डेस्क, लुधियाना
कैंसर की दवाओं की सामर्थ्य के मुद्दे के महत्व और संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए, लुधियाना से सांसद (राज्यसभा) संजीव अरोड़ा ने राज्यसभा के हाल ही में समाप्त हुए शीतकालीन सत्र में इस मुद्दे को उठाया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे को राज्यसभा में उठाने का फैसला इसलिए किया क्योंकि यह मुद्दा हर गांव और शहर में लोगों को प्रभावित कर रहा है क्योंकि देशभर में कैंसर की बीमारी बहुत तेजी से लोगों को अपनी चपेट में ले रही है।
अरोड़ा ने कैंसर की दवाओं को सभी के लिए सस्ता और किफायती बनाने के लिए संबंधित मंत्रालय द्वारा उठाए जा रहे कदमों के बारे में पूछा। उनके प्रश्न का उत्तर देते हुए, केंद्रीय रसायन और उर्वरक राज्य मंत्री भगवंत खुबा ने कहा कि डिपार्टमेंट ऑफ फार्मास्यूटिकल्स (डीओपी) के तत्वाधान में नेशनल फार्मास्यूटिकल्स प्राइसिंग अथॉरिटी (एनपीपीए) ड्रग्स (प्राइसिस कंट्रोल ) ऑर्डर, 2013 (डीपीसीओ, 2013) शेड्यूल- I में निर्धारित दवाओं की अधिकतम कीमत तय करता है। अनुसूचित दवाओं (ब्रांडेड या जेनेरिक) के सभी निर्माताओं को अपने उत्पाद एनपीपीए द्वारा निर्धारित अधिकतम मूल्य (साथ ही लागू वस्तु एवं सेवा कर) के भीतर बेचना होगा।
इसके अलावा, मंत्री ने जवाब दिया कि एनपीपीए ने नेशनल लिस्ट ऑफ़ एसेंशियल मेडिसिन्स (एनएलईएम) 2015 और एनएलईएम, 2022 के तहत डीपीसीओ, 2013 की अनुसूची- I में शामिल 131 कैंसर-रोधी अनुसूचित फॉर्मूलेशन की अधिकतम कीमत तय की है। एनएलईएम, 2022 के तहत तय किए गए इन 112 कैंसर रोधी फॉर्मूलेशन की अधिकतम कीमत में लगभग 22.69% की कमी आई है।
मंत्री ने अपने उत्तर में आगे बताया कि एनपीपीए ने 27 फरवरी 2019 के आदेश के तहत 'व्यापार मार्जिन रैशनलाईज़ेशन' एप्रोच के तहत 42 चयनित गैर-अनुसूचित कैंसर रोधी दवाओं पर 30% व्यापार मार्जिन की सीमा लगा दी। इससे इन दवाओं के 526 ब्रांडों की अधिकतम खुदरा कीमत (एमआरपी) में 90% तक की कमी आई और इसके परिणामस्वरूप मरीजों को लगभग 984 करोड़ रुपये की वार्षिक बचत हुई।
इसके अलावा, डीपीसीओ के प्रावधानों के अनुसार, होलसेल प्राइस इंडेक्स के आधार पर अनुसूचित दवाओं की अधिकतम कीमत सालाना संशोधित की जाती है। गैर-अनुसूचित फॉर्मूलेशन के मामले में, कोई भी निर्माता पिछले 12 महीनों के दौरान एमआरपी को एमआरपी के 10% से अधिक नहीं बढ़ा सकता है।
अरोड़ा के इस प्रश्न के संबंध में कि क्या ऐसे उदाहरण हैं जहां एक ही कंपनी अलग-अलग नामों के तहत एक ही साल्ट वाली दवा अलग-अलग कीमतों पर बेच रही है, मंत्री ने स्पष्ट रूप से "हां" में उत्तर दिया। इस बीच, यहां बता दें कि पंजाब में साल 2022 में कैंसर के 40,235 मामले सामने आये।
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