विजिलेंस ईओ विंग की ओर से इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के पूर्व चेयरमैन रमण बाला सुब्रामनियम पर दर्ज एफआईआर मामले में लगाई जमानत याचिका पर आज एडिशनल सेशन जज की कोर्ट में सुनवाई की गई। अदालत में जहां विजिलेंस की ओर से अपना पक्ष रखा गया तो वहीं दूसरे पक्ष से रमण बाला सुब्रामनियम के वकील पवन घई की ओर से विजिलेंस एफआईआर पर अपना पूरा पक्ष रखा। इस अवसर पर कोर्ट में सुनवाई दौरान रमण बाला सुब्रामनियम का बेटा करण रमण भी मौजूद रहा। इस दौरान पूर्व चेयरमैन रमण बाला सुब्रामनियम के वकील पवन घई ने विजिलेंस की एफआईआर को गलत बताते कहा कि 475 एकड़ स्कीम में बतौर एलडीपी अलॉट गए 9 बी और ट्रांसपोर्ट नगर में प्रेमनाथ सूद की एलडीपी की एवज में ऋषि नगर में ड्रा के जरिए दिए गए प्लॉट नंबर 106 डी की अलॉटमेंट सरकार व कोर्ट के निर्देशों पर दिया गया। इसके साथ साथ एडवोकेट पवन घई ने 106 डी प्लॉट की अलॉटमेंट को लेकर एफआईआर में ईओ कुलजीत कौर को प्रॉपर्टी डीलर संजय जैन की ओर से दो बार 25-25 लाख रुपए की रिश्वत रमण बाला सुब्रामनियम को देने पर एतराजा जताते कहा कि विजिलेंस के पास इसका कोई गवाह है तो वे पेश करे, ये आरोपा केवल राजनीतिक तौर पर लगाए गए । एडवोकेट पवन घई ने अपनी हर दलील में सरकारी कागज पेश किए जाने पर इस सुनवाई दौरान जज ने ये भी जरुर पूछा कि अब रमण बाला सुब्रामनियम चेयरमैन के पद पर नहीं, तो भी उनके पास हर एक मामले के सरकारी कागज कैसे माैजूद हैं, तो एडवोकेट पवन घई ने कहा कि उन्हें पता था कि इस कुर्सी पर जाने के बाद कईं तरह के आरोप लगेंगे, इसलिए रमण बाला ने हर मामले में दस्तावेज की फोटो कापी अपने पास रखी है, इस जबाव पर जज साहब जरुर हैरान हुए। वहीं पवन घई की ओर से कोर्ट में अपना पूरा पक्ष रखने के बाद विजिलेंस के डीएसपी करमवीर सिंह चहल ने अपना पक्ष रखते कहा कि 106 डी नंबर केस केवल आधी लाइन का है। उन्होंने कहा कि एलडीपी केस में प्लाट केवल डिस्पलेसड पर्सन को बैनिफिट देने को दिया जाता है, लेकिन इस केस में अलाटी प्रेमनाथ सूद व उनका बेटा इंद्रजीत सूद दोनों मर चुके हैं और अब थर्ड पर्सन की ओर से इस एलडीपी का क्लेम किया जा रहा है। इतना हीं नहीं जिस पॉवर आफ आटर्नी पर ये क्लेम खड़ा किया गया है, उनकी मौत तक हो चुकी है। हालांकि ये हैरानी जनक बात सुनने के बाद एडवोकेट पवन घई का कहना था कि ये प्लॉट देने का आर्डर लोकल गर्वमेंट सेक्रेटरी की ओर से किया गया है। लेकिन अगर मेरे हुए अलॉटी की पाॅवर आटर्नी पर ये एलडीपी दी जानी थी तो इसमें लुधियाना से लेकर चंडीगढ़ तक कईं अफसरों की जान आफत में पड़ती दिख रही है। हालांकि जज ने इसके बाद उक्त मामले में कल की डेट डाल दी। अब इस जमानत याचिका पर कल फैसला होगा। ------------- कागज जुटाने को पूर्व मंत्री का एक नजदीकी कौंसलर निभा रहा अहम भूमिका सूत्रों से मिली जानकारी मुताबिक कांग्रेस के पूर्व मंत्री का एक नजदीकी कौंसलर इस पूरे एपिसोड़ में खूब भूमिका निभा रहा है। बताया जाता है कि प्लॉट नंबर 106 डी में सरकार से मंंजूरी का एक रेज्यूलेशन की कापी इसी कौंसलर की ओर से उपलब्ध करवाई गई है। असल में प्लॉट नंबर 106 डी में संजय जैन नाम के प्रॉपर्टी डीलर (चंडीगढ रोड निवासी) को विजिलेंस ने अपनी