यशपाल शर्मा, लुधियाना
जहां एक ओर दयानंद मेडिकल कालेज एंड हास्पिटल डेढ़ साल बाद भी इंवायरमेंट क्लीयरेंस के फंदे से बाहर नहीं निकल पाया है, लेकिन अब दंडी स्वामी स्थित दयानंद मेडिकल कालेज एजुकेशनल इंस्टिट्यूट भी इस पचडे़ में फंसता दिखाई दे रहा है। असल में डीएसमी मैनेजमेंट की ओर से सालों से बिना पीपीसीबी से वॉटर एंड एयर की कंसेंट लिए बिना चल रहे दयानंद मेडिकल कालेज एजुकेशनल इंस्टिट्यूट की कंसेंट हासिल करने की प्रक्रिया आरंभ की जा चुकी है। डीएमसी के लिए इस पूरी प्रक्रिया में राहत की बात ये थी कि मिनिस्ट्री आफ इंवायरमेंट, फारेस्ट एंड क्लाइमेट चेंज की ओर से 29 जनवरी 2025 को एक नोटिफिकेशन जारी कर एजुकेशनल इंस्टिट्यूट के बिल्ड अप व कवर एरिया की लिमिट को 20 हजार स्कवेयर मीटर से बढ़ाकर 1.50 लाख स्कवेयर मीटर करने को मंजूरी दे दी थी और इस नोटिफिकेशन डीएमसी मैनेजमेंट के पदाधिकारियों के चेहरों की मायूसी को खुशी में तबदील कर दिया था। लेकिन माननीय सुप्रीम कोर्ट में 24 फरवरी को इस नोटिफिकेशन पर स्टे लगाने को लगाई याचिका नंबर 48655/2025 पर सुनवाई करते हुए 29 जनवरी 2025 को जारी नोटिफिकेशन को स्टे कर दिया गया, जो डीएमसी जैसे पूरे देश भर के कईं एजुकेशनल इंस्टिट्यूट के लिए बड़ा झटका साबित हुई हैं। बात करें पुराना दयानंद मेडिकल कालेज जिसका बिल्ड अप एरिया भी 20 हजार स्कवेयर मीटर से अधिक बताया जा रहा है, के लिए बड़ी आफत खड़ी करता दिखाई दे रहा है। असल में पीपीसीबी व डीएमसी मैनेजमेंट के बीच वॉटर एंड एयर की कंसेंट लेने की प्रक्रिया जारी है और बताया जाता है कि डीएसमी ने करोड़ों रुपए पीपीसीबी में जमा भी करवा दिया है। लेकिन अब बिल्ड अप एरियर की लिमिट 20 हजार स्कवेयर मीटर से नीचे होने की क्लाज ने फिर से पीपीसीबी को कंसेंट जारी करने में नई आफत खड़ी कर दी है। बताया जाता है कि डीएमसी प्रबंधन ने नई नोटिफिकेशन के दस्तावेज लगा अपनी फाइलों को निकलवाने के प्रयास में था और पीपीसीबी के आला अधिकारी को भी इस स्टे की जानकारी तक नहीं थी। लेकिन जब उन्हें इस स्टे की काॅपी भेजी गई तो उन्हें भी असलियत का पता चल पाया।
अब फिर से इंवायरमेंट क्लीयरेंस का फंसा मामला
गौर हो कि 20000 स्क्वायर मीटर से ऊपर की कंस्ट्रक्शन पर नियमों के तहत एनवायरमेंट क्लियरेंस लेनी जरूरी होती है, लेकिन इस निर्माण में सब कुछ दरकिनार कर दिया गया। अगर दयानंद मेडिकल कॉलेज पीपीसीबी की इंस्पेक्शन में एनवायरमेंट क्लीयरेंस के घेरे में आया तो इनके लिए बोर्ड से कंसेंट तक हासिल करना मुश्किल हो जाएगा क्योंकि बोर्ड से कंसेंट लेने के लिए एनवायरमेंट क्लीयरेंस का स्टेप क्लियर करना बहुत जरूरी है।
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मेडिकल वेस्ट को लेकर भी छिपाए जा रहे तथ्य
बताया जाता है कि डीएमसी मैनेजमेंट के पदाधिकारी अपने कंस्लटैंटस के जरिए मेडिकल वेस्ट को लेकर भी कईं तथ्य छिपा अंदरखाते बोर्ड अधिकारियों के साथ सेटिंग कर इस कंसेंट के पचडे़ में नहीं पड़ना चाह रहे हैं। आपको बता दे किसी भी मेडिकल कालेज जहां पर बच्चों को एमबीबीएस के पहले समैसटर में ही मृत मानव व जानवरों की बॉडी को टेबल पर रख उनकी बॉडी से पार्टस को निकाल कर शरीर के विभिन्न अंगों की जानकारी दी जाती है। बताया जाता है कि पीपीसीबी अधिकारियों को अब ये कहकर पागल बनाया जा रहा है कि मेडिकल स्टूडेंटस को मानव बाॅडी की डमी को टेबल रख उसके बॉडी पार्टस की जानकारी कालेज में दी जाती है। लेकिन अगर कोई भी कालेज डमी के जरिए स्टूडेंटस को स्टड़ी करवाएगा तो किसी भी डाक्टर को बाड़ी के अंदर की बड़ी से बारीक नस के बारे में कैसे पता चल पाएगा और आपरेशन करते उसे ये जानकारी कैसे होगी कि एक अहम अंग की दूसरे अहम अंग से दूरी कितनी है और ऐसे में बाडी को कहां से कट करना है। मतलब ये कि पीपीसीबी के आला अफसरों को गुमराह व सेटिंग के जरिए मेडिकल वेस्ट की कंसेंट से निकलने की कोशिश की जा रही है।