यशपाल शर्मा, लुधियाना नगर निगम लुधियाना में ताज़ा ताजा नया विवाद चर्चा में आ गया है। यह पूरा विवाद एक एमटीपी स्तर के अफसर की ओर से 5 दिन की मांगी गई छुट्टी को लेकर खड़ा हुआ है। नगर निगम लुधियाना में एमटीपी पद पर तैनात रजनीश वधवा की ओर से 5 दिन की छुट्टी का आवेदन नगर निगम कमिश्नर के पास किया गया था। जिस पर नगर निगम कमिश्नर की ओर से कई ऑब्जेक्शन लगा दिए गए बताया जाता है कि निगम कमिश्नर के इस तरह के रवैया से तंग आकर एमटीपी की ओर से अपना इस्तीफा मेल कर दिया गया है। इस्तीफे की एक कॉपी ई न्यूज़ पंजाब के पास भी है। जिस लिहाज से नगर निगम कमिश्नर डॉक्टर शेना अग्रवाल की ओर से एमटीपी रजनीश वधवा की लीव एप्लीकेशन पर लंबे चौड़े ऑब्जेक्शन लगाए गए हैं, उससे यह अंदाजा तो आप लगा सकते है कि दोनों के बीच में कुछ सही नहीं चल रहा था। छुट्टी की आवेदन और छुट्टी ना देने के पीछे कई तरह की बातें भी उठकर सामने आ रही हैं। जिसमें चंडीगढ़ रोड पर वर्धमान प्रोजेक्ट के तहत इल्लीगल ढंग से बने 29 एसीओ को कंपाउंड करने का मुद्दा, ग्रैंड वॉक को लेकर चल रही विजिलेंस इंक्वारी पर रिपोर्ट और शहर में धड़ल्ले से बन रही इलीगल बिल्डिंगो पर कारवाई ना हो पाने सहित कई अन्य बातें इसके पीछे का बड़ा कारण बताई जा रही है। -- जाने क्या है पूरा विवाद। एमटीपी रजनीश वाधवा की ओर से राजस्थान के माउंट आबू में लगने वाले मेडिटेशन शिविर में शामिल होने के लिए 17 जुलाई को 21 जुलाई से लेकर 25 जुलाई तक की छुट्टी का आवेदन नगर निगम कमिश्नर के पास किया था। ये आवेदन ज्वाइंट कमिश्नर से होते हुए निगम कमिश्नर के टेबल पर 20 जुलाई को पहुंचा। जिस पर नगर निगम कमिश्नर डॉक्टर शेना अग्रवाल की ओर से बड़े तीखे सवाल खड़े करते हुए 5 ऑब्जेक्शन लगा दिए गए । एमटीपी स्तर के ऑफिसर की मात्र 5 दिन की छुट्टी पर 5 ऑब्जेक्शन लगा देना अपने आप में कहीं ना कहीं एक ऑफिसर के मनोबल को गिराने जैसा है। --- आप भी जाने यह पांच ऑब्जेक्शन क्या है। 1. छुट्टी के साथ नियम लगाए जाए। 2. छुट्टी EL है या CL है यह नहीं बताया गया। 3. साल में अभी तक कितनी छुट्टी ली गई है, यह नहीं बताया गया। 4. छुट्टी का आवेदन आज मेरे पास पहुंचा है जबकि ऑफिसर छुट्टी सैंक्शन बिना छुट्टी पर जा चुका है। 5. इस छुट्टी को लोकल गवर्नमेंट सेक्रेटरी से मंजूरी दी जानी है। - जाने क्या है इस विवाद के पीछे का सच इस पूरे एपिसोड को जानने के बाद आपके मन में यह जरूर आ रहा होगा कि आखिर इस पूरे मामले की अंदर की सच्चाई क्या है। कई अहम कारण है जिसे लेकर कई तरह के सवाल एमटीपी और नगर निगम कमिश्नर पर लंबे समय से खड़े होते आ रहे हैं बीते दिनों चंडीगढ़ रोड पर वर्धमान प्रोजेक्ट में बिना नक्शे के 29 एससीओ इल्लीगल ढंग से बनाए जाने का मामला सामने आया था। इस मामले में लोकल गवर्नमेंट की ओर से इंक्वायरी के बाद एक एटीपी व 1 हेड्राफ्टमैन को सस्पेंड कर दिया गया। सूत्र बताते हैं कि अब यह फाइल कंपाउंडिंग को नगर निगम में घूम रही है और इस फाइल को मंजूरी दिलाने के लिए वर्धमान ग्रुप के अदिश ओसवाल का पूरा दबाव नगर निगम कमिश्नर व उनके पति पर बताया जा रहा है जोकि मलेरकोटला में डिप्टी कमिश्नर के पद पर हैं। इस को लेकर निगम कमिश्नर और एमटीपी के बीच में कई बार मतभेद भी हो चुके हैं बिल्डिंग ब्रांच ने इन एसीओ को की कंपाउंडिंग से पहले 4 sco को गिराने की शर्त रख दी है। जिसे लेकर अधिश ओसवाल सहमत नहीं है और यही कारण है कि वह इन sco की बिना शर्त कंपाउंडिंग का प्रेशर बनाए हुए हैं। वहीं दूसरी ओर फिरोजपुर रोड स्थित ग्रैंडवाक को लेकर भी एक इंक्वायरी विजिलेंस में चल रही है जिसमें एमटीपी की ओर से 8 महीने के बीच में रिपोर्ट देने की बात कही गई थी लेकिन मियाद पूरी होने के बावजूद गुजरने के यह रिपोर्ट नहीं हो पाई है। इतना ही नहीं नगर निगम के दायरे में पिछले 2 साल में धड़ल्ले से इल्लीगल बिल्डिंगों का निर्माण चल रहा है और एमटीपी रजनीश वधवा एक ईमानदार ऑफिसर के तौर पर जाने जाते हैं लेकिन उनकी ईमानदारी के बावजूद इलीगल बिल्डिंगों पर कार्रवाई ना होने से एमटीपी और नगर निगम कमिश्नर की ईमानदारी पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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