यशपाल शर्मा, लुधियाना फूड एंड सप्लाई डिपार्टमेंट में जिस लेबर, टेंडर व ट्रांसपोटेशन घोटाले को कईं सौ करोड़ रुपए में आंका जा रहा है, उस घोटाले को पहले कदम में जिन फूड एंड सप्लाई डिपार्टमेंट के अफसरों ने हरी झंड़ी दी, उनकी ओर मात्र दो व तीन लाख रुपए और एक आई फोन की रिश्वत ले आंखें बंदकर सभी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर डाले गए। ये खुलासा विजिलेंस ब्यूरो के एसएसपी रविंदर पाल सिंह संधू की ओर से किया गया है। ये दोनों अफसर सुखविंदर सिंह गिल व हरवीन कौर साल 2020 में लुधियाना फूड एंड सप्लाई डिपार्टमेंट में डीएफएसई के पद पर तैनात थे। बताया जाता है कि जब अप्रैल महीने में डिपार्टमेंट की ओर से ट्रांसपोर्टव लेबर का टेंडर लगाया गया, तब इन्हीं अफसरों की मिलीभगत से ही मोटरसाइकिल, स्कूटर व कार वाले नंबर लगा टेंडर में डाले गए व्हीकल की जांच तक नहीं की और रिश्वत लेकर चुपचाप करोड़ों रुपए के स्कैंडल करने को मंजूरी दे दी गई। बड़ी बात है कि ये पूरा मामला तब का जब एक ओर पूरा शहर कोरोना के कहर से जूझ रहा था, ताे दूसरी ओर ये अफसर अपने आला अफसर व नेता की शह पर इस बहु करोड़ी घोटाले की नींव रख रहे थे। इस समय सुखविन्दर सिंह गिल डीएफएससी फरीदकोट और हरवीन कौर डीएफएससी जालंधर के पद पर तैनात थे। गौर हो कि इस मुकदमे में मुलजिम तेलू राम, पूर्व मंत्री भारत भूषण आशु, कृष्ण लाल धोतीवाला और अनिल जैन (दोनों आढ़तिये) पहले ही गिरफ़्तार किये जा चुके हैं और इन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका हैं। इसके इलावा विजीलैंस ब्यूरो की तरफ से पहले ही भारत भूषण आशु, तेलू राम और कृष्ण लाल के विरुद्ध लुधियाना की समर्थ अदालत में चालान पेश किया जा चुका है। कल इन दोनों अधिकारियों को कोर्ट में पेश किया जाएगा और इसके बाद इनके पुलिस रिमांड में कईं तरह के बडे़ खुलासे जिसमें कौन कौन सा बड़ा अधिकारी (आईएएस या पीसीएस) इस पूरे घोटाले में शामिल था या और किस किस की इस घोटाले में मिलीभगत थी, इससे पर्दा उठ सकता है।
Dfsc Had Taken Rs 2 3 Lakh And One Iphone As Bribe In Transport Tender Scam