यशपाल शर्मा, लुधियाना किसान सुखविंदर सिंह सुसाइड मामले में खींचतान की स्थिति पैदा होती दिखाई दे रही है। जहां पहले सुखविंदर सुसाइड मामले में आरोपी कारोबारियो की गिरफ्तारी के लिए भारतीय किसान यूनियन (सिद्धपुर) की अगुवाई में पुलिस कमिश्नर ऑफिस धरना लगाया था और इसके तुरंत बाद तीन आरोपियों में से एक आरोपी कारोबारी राजेश जैन को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। लेकिन वही अब बहादुर के टेक्सटाइल और निटवियर एसोसिएशन सहित कुछ अन्य संगठन की ओर से 16 अगस्त को राजेश जैन को छुड़ाने के लिए पुलिस कमिश्नर ऑफिस में धरने का ऐलान कर दिया गया है। यह घोषणा कारोबारी नेता और जैन समुदाय से जुड़े तरुण जैन बावा की ओर से की गई है। बावा पक्ष का कहना है जिस जमीन को लेकर ये यह पूरा विवाद है उसे जमीन को हाई कोर्ट के आदेशों के बाद ही कब्जा लिया गया है। जबकि पीड़ित पक्ष का कहना है कि कारोबारी ने इस जमीन के जाली दस्तावेज तैयार कर इस मामले को अपने हक में करवा कर बड़ी साजिश रची है। बड़ी बात है कि भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले सुखविंदर के पक्ष में बड़ी मात्रा में किसान दो दिन पहले पुलिस कमिश्नर ऑफिस में धरने पर आकर बैठे थे और उन्होंने आरोपी कारोबारियो की गिरफ्तारी की मांग की थी। वहीं अब बाबा ने भी तमाम कारोबारी संगठनों को राजेश जैन की गिरफ्तारी को छुड़वाने के लिए इस धरने में बैठने का ऐलान किया है जबकि खुद तरुण जैन बाबा भी किसान यूनियन के अहम संगठन से जुड़े हुए हैं। सुखविंदर सुसाइड मामले में सुसाइड नोट बड़ा सबूत मरने से पहले सुखविंदर ने एक सुसाइड नोट छोड़ा था। जिसमें उसने राजेश कुमार जैन, उसके पिता देवराज और बेटे अश्विनी जैन पर जमीन कब्जाने और झूठे पर्चे दर्ज करवाने की धमकियों के आरोप लगाए थे । सुसाइड नोट एक ऐसा सबूत है, जिसके चलते अगर दोनों पक्षों में किसी तरह का समझौता नहीं होता तो पुलिस के लिए आरोपियों की गिरफ्तारी अनिवार्य बन जाती है। कारोबारियों पर जमीन हड़पने का आरोप भाई दिलदार सिंह का कहना है कि सुखविंदर सिंह खेतीबाड़ी का काम करते थे। उनकी 7 किल्ले जमीन थी। कारोबारी जमीन हड़पना चाहते थे। उन्होंने जमीन के फर्जी दस्तावेज तैयार करवा लिए थे। साथ ही वे सुखविंदर को झूठे केसों में फंसाने की लगातार धमकी दे रहे थे। बीती 11 अगस्त को सुखविंदर सिंह ने सल्फास निगल ली थी। किसानों ने कहा कि यदि आरोपी कारोबारियों को गिरफ्तार नहीं किया गया तो वह कड़ा संघर्ष करेंगे।
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