लुधियाना। लुधियाना में विजिलेंस को मुल्लांपुर से शैलर मालिक कृष्ण लाल धोतीवाला की मिलों से उत्तर प्रदेश खाद्य एवं रसद विभाग सीजन 2020/21- की मुहर लगी बोरियां मिली। इन बोरियां में चावल यूपी से तस्करी होकर आए या नहीं यह एक राज ही बन कर रह गया है। संबंधित अधिकारियों ने उत्तर प्रदेश या पंजाब में अनाज की खेती का पता लगाने में असमर्थता दिखाई है। कृषि अनुसंधान विभाग ने विजिलेंस को जवाब दिया है गड़ेमारी के बाद चावलों में अंतर पता कर पाने की उनके पास कोई तकनीक नहीं है। कथित खाद्यान्न और टेंडर घोटाले की जांच के दौरान, सतर्कता ब्यूरो लुधियाना रेंज ने सितंबर 2022 में धोतीवाला की चार मिलों पर छापे मारे थे, जिनमें गणपति एग्रो राइस मिल, केएल एग्रो, सुरिंदर एग्रो और सिंगला एग्रो शामिल थे और लगभग 2,500 बोरियां बरामद की थी। बोरियों पर उत्तर प्रदेश खाद्य एवं रसद विभाग की मुहर लगी इन बोरियों पर उत्तर प्रदेश खाद्य एवं रसद विभाग की मुहर लगी है। कुछ दिनों बाद विजिलेंस ब्यूरों ने भारतीय खाद्य निगम (FCI) को इन मिलों के खाद्यान्न को आगे नहीं बेचने के लिए लिखा था। इसके बाद विजिलेंस टीम ने स्टाक से चावल के सैंपल एकत्र किए थे और यह पता लगाने के लिए चावलों के सैंपल लिए थे कि कहीं यह अन्य राज्यों से तस्करी कर लाए गए चावल तो नहीं।
Case Of Rice Found From Mullanpur Sheller Agriculture Research Departments Reply To Vigilance There Is No Technique To Know The Difference Between Rice