यशपाल शर्मा, लुधियाना अगर आप किसी भी सरकारी या प्राइवेट बैंक में 50 लाख रुपए की एफडी (फिक्स डिपाजिट) करवाते हैं तो पांच साल बाद कहीं जा कर ये राशि दोगुना होती है, लेकिन हंबड़ा रोड लाडोवाल बाइपास के नजदीक जहां गलाड़ा की ओर से दो हजार एकड़ में नया अर्बन इस्टेट काटने की प्लानिंग मात्र में इंवेस्टर एक करोड़ का चार करोड़ रुपए बना चुके हैं। करीब नौ महीने पहले इस बडे़ खेल में इंवेस्टमेंट करने में मौजूदा सरकार के नेता, उनके नजदीकी, ब्यूरोक्रेटस व कालोनाइजर ही हैं, जिनका खुलासा ई न्यूज पंजाब बेव पोर्टल लगातार करता चला आ रहा है। जिन्होंने यहां पर एक करोड़ रुपए में दो एकड़ जमीन खरीद कर इंवेस्टमेंट की थी, वो मात्र नौ महीने में एक करोड़ रुपए की इंवेस्टमेंट चार करोड़ रुपए में तबदील हो चुकी है। ये इंवेस्टमेंट एक ऐसी ट्रेन बन चुकी हैं, जिसमें सबसे पहले इंवेस्टमेंट को आए कईं नेता व ब्यूरोक्रेटस जमीन का दाम दोगुना होते ही तीन महीने में अपना पैसे ले निकल लिए तो वहीं कईं लंबी सोच रखने वाले अभी भी इस ट्रेन में सवार हैं और वे गलाड़ा की ओर से लैंड पूलिंग सिस्टम के तहत एक्वायर होने वाली इस जमीन व इसके बाद गलाड़ा की ओर से पूरा प्रोसेस कंपलीट होने के बाद ही इसमें से अच्छा खासा प्रॉफिट लेकर निकलने की सोच बनाए हुए हैं। वहीं जो लोग जमीन के मौजूदा दो से ढाई करोड़ रुपए प्रति एकड़ जमीन के दाम पर अब इंवेस्टमेंट कर रहे हैं, वे भी अब इस जमीन पर अपना फिक्स डिपाजिट मान कर चल रहे हैं। ------- समझिये, कैसे कमाया जाएगा 50 लाख से 5 करोड़ रुपए मोहाली की तर्ज पर गलाड़ा ने भी इस जमीन को किसानों (यहां किसान नहीं इंवेस्टर्स) से एग्रीमेंट के तहत खरीदना है और इसके एवज में उन्हें बाद में ड्रा के जरिए 1000 गज का रिहायशी प्लाट व 200 गज का कार्मशियल प्लाट दिया जाना है। इस समय यहां पिछले दो साल में काटी गई कालोनियों में 30 हजार रुपए से 40 हजार गज का रेट और कामशिर्यल जमीन के दाम 80 हजार रुपए से एक लाख रुपए गज रुपए (कम से कम) तक पहुंच चुका है। कईं कालोनियों में तो रिहायशी प्लाट 50 हजार रुपए गज तक कहकर बेचा जा रहा है। करीब दो हजार एकड़ में बनने वाले इस अर्बन इस्टेट को गलाड़ा की ओर से पूरी तरह से पानी सीवरेज बिजली, कामशिर्यल साइट, स्वीमिंग पूल क्लब सहित कईं अन्य तरह की वर्ल्ड क्लास सुविधाओं के तहत डेवलप किया जाना है। ऐसे में जिन इंवेस्टर्स को यहां 1000 गज का रिहायशी प्लाट ड्रा में मिलता है तो कम से कम से अगर यहां पर 30 हजार रुपए गज का रेट भी मान कर चलते हैं तो इस प्लाट की वेल्यू करीब 3 करोड़ रुपए के आसपास बैठेगी। इसके अलावा 200 गज कामशिर्यल प्लाट 80 हजार रुपए गज के लिहाज से करीब 1.60 करोड़ रुपए बन जाती है। ऐसे में अगले दो से तीन साल के भीतर ये 50 लाख रुपए प्रति एकड़ की इंवेस्टमेंट 4.5 से 5 करोड़ रुपए तक आराम से पहुंचने का अनुमान मार्केट में लगाया जा रहा है। यानी जो अब भी भी 2 करोड़ रुपए एकड़ के रेट पर जमीन खरीद रहा है, उसकी इंवेस्टमेंट भी अगले दो साल तक दोगुना से तीन गुना होने का अनुमान है। ये पूरा आंकड़ा यहां के प्रॉपर्टी डीलर अपने ग्राहको समझा समझा के जमीनें उठवा रहे हैं। -------- हालांकि पुडा के आला अधिकारी पिछले नौ महीने में स्थानीय प्रॉपर्टी के दाम तीन से चार गुना बढ़ने से उनके प्रोजेक्ट पर कोई असर न पड़ने की बात कह रहे हैं, लेकिन जब लाड़ोवाल बाइपास के नजदीक पड़ती जमीन गांव नूरपुर पार्ट 1, पार्ट 2, गौंसपुर, गडां, और बग्गा कलां में महंगे रेटों पर जमीन खरीद रहे इंवेस्टर्स से किस तरह ये जमीन लैंड पूलिंग के तहत ली जा सकेगी। इसके बाद इस प्रोजेक्ट की डेवलपमेंट पर भी सरकार ने ही खर्च करना है और ये भी यहां पर ड्रा के जरिए बिकने वाले प्लाटों के रेट फिक्स करने के दौरान अहम भूमिका निभाएगा।
How An Investment Of 50 Lakhs Will Become 5 Crore Rupees In Just Two Years