चुनाव के नतीजों में अभी 3 दिन शेष हैं लेकिन इस बार चुनाव के नतीजे सबको चौंका सकते हैं बात करें लुधियाना की शहरी सीटों का तो इस चुनाव में हिंदुत्व का मुद्दा चुनावी समीकरण में बड़ा बदलाव ला से दिखाई दे सकता है। लुधियाना 3 शहरी सीटें जिन पर भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार खड़े होते हैं, पर 3 महीने पहले लग रहे कयास में भाजपा उम्मीदवारों को बेहद कमजोर आंका जा रहा था। लेकिन अब इन्हीं 3 सीटों पर भाजपा के उम्मीदवार बेहद मजबूत स्थिति में दिखाई दे रहे हैं और इतना ही नहीं इनकी जीत तक के दावे होने लगे हैं। इसका बड़ा कारण है कि इस बार घनी आबादी वाले हिंदू एरिया में बंपर वोटिंग होना है। भले ही लुधियाना की सीटों पर 2017 के मुकाबले में कम वोटिंग हुई है लेकिन इसके बावजूद घनी आबादी वाले हिंदू एरिया में यह वोटिंग पिछले विधानसभा के मुकाबले अधिक बताई जा रही है। इस बार शहरी सीटों पर त्रिकोना व चोकोना मुकाबला भी चुनाव नतीजों में बड़ा फेरबदल कर सकता है। बात करें लुधियाना की शहरी सीटों पर तो इसमें कांग्रेस से बगावत कर आम आदमी पार्टी में गए उम्मीदवार कांग्रेसी उम्मीदवारों का खेल बिगाड़ते दिखाई दे रहे हैं। वहीं हिंदुत्व का मुद्दा, मोदी का जलवा, डेरा फैक्टर इस चुनाव के नतीजों पर बड़ा असर डाल सकते हैं। ----लुधियाना सेंट्रल सीट लुधियाना की सेंट्रल सीट पर कांग्रेस छोड़कर आम आदमी पार्टी में शामिल हुए अशोक पराशर पप्पी कांग्रेसी उम्मीदवार सुरिंदर डाबर को कड़ी टक्कर दिखाई देते दिखाई दे रहे हैं और इस टक्कर का बड़ा फायदा भाजपा के उम्मीदवार गुरुदेव शर्मा देवी उठा सकते हैं। यह कयास लगाए जा रहे हैं कि पप्पी इस बार सुरिंदर डाबर का बड़ा वोट बैंक काट सकते हैं और अगर ऐसा हुआ तो भाजपा की कैडर वोट, हिंदुत्व का मुद्दा और मोदी का जलवा भाजपा को इस बार मजबूत स्थिति में खड़ा कर सकता है। --- लुधियाना पश्चिमी सीट बात करें पश्चिमी सीट तो इस पर कांग्रेस के उम्मीदवार और कैबिनेट मंत्री भारत भूषण आशू सबसे मजबूत कैंडिडेट के तौर पर आंके जा रहे है। दो महीने पहले इस सीट से उनकी जीत का फतवा भी पब्लिक के बीच में से निकल कर आ रहा था, लेकिन बाद में इस सीट पर भी उभरे समीकरणों ने कांग्रेस की सीट को बड़े खतरे में डाल दिया है। मजबूत उम्मीदवार भारत भूषण आशू इस सीट पर अपनों के बीच में ही घेरते दिखाई दे रहे हैं । इस सीट पर कांग्रेस छोड़कर आम आदमी पार्टी में शामिल हुए गुरप्रीत गोगी उनकी बड़ी समस्या का एक कारण बने है, तो वही उनके खास मित्र व नज़दीकियों में शुमार कारोबारी तरुण जैन बाबा जो कि लुधियाना वेस्ट सीट से संयुक्त समाज मोर्चा के उम्मीदवार भी आशु की मुश्किलों का दूसरा बड़ा कारण है। इतनी मुश्किलों ने आशु की जीत के दावों पर विराम लगा दिया है। आशु के लिए भी इस सीट पर हिंदू सिख वोट के समीकरण बड़े भारी पड़ सकते हैं। आशु की सीट पर जीत और बंपर वोटिंग के लिए कहीं ना कहीं उन्हें सिख वोट का बड़ा समर्थन होना एक बड़ा कारण रहा है। इस सीट से शिरोमणि अकाली दल के उम्मीदवार महेशिंदर सिंह ग्रेवाल कहीं ना कहीं आशु के सिख वोट बैंक में बड़ी सेंधमारी मारी कर सकते हैं और अगर ऐसा होता है तो इसका सीधे-सीधे नुकसान भी सामने आ सकता है। तरुण जैन बाबा भी जैन समुदाय और कारोबारी वर्ग से उन्हें अच्छी खासी वोटिंग होने का दावा कर रहे हैं। हालांकि आशु समर्थकों की ओर से तरुण जैन बाबा की वोट को 4000 से 4500 तक आंका जा रहा है, लेकिन पब्लिक में यह आउटपुट 10,000 से अधिक वोटों का सुनने में आ रहा है और वही