यशपाल शर्मा, लुधियाना मेयर बलकार सिंह संधू की ओर से पांच महीने के अंतराल के बाद निगम सदन की बैठक अनुशासनहीनता की भेंट चढ़ गई। जिसका नतीजा ये हुआ कि सदन में रखे जाने वाला 42 प्रस्तावों का एजेंडे पर पार्षदों की राय लिए बिना ही मेयर ने मात्र एक मिनट में पास कहकर इन्हें मंजूरी दे दी। मेयर के इस एक्शन से जहां विपक्षी पार्षद नाखुश दिखे, वहीं कांग्रेसी कौंसलर भी पांच महीने बाद बुलाई इस मीटिंग में मेयर के इस एक्शन के विरोध के सुर अलापते दिखे। सदन को दिए गए करीब सवा दो घंटे के जीरो ओवर्स के बाद जब मेयर ने सेक्रेट्री तजिंदर सिंह पंछी को एजेंडा पढ़ने के लिए कहा तो लोक इंसाफ पार्टी से बैंस गुट के कौंसलर हरविंदर सिंह कलेर ने पंछी से माइक छीन लिया। जिस पर मेयर भी गुस्सा गए और उन्होंने क्लेर को कहा कि तू गुंडा है, ये क्या तरीक है। सदन की मर्यादा का तो ख्याल रखो। इसके बाद जहां बैंस गुट के कौंसलर व कांग्रेसी कौंसलर एकत्र हो गए और इसी दौरान निगम के जोनल कमिश्नर जसदेव सिंह सेखों ने भी अफसरों के साथ इस बदसलूकी के लिए मीटिंग का बायकाट करने की बात कह डाली। इसके बाद मेयर ने भी कलेर खिलाफ एक्शन लेने के लिए सरकार को लिखित सिफारिश करने की बात सदन को कही। इस दौरान मेयर ने माहौली गर्माता देख एक मिनट के भीतर एजेंडा पास का एलान कर कुर्सी छोड़ दी। हालांकि इस मीटिंग की पूरी कमान कांग्रेसी कौंसलर्स के हाथ रही, केवल मेयर के नजदीकी कौंसलर चाहे वो सत्ता में थे या विपक्ष में, केवल उन्हें बोलने का मौका दिया गया। मीटिंग में कैबिनेट मंत्री भारत भूषण आशू की पत्नी व कौंसलर ममता आशू ने एलईडी लाइट्स लगाने के प्रोजेक्ट पर काम कर रही टाटा कंपनी का वर्क आर्डर टर्मिनेट करने का मुददा बेहद जोरशोर से उठाया। उनके इस प्रस्ताव पर पूरे हाउस की भी सहमति उन्हें मिलती दिखी। आईएएस अफसर संयम अग्रवाल की सदन में हुई खिंचाई कौंसलर ममता आशू की ओर से सदन में टाटा कंपनी का वर्क आर्डर टर्मिनेट करने व काम में देरी को लेकर उक्त कंपनी पर पनेल्टी लगाने के प्रस्ताव पर स्मार्ट सिटी के सीईओ व आईएएस अफसर संयम अग्रवाल बुरी तरह घिर गए। असल में संयम अ्ग्रवाल इस प्रोजेक्ट में देरी होने व इस प्रोजेक्ट के बारे में सदन को बताना चाहते थे, लेकिन कांग्रेसी कौंसलर जयप्रकाश ने कुछ भी सुनने से इंकार कर दिया। जयप्रकाश ने सदन को साफ कह दिया कि संयम अग्रवाल हम नहीं सुनेंगे और कंपनी केसाथ साथ संयम अ्ग्रवाल से ये प्रोजेक्ट लेकर इसे निगम कमिश्नर केपी बराड़ को देने के लिए सरकार को सिफारिश करने तक की बात कह दी। इसके बाद संयम अग्रवाल को मायूस होकर अपनी सीट पर बैठना पड़ा और अंत में वे बोले कि तीन साल पहले जांलधर ने भी एलईडी लाइट्स का टेंडर टर्मिनेट किया था और इसके बाद वे कुछ नहीं कर पाए। इसलिए यहां भी इस टेंडर को टर्मिनेट करने से पहले इस पर विचार जरुर कर लिया जाए। हालांकि बाद में ममता आशू ने आगे दीवाली होने के चलते उक्त कंपनी को बीस दिन में बेहतर रिजल्ट देने की बात भी कही। ------ सदन में किस ने क्या कहा -विधायक सुरिंदर डाबर- मेरी