नगर निगम कमिश्नर शैना अग्रवाल की ओर से बुडढा नाला प्रदूषण को लेकर सख्त कदम उठाने की पहल करते हुए आज शहर के विभिन्न हिस्सों में लगे डाइंग इंडस्ट्री के काॅमन एफयूलेंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) और नगर निगम के भटिटयां स्थित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के डिस्चार्ज आउटलेट से सैंपल लिए गए। इसके साथ शहर की अहम लार्ज इंडस्ट्री को भी पहली बार नगर निगम की ओर से इस जांच के घेरे में ला खड़ा किया है। इसके तहत सिन्टैक्स इंटरनेशल डाइंग प्राइवेट लिमिटेड सुआ रोड, महालक्ष्मी प्रोसेसिंग हाउस फेस आठ फोकल प्वाइंट, सागर अपैरल बाबा गज्जा जैन कालोनी, अकाल स्पिनिंग फोकल प्वाइंट फेस पांच, रॉकमैन इंडस्ट्री फेस पांच, ओसवाल वूलन मिल जीटी रोड शेरपुर, वर्धमान स्पिनिंग मिल्स चंडीगढ़ रोड नाम की इन लार्ज स्केल इंडस्ट्री के भी डिस्चार्ज आउटलेट से सैंपल लिए गए। शामिल हैं। इस पूरी कार्रवाई में सबसे बड़ी बात है कि नगर निगम ने इस पूरी कार्रवाई को सरकारी लैब पंजाब बायो टैक्नोलिजी इनक्यूबेटर मोहाली की एक्सपर्ट टीम के जरिए अंजाम दिया। ये पहली बार है कि नगर निगम की ओर से लार्ज स्केल इंडस्ट्री जो किसी सीईटीपी से अभी तक नहीं जुड़ी है, की इस स्तर पर सैंपलिंग करवाई हो। हालांकि इस पूरी कार्रवाई से पीपीसीबी की टीम को भी किनारे रखा गया और इन सैंपल की रिपोर्ट से पीपीसीबी के अधिकारियों की भी पोल खुल सकती है। असल में बुडढा नाला के प्रदूषण को लेकर एक बड़ा विवाद सा खड़ा होता दिख रहा है कि आखिर इस प्रदूषण के लिए कौन जिम्मेदार है और अब इस सच को ढूंढने की धड़ल्ले से धरपकड़ चल रही है। गौर हो कि करीब 15 दिन पहले नगर निगम कमिश्नर शैना अग्रवाल ने बुडढा नाला मामले को लेकर सीईटीपी नुमाइंदों व लार्ज स्केल इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों से मीटिंग भी की थी। हालांकि इसके बाद पीपीसीबी की ओर से हीरो स्टील नाम की लार्ज इंडस्ट्री में कैमिकल युक्त पानी की सीधा बाइपास सीवरेज में पकडे़ जाने पर उक्त इंडस्ट्री का कनेक्शन भी काट दिया था। वहीं बहादुर के, ताजपुर रोड व फोकल प्वाइंट की डाइंग इंडस्ट्री के लिए लगे तीन सीईटीपी का ट्रीटमेंट का लेवल किस स्तर पर है, इसकी भी पोल खुलकर सामने आएगी।
Municipal Commissioner Got Strict Regarding Budha Nala Pollution