ग्रेटर लुधियाना एरिया डेवलपमेंट आथोरिटी ( ग्लाड़ा ) में फाइलों को गायब कर इसके जाली दस्तावेज तैयार कर इसे बेचने का सिलसिला जारी था। इस पूरे स्कैम को अंजाम देने के लिए जाली दस्तावेज तैयार करने के साथ साथ ग्लाड़ा की बोगस मोहरें, जाली अस्टॉम तैयार किए जाते थे। सूत्र बताते हैं कि ग्लाड़ा के आला अफसरों को महीनों से आफिस से फाइलें गायब होने की भनक थी, लेकिन इसके बावजूद वे मामला दबाए रहे और पुलिस एफआईआर तक दर्ज नहीं करवाई। बताया जाता है कि अब जब इस मामले में पुलिस एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं तो इस पूरी जांच में सामने आ रहा है कि आफिस स्टाफ की मिलीभुगत से करीब सौ से अधिक फाइलें गायब होने का अंदेशा जताया जा रहा है। इस पूरे स्कैम में अभी तक केवल कांट्रेक्ट पर रखे क्लर्कों की मिलीभगत बताई जा रही है, लेकिन कईं सौ करोड़ रुपए के इस स्कैम में ग्लाड़ा के तत्कालीन ईओ से लेकर ऊपर के अफसरों की मिलीभगत के साथ साथ रजिस्ट्रार आफिस में तैनात तहसीलदार जो जाली अस्टाम लगे होने के बावजूद रजिस्ट्री को मंजूरी देते रहे हैं, की भी मिलीभगत शक के दायरे में हैं। ग्लाड़ा के आला अधिकारी इस लिए भी इस पूरे स्कैम के दायरे में आ सकते हैं, क्यों कि इस स्कैम के साथ साथ आफिस के अंदर चल रहे कईं अन्य घोटालों से पर्दा उठता दिखाई देने लगा है। न केवल एससीओ व प्लॉट की बोगस दस्तावेजों के जरिए खरीद फरोख्त हुई, ब्लकि बनती सरकारी फीस अदायगी के अंदरखाते एनओसी जारी करने का भी बड़ा खेल आने वाले दिनों में सामने आ सकता है। सुनने में ये भी आ रहा है कि सरकारी फीस भरने में बाेगस रसीदें काटे जाने का अंदेशा जताया जा रहा है।
पुलिस ने ग्रेटर लुधियाना एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GLADA) के मुख्य प्रशासक को पत्र लिखकर उन 80 फाइलों के संरक्षक के बारे में जानकारी मांगी है, जो रिकॉर्ड से गायब थीं और बाद में दुकान-सह-कार्यालयों को बेचने के लिए जाली दस्तावेजों का निर्माण करने में उपयोग की गईं ( एससीओ) पुलिस ने ग्लाडा अधिकारियों से यह भी पूछा है कि उन्होंने फाइलों के गुम होने की सूचना पुलिस को क्यों नहीं दी। पुलिस ने यह भी पाया कि करोड़ों रुपये के घोटाले में शामिल आरोपियों ने मंजीत सिंह उर्फ जस्सी का इस्तेमाल किया है, जिसे मामले में बीतें दिनों गिरफ्तार किया गया था, उन लोगों को धमकी देने के लिए एक गुर्गे के रूप में जिन्होंने उनके खिलाफ शिकायत करने की कोशिश की थी।
एडिश्नल डिप्टी कमिश्नर आफ पुलिस (एडीसीपी, जांच) अमनदीप सिंह बराड़ ने कहा कि पुलिस ने आरोपियों के पास से 30 फाइलों के अलावा GLADA अधिकारियों की मोहरें भी बरामद की हैं। उन्होंने कहा कि मामले में और भी गिरफ्तारियां होने की उम्मीद है। पुलिस द्वारा जांच तेज करने के बाद, कुछ आरोपी पहले ही जमानत के लिए अदालत का रुख कर चुके हैं। जानकारी मुताबिक अब तक कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें एक महिला भी शामिल है।
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जाली दस्तावेज तैयार करने वाले मास्टरमाइंड को पकड़ने की कोशिश
बताया जाता है कि पुलिस इस पूरे स्कैम में ग्लाड़ा से फाइलें गायब कर इनसे मिलते जुलते जाली दस्तावेज तैयार करने वाले मास्टरमाइंड को पकड़ने की कोशिश में हैं। जिसमें विजय महाजन उर्फ सोनू व उसके एक अन्य साथी की तालाश की जा रही है। बताया जाता है कि जाली दस्तावेज तैयार करने में इनके पास पूरी महारत हासिल है और इसी तर्ज पर इनकी ओर से ग्लाड़ा की जाली मोहरें व जाली अस्टाम भी तैयार किए गए। जिसकी बदौलत ग्लाड़ा व सरकारी खजाने में तो एक भी रुपया नहीं आया, लेकिन एक एससीओ व प्लॉट के एवज में ये लोग 2.5 करोड़ से लेकर छह करोड़ रुपए जरुर अपनी जेबें में भरते रहे। इसके बाद इस राशि को बराबर तयशुदा हिस्सों में बांट दिया जाता था। ग्लाड़ा आफिस से फाइलें चुराने के बाद आरोपी जमीन की मालिकी अपने एक सहयोगी के नाम पर ट्रांसफर कर देते थे। बाद में वे उसे दूसरे लोगों को बेच देते हैं। आरोपियों में से एक बसंत एवेन्यू के उपजीत सिंह के घर से फर्जी स्टांप के साथ छह से अधिक फाइलें बरामद हुई थी।
पुलिस ने आठ जनवरी को बोगस दस्तावेजों के जरिए करीब 5.5 करोड़ रुपए का एक एससीओ साउथ सिटी स्थित रेस्टोरेंट मालिक दीपक कथूरिया को बेचने की शिकायत पर ये एफआईआर दर्ज की थी। जिसमें अभी तक 12 से अधिक आरोपियों को नामजद किया जा चुका है। जिसमें इंक्वायरी के बाद पुलिस ने हरविंदर सिंह सचदेवा, परमिंदर सिंह सचदेवा ( दोनों भाई ) दुगरी फेस-1, मंजीत सिंह फूलांवाल, उपजीत सिंह बसंत एवेन्यू, नरेश कुमार दुगरी फेस-2, हरजिंदर कंग शिमलापुरी, विजय महाजन उर्फ सोनू पंजाब माता नगर, दीपक आहूजा लाड़ी निवासी राहों रोड, धांधरा निवासी मनीश पुरी व अमित कुमार के खिलाफ धारा 420, 465, 467, 468, 471 व 120 बी के तहत मामला दर्ज किया जा चुका है।
क्लर्क राज के पास हैं कईं राज
इस मल्टी करोड़ स्कैम में ग्लाड़ा के मुलाजिम क्लर्क राज के पास कईं तरह के राज दफन है और पुलिस उसकी तलाश में छापामारी भी कर रही है। बताया जाता है कि ग्लाड़ा में ईओ से लेकर एसीए तक किसी भी काम चाहे वे प्लॉट की एनओसी हो या प्रॉपर्टी संबंधी कोई अन्य मामला, हर एक मामले में इन अधिकारियों को राज की जरुरत पड़ती थी। पुलिस की ओर से राज की पत्नी मीनाक्षी उर्फ मीना से इस स्कैम की 5 लाख रुपए की नगदी बरामद कर चुकी है।
Gang-Selling-Sco-By-Preparing-Fake-Documents-Has-Been-Active-In-Glada-For-Last-One-And-A-Half-Year