभाग से जमीने अलॉट करके फिर दूसरों को बेच दी या गलत तरीके से सीएलयू कर लिया। बता दें कि ईडी की और से कुछ दिन पहले जहां चंडीगढ़, लुधियाना, अमृतसर और जालंधर में एक साथ कई ठिकानों पर रेड की गई थी। जांच के दौरान मिले दस्तावेजों के आधार पर आगे की इन्वेस्टिगेशन शुरु कर दी है। जिसके चलते लुधियाना की छह नामी इंडस्ट्रियल कंपनियां ईडी की जांच के घेरे में आ चुकी है। यह रिकॉर्ड मनी लॉन्ड्रिंग के तहत मांगा गया है।
मनमर्जी तरीके से इंडस्ट्री लगा तोड़े नियम, किसी ने बना डाली कॉलोनी
ईडी की जांच में पता चला है की पंजाब सरकार द्वारा इन कंपनियों को ऑफ द शेल्फ योजना के तहत कई शर्तों पर इंडस्ट्रियल जमीन की अलॉटमेंट की थी। इन अलॉटमेंट में कई शर्तें है, इस लेटर से कई खुलासे हो सकते है। अलॉटमेंट लेटर की मुख्य शर्ते थी कि जिस कंपनी को जमीन दी जा रही है, वहीं इंडस्ट्री वहां लग सकेगी। न तो उसका कभी सीएलयू हो सकेगा, न ही टुकड़ों में बांटी जा सकेगी और न ही इंडस्ट्री की नेचर बदली जा सकती थी। यानि कि अगर साइकिल इंडस्ट्री को अलॉट हुई, तो वहां उसके अलावा दूसरी इंडस्ट्री नहीं लग सकती थी। वहीं अगर किसी ने यूनिट लगाया, लेकिन वे फेल हो गया तो उक्त जमीन वापिस सरकार को देनी थी। लेकिन कारोबारियों ने अपनी मर्जी की इंडस्ट्री लगा दी तो किसी ने जमीन ही बेच दी।
ग्लाडा से माँगी जानकारी
ईडी ने ग्लाडा से कई सवाल कर जवाब मांगे है। उक्त कंपनियों को अलॉट की जमीनों के चेंज ऑफ लैंड यूज (सीएलयू) और लेआउट को मंजूरी देने के दस्तावेज, क्या ग्लाडा द्वारा पहले लेआउट प्लान को मंजूरी देने के बाद लेआउट में कोई बदलाव किया गया था, क्या यह जांच की गई कि उक्त जमीन पर मालकी हक 60 प्रतिशत इंडस्ट्रियल जमीन विकसित करने की शर्त थी, उक्त कंपनियों की जमीनों की अलॉटमेंट से संबंधित नेट रेजिडेंशियल डेंसिटी देने के आदेश किए गए हैं।