यशपाल शर्मा, लुधियाना बीते दिनों लुधियाना इंप्रूवमेंट ट्रस्ट में नियमों को अनदेखा कर हरी झंडी दिए गए एलडीपी (लैंड डिस्पलेस्ड पर्सन) प्लाटों के प्रस्तावों को पंजाब सरकार से मंजूरी दिलाने के लिए ट्रस्ट अफसरों की ओर से चंडीगढ़ के चक्कर काटने शुरू कर दिए गए हैं, जिनमें इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के चेयरमैन भी शामिल है। बीते शुक्रवार को इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के चेयरमैन अपनी पूरी फौज के साथ चंडीगढ़ रहे और इसके लिए वे लोकल बाडी गर्वमेंट के सेक्टर 35 स्थित पंजाब म्यूनिसिपल भवन में लोकल बॉडी के प्रिंसिपल सेक्रेटरी, डायरेक्टर और जॉइंट सेक्रेटरी सहित चीफ विजिलेंस ऑफिसर से संपर्क साधने में जुटे रहे। बड़ी बात है कि इंप्रूवमेंट ट्रस्ट में पिछले चार साल में पहली बार किसी ट्रस्ट मीटिंग में 10 एलडीपी से संबंधित प्रस्तावों को एक साथ मंजूरी देकर सरकार के पास प्रवानगी को भेजा गया है । गौरतलब है कि ऐसे सैंकड़ों एलडीपी केस पंजाब सरकार की लोकल गवर्नमेंट के लिए बड़े मुसीबत बने हुए हैं । यही कारण है कि लुधियाना ट्रस्ट से करीब 4 साल पहले जिन 100 के करीब एलडीपी प्रस्तावों को मंजूरी देकर सरकार के पास भेजा गया था, उन्हें अभी तक सरकार अपने स्तर पर फैसला नहीं ले पाई है और इस गड़बड़झाले में इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के कईं चेयरमैन सहित कई अफसर चार्जशीट तक हो चुके हैं । असल में इस पूरे विवाद में लोकल गवर्मेंट अपना पल्ला छुड़ाते हुए इंप्रूवमेंट ट्रस्टो को दोबारा से अपने स्तर पर फैसला लेने का पत्र जारी कर दिया गया है और इसी के सहारे ट्रस्ट आफिसों में बड़े घोटाले की चिंगारी सुलगने लगी है। इनमें कईं केस तो ऐसे हैं जिनमें ₹500 की रसीद तक एलडीपी का क्लेम करने वाले होल्डर के पास नहीं है, लेकिन मिलीभगत से उनका क्लेम खड़ा करने को उनसे ₹500 की रसीद राशि ब्याज राशि के साथ भरवाई गई है। इतना ही नही कई एलडीपी केस में डबल अलॉटमेंट जैसे घोटाले भी है, और अब अंदर खाते इन फाइल्स में से ऐसे एतराज वाले कागज गायब कर दोबारा से क्लेम खड़ा किया जा रहा है। ---- लोकल गवर्मेंट अफसरों के लिए नवजोत सिंह सिद्धू बड़ी मुसीबत बात करें लोकल गवर्नमेंट के अफसर जिनमें प्रिंसिपल सेक्टरी से लेकर सीवीओ तक शामिल है, उनके लिए नवजोत सिंह सिद्धू और उनके तत्कालीन सीवीओ सतनाम सिंह मानिक सबसे बड़ी समस्या है और यही कारण है कि कई सालों से अभी तक यह प्लॉट चंडीगढ़ में ही अटके हुए हैं। असल में तत्कालीन सीवीओ सतनाम सिंह की ओर से अपनी रिपोर्ट में अधिकतर एलडीपी केसों को रद्द करने की रिपोर्ट की गई थी और उनकी ओर से कई अफसरों की चार्ज शीट भी भेजी गई थी। लेकिन तब नवजोत सिंह सिद्धू का तत्कालीन पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के के साथ साथ विवाद खड़ा होने के चलते उनसे लोकल लोकल गवर्नमेंट मिनिस्ट्री का चार्ज वापस ले लिया गया गया था लेकिन नवजोत सिंह सिद्धू ने यह चार्ज छोड़ने से पहले इन सभी फ़ाइलों की फोटो कॉपी करवा कर अपने पास रख ली थी। यही कारण है कि उनकी ओर से की गई जांच पड़ताल के बाद अब कोई भी अफसर सेटिंग और फ़ाइल के साथ छेड़छाड़ का खेल नहीं खेल सकता है और इसी के चलते लोकल गवर्नमेंट अफसर अपनी चमड़ी बचाने को ट्रस्टों को चिट्ठी जारी कर अपने स्तर पर इन पर फैसला लेने को कह रहा है। अब अगर इन रिपोर्ट के उलट लोकल गवर्नमेंट या इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के अफ़सर कोई फैसला ले कर कुछ घालमेल करने की कोशिश करते हैं तो सिद्धू के पास रखे दस्तावेज किसी भी अफसर को स्टेट विजिलेंस के चुंगल में या एफआईआर दर्ज होने से लेकर नौकरी से हाथ धोने तक की कार्रवाई के घेरे में फंसा सकता है। ऐसे में अब ट्रस्ट के शातिर चेयरमैन और अफसर एलडीपी के खरीददारों को कोर्ट पहुंच इनकी अपील करने की राय दे रहे है। अब इस मामले में पेंच यह फंस गया है कि है कि कांग्रेस सरकार के पास केवल डेढ़ से 2 महीने का समय बचा है और इतने समय में एलडीपी होल्डर को कोर्ट से राहत मिलने की संभावना बहुत कम है। इसलिए अब जल्दबाजी में ऐसे केसों को ट्रस्ट मीटिंग में रखकर इन्हें सरकार के पास मंजूरी का रास्ता निकाला जा रहा हैं। जिससे एक बार फिर से इन विवादित एलडीपी को मंजूरी देने से एक तलवार लोकल गवर्नमेंट के सेक्रेटरी, डायरेक्टर, जॉइंट डायरेक्टर और सीवीओ के गलों पर लटकती दिखाई दे रही है।
In The Local Government Office The Stirring To Clear The Disputed Ldp Files Intensified