चंडीगढ़। चंडीगढ़ पुलिस ने 14 साल बाद DAV कॉलेज की छात्रा नेहा अहलावत हत्याकांड को सुलझाया है। यह केस ब्लड डोनेशन कैंपों की मदद से सुलझाया गया है। पुलिस ने पिछले 1 साल में सरकारी और निजी संस्थाओं द्वारा लगाए गए ब्लड डोनेशन कैंपों पर नजर रखी और उनके डीएनए टेस्ट कराए। जिनमें से एक का मिलान मृत छात्रा के पास मिले डीएनए से हो गई। इसी के आधार पर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में आरोपी मोनू ने न तो अपना आधार कार्ड बनवाया और न ही कभी स्मार्टफोन का इस्तेमाल किया। आधार कार्ड न होने से उसके फिंगर प्रिंट भी मैच नहीं हुए। यही वजह है कि वारदात स्थल से 500 मीटर की दूरी पर रहते हुए भी वह 14 साल तक नहीं पकड़ा गया। मामले में डीएसपी चरणजीत सिंह विर्क ने बताया कि एसएसपी चंडीगढ़ कंवरदीप कौर के आदेशों पर ब्लड डोनेशन कैंपों पर नजर रखी जा रही थी। वहीं से आरोपी के बारे में लीड मिली। उसके आधार पर आरोपी को गिरफ्तार किया है। इस मामले में कोई भी सुराग न मिलने के कारण पुलिस ने केस बंद कर दिया था, लेकिन अंदर खाते पुलिस इस मामले की जांच में लगी हुई थी। मृतका के पिता का कहना है कि उन्हें उम्मीद नहीं थी की 14 साल बाद उसकी बेटी के साथ दरिंदगी कर उसकी हत्या करने वाले को पकड़ लिया जाएगा। जब थाने में छात्रा के पिता पहुंचे तो आरोपी अपनी इस घिनौनी हरकत के लिए उनसे माफी मांगने लगा। अब मृतिका के पिता ने आरोपी को फांसी की मांग की है।
Murder-Mystery-Solved-Through-Blood-Donation-Camp-Samples-Of-More-Than-800-People-Taken-In-Chandigarh-Neha-Ahlawat-Case-Accused-Arrested-After-14-Years