यशपाल शर्मा, लुधियाना नगर निगम की ओर से फोकल प्वाइंट में रमल डाइंग में इलीगल बाईपास पकड़े जाने के बाद अब पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कारगुजारी पर सवाल खड़े होने लगे हैं । बोर्ड के नियम कायदों का इंडस्ट्री किस तरह से पालन कर रही है, इसकी जांच को पीपीसीब की टीमें साल में दो से तीन बार इंडस्ट्री की ग्राउंड रिपोर्ट चैक करने को पहुंचती हैं और ये दुरुस्त करती हैं कि डाइंग में कोई इल्लीगल बाईपास बनाकर अनट्रीटेड वाटर को सीवर लेन में तो नहीं गिराया जा रहा। इतनी सख्ती के बावजूद अगर किसी डाइंग की ओर से अपने अनट्रीटेड पानी को बाईपास के जरिए सीवर में गिराया जा रहा है तो यह पीपीसीबी की कारगुजारी पर सवाल खड़े करते दिखाई दे रहा है। इसका साफ मतलब है कि पीपीसीबी के एसडीओ व एक्सईन स्तर के अफसरों की सांठगांठ से ही इंडस्ट्री मालिक इस पूरे गोरखधंधे को चलाता है। -- ताजपुर सीईटीपी से जुड़ी हैं फोकल प्वाइंट की डाइंगें बड़ी बात है कि फोकल प्वाइंट की सभी डाइंग यूनिट्स की ओर से ताजपुर रोड स्थित सीईटीपी से जुड़ी हुई है। इसका बड़ा कारण है कि फोकल प्वाइंट की सभी डाइंग की ओर से अपने डिस्चार्ज के लिहाज से सीईटीपी में शेयर खरीदे गए हैं और उसी लिहाज से वह अपना रोजाना का डिस्चार्ज सीईटीपी में भेजते हैं। अगर इस पैमाने के बावजूद कोई अगर अपने डिस्चार्ज को बाईपास के जरिए सिवरेज पर गिरा रहा है तो कहीं ना कहीं बड़ी गड़बड़ इस पूरे एपिसोड में दिखाई दे रही है। इससे ये संभावना जताई जा रही है कि डाइंग यूनिट्स की ओर से अपने डिस्चार्ज की कुल मात्रा से कम शेयर सीईटीपी में लिए गए हैं और यही कारण है कि उनकी ओर से इलीगल ढंग से अपने डिस्चार्ज को बाईपास कर नगर निगम के सीवर लाइन में गिराया जा रहा है । फोकल प्वाइंट में डेढ़ दर्जन भर से अधिक डाइंगें ऐसी हैं जिन से रोजाना 10 लाख लीटर से लेकर 20 लाख लीटर तक का डिस्चार्ज होता है। ऐसे में अब इन सभी डाइंगो की पड़ताल होनी जरूरी है कि वे अपने कुल डिस्चार्ज मुताबिक सीईटीपी में डिस्चार्ज भेज रहे हैं या उनकी ओर से भी कोई इल्लीगल बाईपास अपनी फैक्ट्री में बना अपना डिस्चार्ज सीवर में बहाया जा रहा हैं। बड़ी बात है कि फोकल प्वाइंट में ही इलेक्ट्रोप्लाटिंग इंडस्ट्री के डिस्चार्ज को सीईटीपी रमल डाइंग से कुछ गज की दूरी पर लगाया गया है। इस सीईटीपी के संचालक जेबीआर ग्रुप का दावा है कि ट्रीट के बाद बचने वाला पानी रमल डाइंग को रियूज को भेजा जाता है और अगर रमल डाइंग में कोई बाईपास पकड़ा जाता है तो इलेक्ट्रोप्लाटिंग के जहरीले डिस्चार्ज को ट्रीट करनें को लगे इस कॉमन एफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्लांट की कारगुजारी पर भी सवाल खड़े हो जाते हैं। --------- वहीं इस बारे में नगर निगम के एसई रविंदर गर्ग ने बताया कि पीपीसीबी को ये ताकीद की गई है कि रैड कैटेगरी जो सीईटीपी के साथ जुड़ी हुई हैं, अपना इंडस्ट्रियल व डॉमेस्टिक डिस्चार्ज कनेक्शन नगर निगम के साथ न जोडे़। उन्होंने कहा कि कुछ इंडस्ट्री डोमेस्टिक कहकर अपना कनेक्शन नगर निगम के सीवरेज से जोड़ देते हैं, लेकिन रात में इसी डाेमेस्टिक सीवरेज में अनट्रीटेड वॉटर गिरा कर बाइपास कर दिया जाए, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा। उन्होंने कहा कि पीपीसीबी ने मौके से रमल डाइंग के सैंपल भी लिए हैं, जिससे पूरी तस्वीर साफ हो जाएगी।
Illegal Bypass Of Ramal Dyeing Raised Questions On The Performance Of Ppcb Officials