फूड एंड सप्लाई टेंडर घोटाले में पूर्व मंत्री भारत भूषण आशू कनेक्ट के चलते लुधियाना का शराब किंग एनके एंड कंपनी के मालिक नीरज कपूर को विजिलेंस ऑफिस में बुलाए जाने के बाद कई सरकारी अफसरों की सांसे फूलने की बातें चर्चा में है। इसका बड़ा कारण यह है कि लुधियाना में अगर नीरज कपूर में मोबाइल के साथ साथ अगर शराब का बड़ा कारोबार खड़ा किया तो इसके पीछे कई स्टेट जीएसटी, पुलिस डिपार्टमेंट के साथ साथ कई अन्य सरकारी अधिकारी शामिल है। नीरज का मोबाइल का कारोबार भी काफी लंबा चौड़ा बताया जाता है और और उनके पास कई मोबाइल कंपनियों की सुपर डिस्ट्रीब्यूशन भी है। इसके चलते ही नीरज की सेल टैक्स विभाग के अधिकारियों के साथ पुराने रिश्ते हैं। उनके यह रिश्ते 2017 में तब और मजबूत हो गए जब सेल टेक्स अफसरों की ओर से टैक्स चोरी के मामले में नीरज पर दबिश दी गई। इसके बाद सेल टैक्स डिपार्टमेंट के कई अफसर जो कि अब मौजूदा स्टेट जीएसटी डिपार्टमेंट के अफसर हैं, के साथ घरेलू तालुकात बन गए। इस बेहतर तालुकात के पीछे नीरज का सरल स्वभाव बताया जाता है। शराब कारोबार में स्टेट जीएसटी के कई अफसर ऐसे शख्स की तलाश में थे जो उनके मुताबिक यह पूरा कारोबार चला सके। इसी के तहत नीरज कपूर का नाम ओर तेजी से आगे बढ़ा और मात्र 6-7 साल में वह शराब कारोबार में लुधियाना के किंग बन गए। करीब 3 साल पहले उनके शराब के इस कारोबार में भावाधस नेता लक्ष्मण द्रविड़ का भी हिस्सा होने की चर्चा मार्केट में थी। अब जब विजिलेंस की ओर से परम वाइन के मालिक नीरज को बुलाया गया तो पर्दे के पीछे रहने वाले इन्हीं अफसरों की मुश्किलें भी बढ़ गई है, क्योंकि विजिलेंस की ओर से नीरज से शराब कारोबार में लगाए गए पैसे का हिसाब किताब पूछा गया है। यह बात साफ है कि जितना पैसा उनका इस कारोबार में लगा हुआ है, वह उनके भागीदारों के शेयर से कहीं अधिक है। ऐसे में एक बात साफ है कि इसमें या तो कुछ बड़े नेताओं का पैसा लगा है या पूंजी पतियों से बड़ी रकम ब्याज पर ली गई है । हालांकि यह विजिलेंस जांच का मामला है लेकिन अगर यह पूरा मामला खुला तो इसमें पर्दे के पीछे रहने वाले कई चेहरे नंगे हो सकते हैं। -------------------- आम आदमी पार्टी की नई शराब नीति के बावजूद नहीं डगमगाए एनके एंड कंपनी के पैर पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के तुरंत बाद ही नई शराब नीति लाने की घोषणा कर दी गई । जिसके तहत कई लोकल व छोटे शराब ठेकेदार इस कारोबार में हाथ खड़े कर गए। सूत्र बताते हैं कि एन के एंड कंपनी में कई अफसरों और नेताओं के बड़े फंड की इन्वेस्टमेंट है है इसके चलते नई शराब नीति के बावजूद एन के एंड कंपनी और मजबूती से लुधियाना में आगे आई और उसकी ओर से सबसे अधिक पांच ग्रुप पर कब्जा किया गया। हालांकि लुधियाना में उन्हें टक्कर देने को सिंडिकेट, छाबड़ा ग्रुप,बजाज ग्रुप और कई दिग्गज शराब ठेकेदार मार्केट में थे, लेकिन इसके बावजूद वह शराब कारोबार की दौड़ में सबसे आगे निकल गया। हालांकि इस मामले में जब एसएसपी विजिलेंस आरपीएस संधू से बात की गई तो उन्होंने बताया कि अभी इस मामले में केवल एनके एंड कंपनी के मालिक को बुलाया गया है, उनके बारे में अभी ऐसा कुछ नहीं है कि मीडिया के समक्ष बताया जाए। उन्होंने बताया कि फूड एंड सप्लाई टेंडर घोटाले में पूर्व मंत्री आशु के कई नज़दीकियों को सम्मन देकर बुलाया गया था और उसी के तहत जांच में एन के एंड कंपनी के मालिक को भी बुलाया गया है अभी यह विषय केवल प्रारंभिक जांच का है।
After Calling The Owner Of Nk And Company In Vigilance Which Government Officers Are Getting Swollen Hands And Feet