विधानसभा में पड़ते आउटर वार्डों में लगाए 2 करोड़ रुपए के कामों के लिए फंड मुहैया करवाए जाए। मुझे लगता हैं मैने कौंसलर बनकर गलती कर दी- जसपाल ग्यासपुरा मेरे वार्ड में एक ट्यूबवेल पिछले एक साल से खराब हैंं, वो अभी तक ठीक नहीं हुआ। कई रिमाइंडर भी दिए, पर कोई सुनवाई नहीं हुई। मेरे वार्ड में 80-85 लाख रुपए का एक काम चल रहा था, मैने इसका टेंडर रिवाइज करने को कहा, तांकि इसके साथ लगती गलियों को भी बनाया जा सके। लेकिन अफसरों ने टेंडर तो रिवाइज क्या करना था, अपनी मनमर्जी से पूरा नक्शा ही बदल डाला। हमारे कहने पर न तो इलाके में पैचवर्क लग पा रहे हैं। अब तो ऐसे लगने लगा है कि मैनें कौंसलर बनकर गलती कर दी। ग्यासपुरा ने डिप्टी मेयर सर्वजीत कौर की ओर से 8.65 लाख रुपए की लागत का टेंडर लगा प्राइवेट प्लॉट से बिजली की तारें उठाना का मुद्दा भी उठाया। इस पर सर्वजीत कौर ने सफाई देते कहा कि स्थानीय लोगों की मांग पर ये काम किय गया। इस पर ग्यासपुरा ने कहा कि फिर तो पूरे वार्ड में पड्ते प्राइवेट प्लाटों से बिजली तारें हटाने के लिए निगम को एक एस्टीमेट बना लेना चाहिए। इस पर शिअद पार्षद दल के नेता हरभजन सिह डंग ने कहा कि जिस भी निगम अफसर ने ये टेंडर लगाया, उससे 8.65 लाख रुपए के नुकसान की भरपाई की जानी चाहिए। टाटा कंपनी पर एक्शन हो, मेरा तो कुत्ता उठाकर ले गए- गोगी पीएसआईईसी के चेयरमैन व कौंसलर गुरप्रीत गोगी ने कौंसलर ममता आशू की ओर से टाटा कंपनी का टेंडर टर्मिनेट करने के प्रस्ताव पर अपनी हाम्मी भरते कहा कि लोगों ने अपने घरों की सुरक्षा के लिए कुत्ते रखे हुए हैं, लेकिन स्ट्रीट लाइटें बंद होने के चलते लोगों के घरों से कुत्ते तक चोरी होने लगे हैं। दो दिन पहले खुद मेरा कुत्ता भी कोई उठा कर ले गया। ममता आशू- आवारा कुत्तों का मुद्दा पूरा शहर के लिए गंभीर इश्यू है और इसके लिए दो बार निगम ने मीटिंग बुलाई। लेकिन अफसोस है कि इन दोनों मीटिंग में अधिकतर कौंसलर नहीं पहुंचे। उन्होंने एजेंडे में इस प्रस्ताव पर डिटेल में बात करने को कहा, मगर बाद में एजेंडा बिना चर्चा के ही पास हो गया। इस दौरान उन्होंने एलईडी लाइट्स का मुद्दा गंभीरता से उठाया। करीब एक सप्ताह पहले उन्होंने उक्त टेंडर की लिखित शिकायत निगम कमिश्नर को भी की थी। कुलदीप जंडा- मेरे व साथी पार्षदों के वार्ड में डाइंगों के डिस्चार्ज से हमारें सीवरेज बैक मारने की बड़ी समस्या पेश आ रही है। उन्होंने कहा कि हमारा मेयर, हमारा विधायक, हमारा मंत्री और हमारा संसद होने के बावजूद काम न होने पर दुखी हद्रय से रोना भी सदन में रोया। मनीषा टपारिया- आवारा पशुओं का मुद्दा बेहद गंभीरता से उठाया और निगम कमिश्नर से इस मामले में गौशाला से बेहतर ढंग से बातचीत कर लोगों की जानमाल की रक्षा करने का मुद्दा उठाया। मणि ग्रेवाल-प्लास्टिक बैग बनाने वाली कंपनियों पर सख्त एक्शन लेने के लिए मेयर बलकार सिंह से मांग की। विधायक सुरिंदर डाबर- मेरी विधानसभा में पड़ते आउटर वार्डों में लगाए 2 करोड़ रुपए के कामों के लिए फंड मुहैया करवाए जाए।
Nigam House meeting