यशपाल शर्मा, लुधियाना जहां ओर पंजाब सरकार की ओर से एनओसी के नाम पर आम पब्लिक की परेशानियों को बढ़ा दिया गया है, वहीं दूसरी ओर एनओसी देने वाला ग्रेटर लुधियाना एरिया डेवलपमेंट आथोर्रिटी में (गलाड़ा) के अफसरों ने तो ये तय ही कर लिया है कि आम पब्लिक को तंग कैसे करना है। हालत ये है कि दोपहर बाद गलाड़ा के तीनों अहम अधिकारी अपनी अपनी सीटों से गायब रहते हैं और पब्लिक आफिस के चक्कर काट काट परेशान रहती है। हालात ऐसे हैं कि डयूटी पर मौजूद स्टाफ भी अपनी सीट पर नहीं बैठता वे दूसरे के कमरों में बैठकर पब्लिक की जबाव तलबी से बचने की कोशिश में रहते हैं। आम पब्लिक से आ रही शिकायत के बाद जब गलाड़ा आफिस का मंगलवार दोपहर 3 बजे मौका मुआयना चैक किया गया तो गलाड़ा की चीफ एडमिनस्ट्रेटर अमरप्रीत कौर संधू, एसीए अमरिंदर सिंह मल्ली व ईओ रेगुलेटरी डा.बलजिंदर ढिल्लों अपने अपने आफिस से नदारद दिखे। इतना ही नहीं जब इन तीनों पब्लिक आफिसर्स से इनके मोबाइल पर बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने फाेन पर जबाव तक देना उचित नहीं समझा। इससे एक बात साफ है कि यही सरकारी अफसर सरकार की ओर से पब्लिक की सहूलियत को बनने वाले पालिसी को फेल करने में अहम रोल अदा कर रहे हैं। ---------- -केवल बडे़ कालोनाइजरों को घर बैठ मिलती है एनओसी, आम पब्लिक को केवल धक्के अगर गलाड़ा आफिस की हकीकत समझी जाए, तो रोजाना सैंकड़ों की तादाद में लोग अपनी अपनी प्रॉपर्टी या प्लाट की एनओसी लेने को गलाड़ा आफिस पहुंचती है। एनओसी के लिए पब्लिक कैसे रोजाना सरकारी डिपार्टमेंट व अफसरों के चक्कर काटे ये उनकी ओर से पहले ही तय कर दिया गया है। अगर आप समझें कि आपकी ओर से आनलाइन आवेदन के बाद आपको एनओसी खुद ब खुद मिल जाएगी तो आप गलत हैं। अगर आपने इसका फालो नहीं किया तो समझों की आपको जिंदगी भर ये एनओसी नहीं मिलने वाला। एक तरफ पंजाब के मुख्यमंत्री स. भगवंत मान आम पब्लिक को घर बैठे रजिस्ट्री होने का सपना दिखा रही है तो दूसरी ओर गलाड़ा के अफसर एनओसी के लिए आम पब्लिक को तहसीलदार, कानूनगो व फिर पटवारी के चक्कर कटवा रही है। इसका कारण है कि गलाड़ा एनओसी से पहले आम पब्लिक को एक दस्तावेज देकर कहती है कि वे इस पर इन तीनों की रिपोर्ट करवाकर ले आएं, उसके बाद उनका जेई व एटीपी रिपोर्ट करेगा। मतलब ये कि पहले तहसीलदार, कानूनगो फिर पटवारी के पास जाने में एक सप्ताह से दस दिन खराब और उसके बाद फिर आपके दस्तावेज गलाड़ा में जमा हाेंगे। लेकिन मुशकिल यहां पर भी खत्म नहीं, इसके बाद एक मुलाजिम इस एनओसी के दस्तावेज को किसी जेई को लॉगइन कर उसे मार्क करता है, लेकिन अगर आपको किस्मत सहीं है तो एक महीने के बीच ये रिपोर्ट एटीपी के पास पाजिटिव पहुंच जाती है, लेकिन आपकी किस्मत खराब तो जेई रिपोर्ट कर देता है कि ये एरिया मेरे में फॉल नहीं करता, इसके बाद एटीपी भी आपकी फाइन पर नैगेटिव रिपोर्ट कर देता है। बड़ी मुश्किल से 20 से 25 दिन में ये काम होता है और ओब्जेक्शन लगने के बाद फिर से आपकी दबा दी जाती है। जब आप पता करोगे तो ही फाइल दोबारा किसी जेई को मार्क होगी। यानि इस पूरी प्रक्रिया में दो से तीन महीने खराब और आपके चक्कर कितने लगेंगे इसकी गिनती कोई नहीं। हालांकि बाद में इसके बाद ईओ गलाड़ा व एसीए गलाड़ा की रिपोर्ट भी होनी होती है। ये परेशानी का सबब आम पब्लिक का है। लेकिन वहीं जिन प्रॉपर्टी डीलर्स कालोनाइजर्स व बैंक लोन करवाने वालों की ईओ व एसीए या एनओसी का काम देख रहे स्टाफ से सेटिंग है, तो 20 हजार से 50 हजार रुपए की रिश्वत के साथ ये काम कर बैठे हो जाता है। दस दिन के भीतर ऐसे लोगों की एनओसी घर आ जाती है। यही कारण है कि गलाड़ा की ओर से जारी होने वाली एनओसी जाली भी बाजार में बेचने वाले एक्टिव हैं और वे भी 5 से दस हजार रुपए में ये एनओसी बना देते हैं। इसके बाद तहसील आफिस में भी मोटी रिश्वत लेकर इस जाली एनओसी पर रजिस्ट्री करवा दी जाती है। इस मामले की एक शिकायत पुड़ा के सेक्रेटरी एके सिन्हा को भी एक शिकायत भेजी गई है।
Public Outcry Over Noc And Officers Missing From Chairs In Galada Office