बुडढा नाला प्रदूषण एक बार फिर से शहर की डाइंग व इलेक्ट्रोप्लेटिंग इंडस्ट्री के लिए बड़ा संकट खड़ा कर सकता है। भले ही डाइंग इंडस्ट्री की ओर से 105 एमएलड़ी क्षमता के तीन सीईटीपी प्लांट स्थापित कर इन्हें चालू कर लिया गया है, लेकिन इससे भी वे अपनी जिम्मेवारी से मुक्त होते नहीं दिखाई दे रहे। इसका बड़ा कारण है कि बुडढा नाला का प्रदूषण कम न होना है। आज नगर निगम कमिश्नर शैना अग्रवाल की ओर से इस मुददे पर शहर की विभिन्न डाइंग संगठनों,निटिर एसोसिएशन, निटवियर एसोसिएशन, 19 लार्ज इंडस्ट्री और छोटी छोटी इंडस्ट्री के नुमाइंदे शामिल हुए। मीटिंग निगम के एसई राजिंदर सिंह भी मौजूद थे। दिलचस्प बात ये रही कि जहां आज डाइंग इंडस्ट्री ने इस मीटिंग के बाद मीडिया के समक्ष अपना पक्ष रखा तो वहीं नगर निगम ने भी इस मीटिंग संबंधी मीडिया को जानकारी दी। हालांकि इस मीटिंग के बाद जहां डाइंग इंडस्ट्री नाले में प्रदूषण के लिए नगर निगम को जिम्मेदार ठहरा रही है, वहीं दूसरी ओर नगर निगम ने भी सीईटीपी लगा कर अपना प्रदूषण कम करने का दावा करने वाली डाइंग इंडस्ट्री को भी साफ कर दिया है कि वे सीईटीपी से अनट्रीटे पानी को साफ करने का पैरामीटर पूरा करने के बाद ही पानी बुडढा नाला में डालें। इसके लिए नगर निगम ने पीपीसीबी से सीईटीपी के आउट लेट से आने वाले ट्रीटेड पानी की मानिटरिंग कर इसकी पूरी रिपोर्ट देने के लिए कह दिया है। गौर हो कि बुडढा नाला के प्रदूषण को लेकर मौजूदा आप सरकार व नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल बेहद सख्ती के मूड में है और इसकी झलक आज नगर निगम कमिश्नर की मीटिंग से भी मिलती दिखी है। निगम कमिश्नर शैना अग्रवाल ने ये भी कहा कि डाइंग इंडस्ट्री की ओर से जो रंग नाले में छोड़ा जा रहा है, उसे भी कम करने के प्रयास किए जाएं। इसके साथ साथ उन्होंने छोटी इंडस्ट्री जो किसी डाइंग सीईटीपी से नहीं जुड़ी हैं, उसके लिए भी पीपीसीबी को कहा है कि ऐसी इंडस्ट्री को पर्याप्त जांच हो कि ये ईटीपी से ट्रीट करके ही पानी सीवरेज में गिरा रहीं हैं, जो ऐसा नहीं कर रहा उन पर नियमों के तहत एक्शन लेने को कहा है। इस मीटिंग में तरुण जैन बावा, अजीत लाकड़ा, अशोक मक्कड़, बॉबी जिंदल, टीआर मिश्रा, राहुल वर्मा, रजत व अन्य मौजूद थे। ------- पीपीसीबी अधिकारियों की भी बढेंगी मुश्किलें आम आदमी पार्टी व एनजीटी का बुडढा नाला को लेकर जिस तरह का रुख है, उससे साफ है कि पीपीसीबी अफसरों की भी आने वाले दिनों में अब मुश्किलें बढ़ने वाली है। अभी तक पीपीसीबी के अधिकारी भी सीईटीपी के शुरु होने का पहाड़ा पढ़कर अपनी कारगुजारी से बच रहे थे, लेकिन अब सीईटीपी चालू हो चुके हैं और इसके बावजूद नाले में प्रदूषण कम न होना कहीं न कहीं बोर्ड अधिकारियों की बेहतर कारगुजारी का सबूत नहीं है। वहीं अब एनजीटी की आरे से भी पीपीसीबी पर जिम्मेदार इंडस्ट्री पर कार्रवाई कर रिपोर्ट करने को कहा गया है। अब पीपीसीबी इस प्रदूषण के लिए किसे जिम्मेदार ठहराए ये बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
Discharge Should Be Dropped In Budha Drain Only After Completing The Parameters