चंडीगढ़। साइबर फ्रॉड के बढ़ते मामलों को लेकर चंडीगढ़ में स्थित पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट के जस्टिस अनूप चितकारा ने कहा कि एक व्यक्ति को एक ही प्रीपेड सिम कार्ड दिया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि इंटरनेशनल कॉल रूटिंग से डायवर्ट होकर आने वाली कॉल को इंटरनेट के माध्यम से ब्लॉक करने का प्रावधान भी होना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि ग्राहकों को उन कंट्री कोड से कॉल आने का विकल्प देना चाहिए। जहां उनके संपर्क हैं। जिनका विदेश में कोई संपर्क नहीं है, तो उन्हें विकल्प दिया जा सकता है कि भारतीय कॉलिंग कोड के अलावा अन्य को ब्लॉक कर सकें। पीठ ने कहा कि अगर केंद्र सरकार इस तरह के प्रतिबंध लगाती है तो यह किसी के मौलिक अधिकारों का हनन नहीं होगा। क्योंकि सत्यापन करवाकर पोस्टपेड नंबर या लैडलाइन लेने का विकल्प हमेशा रहेगा ही। ग्राहकों को प्रीपेड नंबर को पोस्टपेड में बदलने का विकल्प दिया जा सकता है।
हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारी को जवाब देने से पहले केंद्रीय दूरसंचार मंत्रालय को भी पक्षकार बनाया है। हाईकोर्ट मध्यप्रदेश के एक व्यक्ति से संबंधित मामले को सुनवाई कर रहा हैं। जो हिसार जेल में इसलिए बंद है कि उस पर साइबर अपराधियों को सिम कार्ड बेचने का आरोप है। पुलिस ने उसके पास से उसके ही नाम पर दर्ज 35 सिम कार्ड बरामद किए थे। जिनमें से 12 सिम कार्ड एक्टीवेट थे। जस्टिस चितकारा ने कहा कि एक व्यक्ति को एक से अधिक सिम कार्ड जारी करने की अनुमति क्यों दी जाती है ? एक से अधिक सिम कार्ड जारी करने का कोई औचित्य नहीं लगता है। नाबालिगों द्वारा उपयोग किए जाने वाले फोन के लिए उनके माता-पिता के आधार कार्ड के साथ सिम कार्ड दिया जा सकता है। इसी तरह विदेशी नागरिकों को भी पासपोर्ट के सत्यापन पर एक ही सिम देना चाहिए। एक से अधिक सिम कार्ड रखने के इच्छुक लोग पोस्टपेड नंबर ले सकते हैं।
Punjab-And-Haryana-High-Courts-Order-Option-Of-International-Call-Block-Option-To-Receive-Calls-From-Country-Code-Should-Be-Given