जालंधर। वादे पूरे न होने पर किसान भड़क गए हैं। पंजाब के किसान सरकार के खिलाफी को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी में हैं। रणनीति बनाने के लिए 3 जुलाई को उन्होंने बैठक बुलाई है। इस बैठक में 30 से 32 किसान जत्थेबंदियों के शामिल होने की उम्मीद है। किसान नेताओं का कहना है कि पंजाब सरकार ने किसानों को उत्साहित किया था कि मूंगी की खेतों में बिजाई करो। सरकार मूंगी को 7275 रुपए समर्थन मूल्य देकर खरीदेगी, लेकिन जब किसान फसल लेकर मंडियों में पहुंचे तो सरकार अपने वादे से मुकर गई। किसानों को औने-पौने दाम पर 5900 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से मूंगी मंडियों में बेचनी पड़ी। 800 से 900 रुपए में बिक रही मक्की किसानों का कहना है कि सरकार की करनी और कथनी में बहुत अंतर है। मक्की की समर्थन मूल्य 2090 रुपए है, लेकिन जब किसान बेचने जाते हैं तो उन्हें 800 से 900 रुपए भाव मिल रहा है। इसी तरह से इस बार सीजन में मूंगी का समर्थन मूल्य 8558 रुपए तय किया गया है, लेकिन मंडियों में किसानों को 6500 से 6700 रुपए प्रति क्विंटल मिल रहा है। पहले नीली-सफेद वाले होते थे, अब पीली पगड़ी वाले हैं भारतीय किसान यूनियन दोआबा के प्रधान मनजीत सिंह राय ने कहा कि प्रदेश में बदलाव के साथ आई सरकार के बारे में लोगों का विचार यह था अब सब कुछ बदलेगा, लेकिन कुछ नहीं हुआ। पंजाब में सिर्फ पगड़ियों के रंग बदले हैं। पहले नीले और सफेद थे अब पीली पगड़ी हो गई है, लेकिन नीतियां आज भी वही हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान अपने दिमाग से काम नहीं कर रहे हैं बल्कि रिमोट से दिल्ली के इशारे पर चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने कुदरती आपदा से तबाह हुई फसल पर कहा था कि फसल खेत में मुआवजा जेब में। लेकिन अभी तक भी कई किसानों को मुआवजा नहीं मिला है। उन्होंने मुख्यमंत्री पर तंज कसा कि वह कहते हैं कि किसान प्रदर्शन के लिए जगह ढूंढते हैं वजह नहीं। उन्होंने कहा कि पिछले दिनों किसान संगठन मुख्यमंत्री के वजह दे आए हैं अब जगह वह खुद तय कर लें।
Farmers-Agitated-Over-Non-Promise-In-Punjab-Meeting-Called-For-Not-Getting-The-Price-Of-The-Crop-Said-Turbans-And-Faces-Changed-Policies-Same