यशपाल शर्मा, लुधियाना
दयानंद मेडिकल कालेज एंड अस्पताल की नई मैनेजमेंट की ओर से सभी सीनियर व जूनियर डाक्टर 1 जनवरी 2024 से अपने घर, क्लीनिक व नर्सिंग होम में प्राइवेट प्रैक्टिस न करें का फरमान जारी होने के बाद अब अस्पताल मैनेजमेंट और डाक्टर्स में चर्चा का माहौल गर्माता दिखाई दे रहा है। आज हम आपको ये भी बताएंगे, इस फरमान के पीछे की असली वजह क्या है। बहुत से डाक्टर ऐसे हैं, मैनेजमेंट का फैसला जिनके गले से नीचे नहीं उतर रहा। इसका बड़ा कारण है कि पहले प्राइवेट प्रैक्टिस के जरिए होने वाली आमदन सीधे उनकी जेब में जाती थी और इसकी बदौलत ही डीएमसी के बहुत से डाक्टर्स की ओर से बैंक से लोन के जरिए आलीशन कोठी, फार्म हाउस व लग्जरी गाड़ियां खरीद रखी हैं। लेकिन अब अगर वे अस्पताल की ओपीडी में जाकर मरीजों को देखते हैं तो इसका बड़ा हिस्सा अस्पताल के खाते में जाने वाला है। ऐसे में अब इन डाक्टरों को अपने लंबे चौडे़ खर्चों पर भी लगाम लगानी पड़ सकती है। लेकिन दूसरी ओर मैनेजमेंट के लिए भी इस पूरे मामले में एक बड़ा पेहलू भी है, जिसके कारण अस्पताल प्रबंधन की सोच की पोल खुलने वाली है। जिसका खुलासा इस एपिसोड़ की तीसरी न्यूज में किया जाएगा। अभी इस मामले में न मैनेजमेंट कुछ बताने के मूड में हैं और वहीं डाक्टर भी दबी जुबान में फिलहाल एक जनवरी के बाद का सीन का सच देखना चाहते ंहै।
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आखिर जानें क्या है, इस पूरे एपिसोड़ के पीछे का सच
असल में अगर इस पूरे मामले की जड़ में जाया जाए तो इसके कईं पहलू हैं, जिसे वजह से केवल डीएमसी अस्पताल में ये विवाद समय समय पर खड़ा होता रहा है। असल में अस्पताल मैनेजमेंट का सोचना है कि डीएमसी अस्पताल में बड़ी तादाद में आने वाले मरीजों की वजह से ही यहां काम करने वाले डाक्टरों की बेहतर पहचान बन पाती है और ये प्लेटफार्म उनकी प्राइवेट ओपीड़ी को चलाने वाला है। इसलिए मैनेजमेंट सोचती है कि डाक्टरों की प्राइवेट ओपीड़ी की कमाई के पीछे अस्पताल का अहम रोल है। वहीं दूसरी ओर डाक्टरों का मानना है कि वे अपने अपने क्षेत्र में सबसे बेहतर हैं और उनकी ओर से बताई जाने वाली दवाइयों से मरीजों को जल्दी आराम मिलता है और इसके चलते ही डीएमसी अस्पताल नार्थ इंडिया का सबसे बेहतर अस्पतालों में शुमार है। यही कारण है कि अस्पताल मैनेजमेंट सुबह 8 बजे से 4 बजे तक काम करने वाले डाक्टरों को सैलरी देने वाले डाक्टरों को अपनी तीन से चार घंटे की प्राइवेट प्रैक्टिस भी अस्पताल में करने को कह रही है।
अस्पताल हीरो हार्ट की तरह देगा डाक्टरों को देगा कमीशन
डीएमसी प्रबंधन के इस सख्त फैसले से एक बात साफ है कि मैनेजमेंट अब डाक्टरों की प्राइवेट ओपीडी अस्पताल में लगवा कर उन्हें 20 से 35 फीसदी की कमीशन देगा और ओपीडी के साथ साथ ये कमीशन उनकी ओर से ब्लड़ टेस्ट व अन्य तरह के टेस्ट में भी रहेगी। ये पूरा तारीका डीएमसी हीरो हार्ट में ओपीडी चलाने वाले डाक्टरों की तर्ज पर रह सकता है। लेकिन अब इसके लिए डाक्टर कितने तैयार हैं और कितने इस फार्मूलें पर काम करते हैं ये आने वाली एक जनवरी के बाद ही तय हो पाएगा। चर्चा ये भी है कि कुछ डाक्टर तो नौकरी छोड़ अपनी फुल टाइम प्राइवेट ओपीडी पर विचार कर रहे हैं, तो कुछ अधिक फुटफॉल वाले अस्पतालों में जाने का मन बना रहे हैं।
डाक्टरों पर लगातार शिकंजा कस रही नई प्रबंधन
अस्पतल की नई मैनेजमेंट लगातार अस्पताल के डाक्टरों पर अपनी सख्ती का शिकंजा कसती जा रही है। करीब एक महीने पहले ही अस्पताल की ओर से डाक्टरों की एंट्री और एग्जिट के लिए बॉयोमैट्रिक एटेंडेंस भी जरुरी कर दी है। अब सीनियर से लेकर जूनियर डाक्टर को सुबह आठ बजे बायोमैट्रिक अटेंडेंस लगानी जरुरी कर दी है। कुछ दिनों पहले ही डीएमसी हीरो हार्ट के सीनियर डाक्टरों की बायोमैट्रिक अटेंडेंस ने लगने के चलते उनकी सैलरी काट ली गई थी और जिसके बाद ये डाक्टर इकटठे हो इस मुददें पर प्रबंधन से भी मिले थे। लेकिन प्रबंधन ने इसे लेकर अपना पक्ष साफ कर दिया था।
Part-2-Finally-Know-The-Truth-Behind-The-Order-Of-Dmc-Hospital-Doctors-To-Close-Private-Opd