यशपाल शर्मा, लुधियाना सतलुज क्लब में चहेते स्टाफ की सैलरी बढाए जाने के विवाद में क्लब जनरल सेक्रेटरी डा. अजीत सिंह चावला सवालों के घेरे में फंसते दिखाई दे रहे हैं। आखिर किन कारणों से चहेते स्टाफ की सालाना सैलरी बढ़ोतरी के बाद फिर से एक महीने बाद करीब एक दर्जन स्टाफ की सैलरी बढ़ाए जाने के विवाद में उनकी ओर से मीडिया समक्ष की जा रही बयानबाजी ही उन्हें सवालों के घेरे में ला रही है। डा. चावला मीड़िया को दी जा रही बयानबाजी में कहते दिख रहे हैं कि स्टाफ की सैलरी बढ़ोतरी क्लब प्रेसीडेंट व डिप्टी कमिश्नर सुरभि मलिक व क्लब का चार्ज देख रहे एसीए गलाड़ा अमरजीत सिंह बैंस की ओर से बढ़ाए जाने की बात कह रहे हैं, लेकिन असलियत ये है कि चहेते स्टाफ की सैलरी बढ़ोतरी का प्रपोजल जरनल सेक्रेटरी डा. अजीत चावला की ओर से ही बनकर गया है और उसी को क्लब प्रेसीडेंट ने मंजूरी दी है। इतना ही नहीं सैलरी बढ़ोतरी में जो कारण दिए गए हैं, वे भी सवालों के घेरे में हैं। चहेतों को सैलेरी बढ़ोतरी का इनाम देने में सब कुछ दरकिनार कर दिया गया। बताया जाता है कि क्लब का एक ड्राइवर ( 4 से 5 साल पुराना ) जरनल सेक्रेटरी साहिब को घर से क्लब लाने व क्लब छोड़ने का काम करता है। क्लब नियमों के तहत ड्राइवर से ये काम दो नंबर में लिया जा रहा है और इसी एवज में उसकी सैलरी 12 से बढ़ाकर 15 हजार कर दी गई। जब की क्लब में 15 से 20 साल पुराने ड्राइवर कम वॉचमैन मात्र 12 हजार की सैलरी के आसपास ही अटके हुए हैं। सूत्र बताते हैं कि चहेतों की सैलरी बढ़ाने का पूरा विवाद पीसीएस अधिकारी अमरजीत सिंह बैंस के पास पहुंच गया है और उनके पास वे दस्तावेज भी पहुंच गए जिनके आधार पर दो कोच पहले से सैलरी जंप हासिल कर चुके थे। ------------ बैडमिंटन कोच की सैलरी बढ़ने के पीछे का तर्क भी झूठा सतलुज क्लब के बैडमिंटन हॉल के दो कोच को बढ़ी हुई सैलरी का इनाम दिया गया है। इस बारे में डा. चावला का कहना था कि ये कोच एनआईएस सर्टिफिकेट लेकर आए थे, इसलिए उनकी सैलरी बढ़ाई गई है। लेकिन इसके पीछे की हकीकत ये है कि ये दोनों कोच पहले ही इस सर्टिफिकेट के आधार पर 22 फीसदी सैलरी जंप हासिल कर चुके हैं। इनमें एक कोच आनंद कुमार 2001 में इस सर्टिफिकेट के जरिए सैलरी जंप हासिल कर चुके हैं। तब क्लब की कमान तत्कालीन डीसी एसके संधू के हाथ में थी। इसके बाद साल 2011 में बैडमिंटन कोच राजिंदर भी इसी सर्टिफिकेट के साथ सैलरी जंप हासिल कर चुका है। उन्हें ये सैलरी जंप तत्कालीन डीसी राहुल तिवारी की ओर से दिया गया था। हालांकि नियमों के तहत पहले भी इन कोचों को दिए गए सैलरी जंप गैर कानूनी है। नियमों के तहत ये सैलरी बढ़ोतरी उन्हीं को मिलती है जो एनआईएस से डिप्लोमा या डिग्री हासिल करके आए हों। लेकिन क्लब में छह सप्ताह के ट्रेनिंग सर्टिफिकेट के आधार पर ही ये वेतन बढ़ा दिया गया है। ऐसे में अगर ये कोच पहले से इन सर्टिफिकेट के आधार पर सैलरी जंप ले चुके हैं तो मौजूदा जरनल सेक्रेटरी ने किन नियमों के तहत इनको दोबारा से सैलरी जंप दिया।
Sutlej-Club-Salary-Jump-Controversy-General-Secretary-Dr-Chawla-Caught-In-The-Circle-Of-Questions