अगर अकाली उम्मीदवार महेशिंदर सिंह ग्रेवाल दी अपनी वोट का आंकड़ा 15000 से 20000 तक या इससे अधिक कर ले जाते हैं तो मजबूत उम्मीदवार आशु की सीट खतरे में आ सकती है और इन हालातों में सीधे-सीधे आशु के सामने गुरप्रीत गोगी और भाजपा के उम्मीदवार एडवोकेट विक्रम सिद्धू कड़े मुकाबले में आ सकते हैं। जहां गोगी की ओर से भी अपनी जीत के दावे किए जा रहे हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार को 30 हजार के आसपास वोट पड़ा था और गोगी के लंबे राजनीतिक तजुर्बे के चलते इस बार उन्हें कम नहीं आंका जा रहा। वही बिक्रम सिंह सिद्धू के लिए भाजपा की कैडर वोट, हिंदुत्व का मुद्दा और मोदी का जलवा इस सीट पर जीत के 30,000 वोट के आंकड़े को पार करवा सकता है। ----लुधियाना उत्तरी सीट लुधियाना की उत्तरी सीट पर भी मुकाबला बेहद दिलचस्प होता दिखाई दे रहा है इस सीट पर कांग्रेश के मौजूदा विधायक उम्मीदवार राकेश पांडे को भाजपा के उम्मीदवार प्रवीण बंसल और आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार मदन लाल बग्गा और शिरोमणि अकाली दल के उम्मीदवार आर डी शर्मा टक्कर देते दिखाई दे रहे हैं। लुधियाना की नॉर्थ सीट पर भी लुधियाना सेंट्रल जैसे हालात बनते दिखाई दे रहे है। इस सीट पर जितनी अधिक वोट लेकर जाएंगे उसका सीधे-सीधे नुकसान मौजूदा कांग्रेसी विधायक राकेश पांडे को होने की संभावना है इसके साथ साथ आर डी शर्मा अगर अधिक वोट यहां से ले जाते हैं तो भी इसका लुकसान राकेश पांडे और भाजपा उम्मीदवार प्रवीण बंसल को हो सकता है लेकिन बंसल लगातार इस विधानसभा से बेहद कम मार्जिन से चुनाव हारे हैं, इस बार भाजपा की कैडर वोट, हिंदुत्व का मुद्दा और मोदी का जलवा उनके पलड़े को हैवी करता दिखाई दे रहा है। ---- लुधियाना पूर्वी सीट बात करें लुधियाना की पूर्वी सीट की तो इस विधानसभा क्षेत्र में भी मौजूदा कांग्रेस के विधायक संजय तलवार के लिए पंजाब लोक कांग्रेस के उम्मीदवार और कमल के फूल पर चुनाव लड़ रहे जगमोहन शर्मा बड़ी मुसीबत बन गए हैं । इस सीट पर पिछली विधानसभा चुनाव में काउंटिंग के अंतिम दौर में आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार दलजीत सिंह भोला ग्रेवाल जीतते जीतते चुनाव हार गए थे। इसके साथ साथ डेवलपमेंट के नाम पर वोट मांग रहे शिअद के उम्मीदवार रंजीत सिंह ढिल्लों भी जीत की दौड़ से बाहर हो गए थे। संजय तलवार के लिए 2017 के चुनाव में टिब्बा रोड से आगे चंडीगढ़ रोड का एरिया जिसमें 32 सेक्टर सहित कई हिंदू वर्चस्व वाली कॉलोनियां हैं से उन्हें जमकर हिंदू वोट पोल हुई थी। लेकिन इस बार कमल का फूल उनके पुराने समीकरण को बिगड़ता दिखाई दे रहा है। संजय तलवार की ओर से 4000 करोड़ रुपए की लागत से पूर्वी विधानसभा में डेवलपमेंट का दावा भी उल्टा पड़ता दिखाई दे रहा है तलवार ने तो अपनी डेवलपमेंट के दावे में सरकारी जमीन की लागत भी डाल कर इसे बढ़ा चढ़ा कर पेश किया जो की जनता के गले नहीं उतरा । असल में संजय तलवाड़ अपने इस 4000 करोड़ रुपए की डिवॉल्पमेंट के दावे के जरिए पूर्व शिअद विधायक रंजीत सिंह ढिल्लो की डेवलपमेंट को फेल करने की दौड़ में थे जिसमें वह बुरी तरह फेल रहे। वही उनके पास पार्षदों के तौर पर नए चेहरे इस विधानसभा चुनाव में कितने कारगर साबित होंगे यह भी 10 मार्च को आने वाले नतीजों से साफ हो जाएगा। इस सीट पर शर्मा की ओर से अधिक हिंदू वोट चटकाने से कम मार्जिन से चुनाव हारने वाले दलजीत सिंह भोला ग्रेवाल चुनाव जीतने की स्थिति में हैं।
Ludhiana Vidhan Sabha Election Results