एफआईआर में शामिल किया है और इसकी वजह से वे अंडरग्राउंड है। ऐसे में संजय जैन का भाई जो नगर निगम में जोनल कमिश्नर के पद पर तैनात है, ने ये रेज्यूलेशन की कापी उक्त कौंसलर को उसके आफिस तक पहुंचाई। ----------- फलैट नंबर 64 एसएफ को लेकर कांग्रेसी कौंसलर की भी बढ़ी मुश्किलें इंप्रूवमेंट ट्रस्ट में एक कांग्रेसी कौंसलर बलजिंदर बंटी की ओर से 8.4 एकड़ स्कीम में आते संत ईश्र सिंह पिंक फलैट में आते फलैट नंबर 64 एसएफ की बनती राशि जमा करवाने के लिए एक बार तत्कालीन मंत्री भारत भूषण आशू की सिफारिश लेकर तत्कालीन चेयरमैन रमण बाला सुब्रामनियम के पास पहुंचे थे। लेकिन तब रमण बाला ने उक्त फलैट के पैसे जमा करवाने से मना कर दिया था और इस दाैरान बंटी व रमण बाला के बीच जमकर हंगामा भी हुआ था और बात थप्पड़ तक पहुंच गई थी। लेकिन अब ये मामला विजिलेंस ईओ विंग के पास पहुंचने की बात कही जा रही है। असल में बलजिंदर बंटी जिस 64 एसएफ फलैट जिसकी कीमत करीब एक करोड़ रुपए है, पर अपना कब्जा जमाए हुए हैं, इस फलैट को ट्रस्ट की सेल ब्रांच ने 8 अक्टूबर 2012 को एक आरटीआई के जबाव में उक्त स्कीम में तीन फलैट खाली बताए थे। जिनमें 49 जीएफ, 64 एसएफ और 39 टीएफ खाली बताए थे। ऐसे में जब ये फलैट सेल ब्रांच के रिकार्ड में हैं तो इस फलैट पर कौंसलर बंटी की ओर से कब्जा कैसे लिया गया या ये कब्जा किसने दिलाया या वे अपनी मालकी किस तरह साबित करते हैं, अब ये विजिलेंस की जांच में पूरा होगा। इन तीन फलैटों के लिए 9 लोग जिन्होंने इनकी बियाना राशि अलॉटमेंट के समय ट्रस्ट में जमा करवाई थी, पिछले करीब 35 साल से लड़ाई लड़ रहे हैं। अब इन 9 लोगों को विजिलेंस गवाही के लिए अपने पास भी बुला सकती है। ------ विजिलेंस एफआईआर में क्या क्या रखा गया अहम 1. माडल टाउन एक्सटेंशन 3.79 एकड़ जमीन की ई आक्शन में रमण बाला सुब्रमानियम अपने चहेतों को पहुंचाना चाहते थे बड़ा फायदा 2. ट्रांसपोर्ट नगर प्रेमनाथ सूद की एलडीपी के एवज में की गई106 डी प्लॉट की अलाॅटमेंट में चली मोटी रिश्वत 3. संजय जैन की ओर से प्रेमनाथ सूद की एलडीपी अलॉटमेंट करवाने के लिए दो बार 25-25 लाख रुपए की रिश्वत ईओ के जरिए तत्कालीन चेयरमैन रमण बाला सुब्रामनियम को पहुंचाई और खुद ईओ ने 5 लाख रिश्वत ली। 4. प्लॉट व एलडीपी अलॉटमेंट में आया पूर्व कैबिनेट मंत्री भारत भूषण आशू के पीए इंद्रजीत सिंह इंदी का नाम 5. बीआरएस नगर में 64 व 100 गज के मकानों की रजिस्ट्री में जाली दस्तावेज का इस्तेमाल कर झूठे आलाटी खडे़ करके गलत रजिस्ट्रियां करवाने में क्लर्क गगनदीप की मिलीभगत 6. सरकारी प्रॉपर्टी की ई आक्शन में टेंपरिंग करने का दावा, एसडीओ अंकित नारंग व एक अन्य आईटी एक्सपर्ट को बनाया रमण बाला सुब्रामनियम का अहम सरगना 7.नगर निगम व ट्रस्ट की विभिन्न स्कीमों में भी डेवलपमेंट वर्क का चैक बनाने ईओ की 50 पैसे कमीशन और रमण बाला की 3 से 4 फीसदी कमीशन का दावा 8. रिश्वत लेने में चंडीगढ़ लोकल गर्वमेंट के कुलदीप सिंह सीनियर अस्सिटेंट, सुपरिटेंडेंट दिनेश कुमार व सीनियर अधिकारियों को भी जिक्र, रमण बाला सुब्रामनियम व ईओ कुलजीत कौर रिश्वत देकर पास करवाकर लाते थे प्रस्ताव
Long Arguments In Court On Bail Plea Of Raman Bala Subramaniam Decision Tomorrow