जालंधर। सिखों की सर्वोच्च संस्था शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) एक बार फिर से विवादों में घिर गई है। इस बार एसजीपीसी को विवादों में इसी संस्था के सदस्य लेकर आए हैं। एसजीपीसी के सदस्यों ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग से संस्था में हो रहे घोटालों की शिकायत की है। साथ ही आयोग के चेयरमैन इकबाल सिंह लालपुरा से मांग की है कि एसजीपीसी में हो रहे घोटालों की जांच केंद्रीय एजेंसी से करवाई जाए। सिख बुद्धिजीवियों ने आनंदपुर साहिब एसजीपीसी सदस्य पर गंभीर आरोप लगाए कि वह संस्था के संसाधनों का अपने निजी फायदे के लिए दुरुपयोग कर रहे हैं। एसजीपीसी की आंतरिक समिति के सदस्य भाई मलकीत सिंह के नेतृत्व में सिख बुद्धिजीवियों, विचारकों के प्रतिनिधिमंडल ने आयोग के चेयरमैन इकबाल सिंह लालपुरा से कहा कहा कि एसजीपीसी के प्रशासनिक ढांचे में आई गिरावट से संगत में रोष है।
70 लाख की कोठी 2.70 करोड़ रुपए में खरीद लगाया गोलक को चूना
प्रतिनिधिमंडल ने चेयरमैन लालपुरा को शिकायती पत्र सौंपते हुए आरोप लगाया कि एसजीपीसी के कुछ शीर्ष अधिकारी एसजीपीसी सदस्यों और पदाधिकारियों के प्रभाव में बड़े पैमाने पर धांधली और घोटालों में लिप्त हैं। उन्होंने एक अदालती मामले का भी जिक्र किया, उन्होंने कहा कि तख्त श्री केसगढ़ साहिब में 70 लाख रुपए की कोठी 2.70 करोड़ रुपए में खरीदकर गुरु की गोलक को चूना लगाया गया था।
नशे में फंसे प्रिंसिपल और उसके पति को बचा रहे
वफद ने आरोप लगाया कि श्री आनंदपुर साहिब की एसजीपीसी के अधीन एक प्रतिष्ठित स्कूल की प्रिंसिपल और उसके पति से एक किलो अफीम मिली थी। इस मामले में कोर्ट ने आरोपियों को सजा सुनाई थी। एसजीपीसी के अधिकारी प्रिंसिपल को निलंबित या बर्खास्त करने की बजाय संरक्षण दे रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल ने प्रिंसिपल से अब तक के वेतन की वसूली की भी मांग की। शिकायत पत्र में कहा कि एसजीपीसी सदस्य श्री आनंदपुर साहिब में एसजीपीसी के अधीन एक कॉलेज में कैंटीन और नियमों को ताक पर रखकर कई अन्य काम कर रहे हैं। जबकि उनका बेटा लुधियाना के एक इंजीनियरिंग कॉलेज में उच्च पद पर तैनात है। एसजीपीसी सदस्य नियमों के अनुसार इस संस्था के साथ कोई व्यवसाय नहीं कर सकता है।
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