इंप्रूवमेंट ट्रस्ट घोटाले को लेकर विजिलेंस के राडार पर चल रहे पूर्व चेयरमैन व कांग्रेसी नेता रमण बाला सुब्रामनियम की मुश्किलें एक बार फिर से बढ़ती दिखाई दे रही हैं। उनकी इस बार मुश्किलें बढ़ने का कारण भगौड़ा आरोपी प्रदीप कुमार है, जो विजिलेंस के हत्थे चढ़ गया है। ये वहीं आरोपी है, जिसे विजिलेंस ने अपनी एफआईआर में नामजद किया हुआ था और ये ट्रस्ट प्रॉपर्टीज में कांग्रेस कार्यकाल दौरान हुई ई आक्शन के अहम सूत्रधार में से एक है। बताया जाता है कि प्रदीप कुमार ने अपने बचाव को सुप्रीमकोर्ट तक गुहार लगाई थी, लेकिन उनकी वहां भी बेल रिजेक्ट हो गई थी। आज विजिलेंस ई ओ विंग की ओर से प्रदीप कुमार को कोर्ट में पेश किया गया, जहां उसे दो दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। इस बात का खुलासा विजिलेंस ईओ विंग के एसएसपी सूबा सिंह ने किया। बता दें प्रदीप कुमार पूर्व ट्रस्ट चेयरमैन रमण बाला सुब्रामनियम के कार्यकाल दौरान हुई प्लॉट बूथ व कामशिर्यल प्रॉपर्टी की हुई आनलाइन बोली के दौरान इच्छुक खरीददारों तक सस्ते दाम में प्रॉपर्टी दिलाने की ऑफर करता घूमता था। विजिलेंस की ओर से दायर एफआईआर में रमण बाला सुब्रामनियम को ई आक्शन में गड़बड़ करने का आरोपी बनाकर विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई थी और उनके इस कारनामे में ट्रस्ट एसडीओ अंकित नारंग का भी नाम शामिल है। हालांकि सुब्रामनियम कानूनी दांवपेंच के चलते विजिलेंस की गिरफतारी से बच गए थे, लेकिन पिछले करीब दो महीने से अधिक समय से विजिलेंस उन्हें आय से अधिक संपति मामले में बुला पूछताछ कर रही है। उनकी इस पूछताछ में भी उनकी ओर से ली गई 20-20 लाख रुपए की एंट्री सहित कईं अन्य लेनदेन बड़ी आफत बना हुआ है। ई आक्शन में किस तरहसे होता था घोटाला, इस पर जुटाए जा रहे सुराग विजिलेंस की ओर से दायर एफआईआर मुताबिक रमण बाला सुब्रामनियम ने ई आक्शन में गड़बढझाला सरकारी खजाने को नुकसन पहुंचाया व अपने चहेतों को इसके जरिए फायदा पहुंचाने की बात कही गई है। अब ऐसे में विजिलेंस प्रदीप से पूछताछ के जरिए यही पता लगा रही है कि आखिर ई आक्शन में कैसे घोटाला अपने चहेते को बोली दिला दी जाती थी। इतना ही नहीं रमण बाला सुब्रामनियम ने बहुत से कईं खरीददारों की फाइनल बोली को बाद में कम बोली कह रिजेक्ट भी किया था। तब खरीददारों के आरोप थे कि उनकी जानबूझकर बोली रदद कर आक्शन को कैंसिल कर दिया गया। अब इस जांच में ये पता लगया जा रहा है कि ई आक्शन को किसी जरिए हैंग कर या किस अन्य तरीके से चहेते खरीददार को फाइनल बोली का विजेता बनाया जाता था।
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