लुधियाना इंप्रूवमेंट ट्रस्ट में चल रही बहु करोड़ी घोटालों की जांच के बीच अब अटल अपार्टमेंट के तहत बनने वाले 576 (एचआईजी और एमआईजी) फ्लैटों पर भी काले बादल छाते दिखाई दे रहे हैं, जिन जिन अधिकारियों का इंप्रूवमेंट ट्रस्ट घोटालों से नाम जुड़ रहा है, वही अधिकारी इंप्रूवमेंट ट्रस्ट अटल अपार्टमेंट के निकाले गए ड्रॉ में भी अहम जिम्मेवारी निभा रहे थे। ऐसे में अब सवाल खड़े होने लगे हैं कि अगर यह अधिकारी इंप्रूवमेंट ट्रस्ट में इतने बड़े स्तर पर हुए घोटाले की जांच के दायरे में हैं,तो इस स्कीम के तहत निकाला गया ड्रा कितना निष्पक्ष और पारदर्शी होगा, यह बताना अभी किसी के लिए संभव नहीं दिखाई दे रहा। इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के इस ड्रॉ को अब लोकल गवर्नमेंट के अधिकारियों के लिए भी मंजूरी देना इतना आसान नहीं दिखाई दे रहा। बड़ी बात है कि तत्कालीन ईओ कुलजीत कौर की और से इस ड्रा की फाइनल लिस्ट और इसके इसके बाद इनकी फाइनल स्लिप और फिर इनकी सैक्रूटनिंग का जिम्मा 7 मुलाजिमों को सौपा गया था, इनमें से चार मुलाजिम विजिलेंस की जांच के घेरे में है। इस पूरे प्रोसेस में शामिल एक्सईएन बूटा राम, एसडीओ अंकित नारंग, क्लर्क हरमीत सिंह, क्लर्क गगनदीप सिंह का नाम विजिलेंस की एफआईआर में शामिल है। ऐसे में एक बात साफ है कि इस ड्रॉ में किसी चहेते को फायदा पहुंचाना इनके लिए कोई बड़ी बात नहीं रही होगी। हालांकि इस ड्रा के लिए तत्कालीन चेयरमैन रमन बालासुब्रमण्यम के बेटे करण सुब्रमण्यम की ओर से भी आवेदन किया था और वे इसमें कामयाब भी रहे। उन्हें एमआईजी फ्लैट इस ड्रा के जरिए मिला है । गौर हो कि रमन बालासुब्रमण्यम पर विजिलेंस की ओर से बड़े घोटाले को लेकर एफआईआर दर्ज की जा चुकी है और वे फिलहाल फरार हैं। --बीती 16 जून को निकाला गया था फ्लैटों का ड्रॉ। ट्रस्ट ने बीती 16 जून को इस योजना के तहत 576 फ्लैट (240 एमआईजी और 336 एचआईजी फ्लैट) आवंटित करने के लिए ड्रॉ का आयोजन किया था। हालांकि, एमआईजी फ्लैटों के लिए केवल 151 आवेदन प्राप्त हुए थे। ड्रॉ से पहले, अधिकारियों ने एचआईजी श्रेणी के तहत असफल आवेदकों को शेष एमआईजी फ्लैटों के लिए अपनी किस्मत आजमाने का मौका देने पर विचार किया था। लेकिन बाद में इसे रद्द कर दिया गया था। अब ट्रस्ट ने पखोवाल रोड करनैल सिंह नगर 8.8 एकड़ स्कीम में अटल अपार्टमेंट योजना के तहत बनने वाले इन फ्लैटों में बचे 89 एमआईजी फ्लैटों के लिए नए आवेदन आमंत्रित करने का फैसला भी किया जा चुका है। बड़ी बात है कि ये पूरा प्रोजेक्ट सेल्फ फाइनेंसिंग स्कीम के तहत पब्लिक के पैसों से बनाया जाना है और अगर यह प्रोजेक्ट लेट हो जाता है तो इसकी कॉस्ट बढ़ना तय है और इसका खर्च भी आम पब्लिक पर ही पड़ेगा।
Dark Clouds Over Atal Apartment Scheme