जालंधर। जालंधर में सतलुज नदी के साथ लगते शाहकोट में गिद्दड़पिंडी रेलवे पुल के नीचे समय रहते विभाग ने साफ सफाई का काम नहीं कराया। जिसके चलते मंडाला और धुस्सी में बांध टूट गए। वहीं 50 से ज्यादा गांवों और खेतों में पानी भर गया। इसके लिए बाकायदा राज्यसभा सांसद संत सीचेवाल ने अधिकारियों की मीटिंग और एक पत्र लिखकर चेताया भी था, लेकिन उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया गया। गिद्दड़पिंडी रेलवे पुल के नीचे डिसिल्टिंग (गाद निकालना) नहीं करवाए जाने का नतीजा है कि आज क्षेत्र के हजारों लोगों को नुकसान के रूप में इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। केवल 3 चैनल चालू, रूकावट के बाद पानी ने पकड़ी रफ्तार वाटर रिसोर्स एवं वाटर ड्रेनेज विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, अधिकारियों को यह पता था कि गिद्दड़पिंडी रेलवे पुल के नीचे से गुजरने वाले 21 चैनलों में से केवल 3 ही चालू थे। बाकी मलबे से में दबे हए थे। अधिकांश चैनलों के आगे गाद के 12 से13 फीट तक ऊंचे ढेर जमा हो गए थे। जिससे पानी का प्रवाह बाधित हो गया था। सतलुज में जैसे ही पीछे से पानी आया तो पुल के नीचे द्वारों में पानी को निकलने में रुकावट आई। रास्ता संकीर्ण होने से पीछे से आ रहे पानी ने एकाएक गति पकड़ ली और इसका बहाव मंडाला में धुस्सी बांध की तरफ बढ़ गया। पानी इतनी तेजी से आया कि उसने धुस्सी बांध को ही दो जगह से तहत-नहस करके रख दिया। इससे धुस्सी के साथ लगते सारे गांव खेत पानी में डूब गए।2019 से भी सबक नहीं सीखा साल 2019 में भी ऐसे ही बाढ़ आई थी। उस वक्त भी परिस्थितियां लगभग ऐसी ही थीं। 2019 में सतलुज में जलस्तर बढ़ने से आई बाढ़ के कारण करीब 1200 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था। लोगों के घर खेत सब तबाह हो गए थे। तीन साल बाद फिर वही हाल है। सरकारों और अधिकारियों ने 2019 की त्रासदी से कोई सबक नहीं सीखा। अगर समय रहते वाटर रिसोर्स एवं वाटर ड्रेनेज विभाग ने पुल के नीचे सफाई का काम करवाया होता तो आज यह दिन न देखना पड़ता।
Mandala-Dhussi-Dam-Broke-In-Jalandhar-Due-To-Administrations-Mistake-Mp-Seechewal-Had-Already-Warned-The-Officers-By-Writing-A-Letter