मौसम के बिगड़ते मिजाज ने किसानों के साथ साथ सरकार की मुश्किलो को बढ़ा दिया है। किसानों की मुश्किल इस बार इसलिए भी अधिक बढ़ गई है क्योंकि कोरोनावायरस के संकट के चलते किसानों को पास के जरिए बारी बारी मंडियों में बुलाया जा रहा है और इसके चलते वह अपनी पूरी तैयार फसल भी मंडी तक नहीं ला पा रहे हैं और ऐसे में अधिक बारिश उनकी 6 महीने की कड़ी मेहनत वह गाढी कमाई पर पानी फेर सकती है। शुक्रवार देर रात व शनिवार तड़के हुई बारिश के कारण भी राज्य के कई हिस्सों में खड़ी फसल को नुकसान होने की भी जानकारियां विभिन्न जगहों से आ रही है। इसके साथ साथ सरकार को भी मंडियों में आने वाली कनक को किस तरह से बेहतर ढंग से सुरक्षित रखना है इसकी व्यवस्था को अभी से सुनिश्चित करना होगा। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक अगले 21 व 22 अप्रैल को भी बारिश की संभावना जताई जा रही है । पंजाब खेतीबाड़ी यूनिवर्सिटी मौसम विज्ञान के वैज्ञानिक डॉक्टर कुलविंदर कौर ने कहा कि बरसात काफी हल्की हुई है।मंडियों में पड़ी कनक के बीच नमी की मात्रा जरूर बढ़ सकती है। डॉक्टर कुलविंदर कौर गिल ने कहा कि अप्रैल महीने के बीच यह पहली बारिश हुई है और 4.5 एमएम बरसात लुधियाना में दर्ज की गई जबकि मार्च महीने के बीच इस बार आम के मुकाबले ज्यादा बारिश हुई है। यही कारण है कि तापमान में भी लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है । उन्होंने कहा कि वेस्टर्न डिस्टरबेंस काफी भारी रही है और 21- 22 अप्रैल को फिर से बारिश पड सकती है । इसके अलावा उन्होंने कहा कि इस बार मॉनसून भी काफी मजबूत रहने वाला है।
Rain On Wheat Crops And Mandi