लुधियाना। दिल्ली में वायु प्रदूषण बढ़ने के कारण पराली जलाने पर चिंता व्यक्त करते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने पंजाब के मुख्य सचिव और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के सदस्य सचिव को नोटिस जारी किया है। इस मामले की अगली सुनवाई 8 नवंबर को निर्धारित की गई है। वहीं, PPCB ने पराली जलाने के मामलों में 50% की कमी लाने का लक्ष्य रखा है। रिपोर्ट में कहा गया कि सर्दियों के आसपास पंजाब में पराली जलाना दिल्ली व आसपास NCR में प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण है। दरअसल, NGT अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए. सेंथिल वेल की पीठ का ध्यान PPCB की एक रिपोर्ट पर गया, जिसके बाद सुओ मोटो लेते हुए NGT ने कार्रवाई शुरू की। जिसमें खेतों में आग के लिए जाने जाने वाले हॉटस्पॉट जिलों के नाम के साथ पराली जलाने की घटनाओं पर तीन साल के तुलनात्मक आंकड़ों का विवरण दिया गया था। इसमें कहा गया कि PPCB अधिकारियों सहित राज्य के अधिकारियों को हॉटस्पॉट जिलों के भीतर सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों की पहचान करने की जरूरत है। जहां बेहतर उपायों पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। 15 सितंबर से 30 नवंबर तक जलती हैं पराली NGT पीठ का कहना था कि जिस अवधि में पराली जलाई जाती है, वह मुख्य रूप से 15 सितंबर से 30 नवंबर के बीच का समय है। इसलिए, इस अवधि के दौरान, संबंधित अधिकारियों को उल्लंघनकर्ताओं की पहचान करने और जुर्माना लगाने सहित सुधारात्मक उपाय अपनाते हुए सतर्क रहने की आवश्यकता होती है। NGT पीठ ने NCR और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग की एक रिपोर्ट भी रिकॉर्ड में ली। जिसमें 2022 में पराली जलाने की घटनाओं की वास्तविक गणना और इस दौरान उन्हें कम करने के लक्ष्य बताए गए थे। ट्रिब्यूनल ने PPCB को क्षेत्र-वार फसल अवशेष प्रबंधन योजना तैयार करने और रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया।
Notice-To-Punjab-Government-On-Increasing-Pollution-In-Delhi-Ngt-Will-Hear-On-November-8-Target-Of-50-Percent-Reduction-In-Stubble-Burning-Cases