यशपाल शर्मा, लुधियाना विजिलेंस की ओर से रिश्वत के आरोप में गिरफतार आरटीए (रीजनल ट्रांसपोर्ट अथोर्रिटी) नरिंदर सिंह धालीवाल को थोड़ी देर में कोर्ट में पेश किया जाना है, लेकिन विजिलेंस उससे पहले आरटीए नरिंदर धालीवाल के बैंक खातों में पड़ी राशि व उसकी ओर से खरीदी गई प्रॉपर्टी व मोगा स्थित कोठी पर खर्च किए करोड़ों रुपए का भी लेखा जोखा जुटा रही है। जांच में आरटीए के दो बैंक अकाउंट सामने आए हैं, जिनमें लाखों रुपए जमा होने की बात भी सामने आ रही है। नरिंदर सिंह धालीवाल की पत्नी सरकारी टीचर हैं। बताया जाता है कि विजिलेंस के हाथ में कईं सुराग लगे हैं और इनके बदौलत ही वे कुछ ओर दिनों के पुलिस रिमांड की डिमांड कोर्ट में करेंगे। सूत्र बताते हैं कि विजिलेंस ने जबसे आरटीए नरिंदर सिंह को पुलिस रिमांड पर लिया है, उसके बाद से उसका ब्लड प्रैशर बढ़ा हुआ है और विजिलेंस उसे मेडिकली अधिक ट्रीट कर रही है। विजिलेंस ने आरटीएस पर शिकंजा कसने को सरकारी आफिस का कुछ मुलाजिमों के भी बयान लेने को उन्हें आफिस बुलाया था। विजिलेंस आफिस में पुराने, नए ड्राइविंग लाईसेंस व वाहनों का टैक्स भरने के लिए भी अलग अलग सीनियर व सामान्य क्लर्कों को चार्ज दिया गया है और इनमें अधिकतर मुलाजिम पुराने व डिपार्टमेंट अच्छे भेदी हैं। बताया जाता है कि इनकी ओर से भी एक पक्की फीस (मंथली) आरटीए तक पहुंचाई जाती थी। एमवीआई भी आ सकता है विजिलेंस के निशाने पर जानकारी बताते हैं कि इस पूरी जांच के घेरे में अब लुधियाना में वाहनों के फिटनेस सर्टिफिकेट बांटने वाला मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर (एमवीआई) भी विजिलेंस के निशाने पर हैं। बताया जाता है कि विजिलेंस के पास ये भी सूचना है कि लुधियाना में तैनात एमवीआई सप्ताह में एक या दो दिन ही वाहनों की फिटनेस के सर्टिफिकेट जारी करता था। नियमों के तहत 20 से 22 मिनट की इंस्पेक्शन के बाद एक वाहन का सर्टिफिकेट जारी होता है, लेकिन एजेंटों के जरिए ये पूरा धंधा चलता है और बिना वाहन के ही एक ही दिन में 70 से 100 तक वाहनों को सर्टिफिकेट जारी कर दिए जाते हैं। जिसके एवज में स्कूटर से लेकर ट्रक बस के 500 रुपए से लेकर 6 हजार रुपए प्रति वाहन वसूला जाने की बात सूत्रों के हवाले से सामने आ रही हैं। लुधियाना के पूर्व एमवीआई को जांलधर विजिलेंस ने किया था गिरफतार लुधियाना में दो महीने पहले तैनात एमवीआई नरेश कलेर के पास जालंधर, गुरदासपुर के एमवीआइ का चार्ज भी था। बीते कई सालों से उनकी तैनाती इसी रीजन में थी। सरकार किसी भी पार्टी की रही हो, लेकिन कलेर अपनी राजनीतिक पहुंच व रसूख के चलते मलाईदार जिलों में तैनात रहे। खुद को अकाली दल के पूर्व विधायक का करीबी बताने वाले कलेर ने अपना काम करने के लिए 15 हजार रुपये पर निजी एजेंट रखा हुआ था। विजिलेंस की पड़ताल में यह भी निकलकर आया है कि कलेर ने जालंधर ही नहीं बल्कि लुधियाना व गुरदासपुर में भी अपने स्तर पर एजेंट रख रखे थे। उन्हें बाकायदा महीने में निजी तौर पर वेतन भी देते थे। कलेर ने खुद को काफी लो प्रोफाइल में रखकर सारा गोरखधंधा चलाया था। उन्होंने दफ्तर या एजेंटों के अलावा ज्यादा लोगों या अधिकारियों के साथ कभी भी संबंध नहीं रखे। यही वजह थी कि वह कब जालंधर दफ्तर आते हैं या कब नहीं इसकी जानकारी उनके खास राधे को होती थी। उसी के पास एजेंटों द्वारा दी जाने वाली धनराशि एकत्र की जाती थी। वही कलेर तक रिश्वतखोरी के सारे पैसे पहुंचाता था। दफ्तर से लेकर घर तक राधे व कालू नामक एजेंटों के जरिए ही कलेर अपनी सरकार चलाते थे। पेशे के मैकेनिकल इंजीनियरिंग करने वाले कलेर दो साल बाद रिटायर होने वाले थे। यही वजह थी कि उन्होंने सारा गोरखधंधा एजेंटों को आगे करके चला रखा था। जब विजिलेंस की छापेमारी हुई थी कि कलेर नहीं मिले थे। वह गुरदासपुर में थे, लेकिन उनके ही एजेंट ने सारी पोल खोल दी और विजिलेंस ने सुबह चार बजे उन्हें उठा लिया।
Vigilance Will Present Rta Dhaliwal In The Court In A While