कभी सरकारी प्रॉपर्टी की ई आक्शन, कभी एलडीपी तो कभी अल्ट्रनेटिव प्लाटों की अलॉटमेंट में घोटाले को लेकर चर्चा में रहने वाले लुधियाना इंप्रूवमेंट ट्रस्ट अब फिर से लीगल ब्रांच को लेकर चर्चा में आया हुआ है और इस चर्चा का कारण है कि कोर्ट में पेंडिंग केसों में हार की तादाद का बढ़ना। बताया जाता है कि पिछले दो से तीन महीनों में ट्रस्ट एक दर्जन से अधिक निचली अदालतों में चल रहे केसों में हार चुका है। इतना ही नहीं कई केसों में ट्रस्ट चेयरमैन तरसेम सिंह भिंडर के साथ भी ऐसी स्थिति पैदा हो गई, जहां पर जज साहिब की ओर से उन्हें PUNISH करने तक का मूड बना लिया गया था। असल में इसका बड़ा कारण है कि ट्रस्ट की लीगल ब्रांच में सब कुछ ठीक न चलना है। तरसेम सिंह भिंडर की ओर से ट्रस्ट की बतौर चेयरमैन कमान संभालने के बाद एडवोकेट केएल कोछड़ को लीगल एडवाइजर बना डाला गया और इसका एक प्रस्ताव पास कर सरकार को भी भेज दिया गया। लेकिन सरकार से इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने से पहले ही एडवोकेट केएल कोछड़ को एक कमरा भी अलॉट कर दिया गया। जबकि बाद में सरकार को भेजा प्रस्ताव रिजेक्ट कर दिया गया और कोछड़ के खिलाफ सरकार के पास पहुंची शिकायतों के बावजूद कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया। ये पूरा मामला करीब छह महीने पहले का है, लेकिन ट्रस्ट में अभी भी वे इस कमरे में विराजमान हैं। अब उनके साथ साथ एडवोकेट अमनदीप भनोट भी बतौर एडवाइजर ट्रस्ट में काम कर रहे हैं। लेकिन सबसे बड़ी बात है कि ट्रस्ट के पास इतने काबिल सीनियर वकील होने के बावजूद निचली अदालतों में केस हारने की तादाद बढ़ना कई तरह के सवाल खडे़ कर रहा है। दो दिन पहले ही मंजीत कौर वर्सस एलआईटी केस में भी ट्रस्ट को हार झेलनी पड़ी है। जबकि इस केस में विनोद कुूमार नाम के आटार्नी होल्डर की ओर से ट्रस्ट से रजिस्ट्री करवाने को केस किया गया था। जबकि प्लाट की अलॉटी मंजीत कौर का कहना था कि उसने किसी को ये प्लाट की आटार्नी नहीं दी और न इसे बेचा है। लेकिन इसके बावजूद लीगल ब्रांच की लापरवाही या कहें केस का सही फालोअप न होने के चलते ट्रस्ट ये केस हार किया। बताया जाता है कि इस केस में भी कुछ लाख रुपए की आफर करने की भी चर्चा है, लेकिन बिना दस्तावेजों के ई न्यूज पंजाब इसकी किसी तरह की कोई पुष्टि नहीं करता। केस हारने के बाद ट्रस्ट इसकी अपील हाईकोर्ट या सक्षम अदालत में करता है या नहीं, ये भी बड़ी जांच विषय का आगे बन सकता है।
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लंबी चौड़ी टीम होने के बावजूद लीगल केसों में हार का करना होगा मंथन
बताया जाता है कि छोटी बड़ी अदालतों को मिला इंप्रूवमेंट ट्रस्ट लुधियाना के 1200 से अधिक कोर्ट केस चल रहे हैं। चेयरमैन तरसेम सिंह भिंडर की ओर से इसके लिए सीनियर एडवोकेट अमनदीप भनोट व एडवोकेट केएल कोछड़ का अधिकारिक तौर पर लीगल राय को अप्वाइंट किया गया है। इसके साथ कोर्ट में केसों का सही समय में जबाव देने और पक्ष रखने के लिए अजय मल्होत्रा बतौर सीनियर सहायक, अनुज राय बतौर जूनियर सहायक , रजनीश बतौर क्लर्क और बूटा राम बतौर वकील सरकारी टाइम में मौजूद रहते हैं। लेकिन इसके बावजूद जरनैल सिंह वसर्स एलआईटी एलडीपी से संबंधित मामले में हाईकोर्ट में लोकल बॉडी सेक्रेटरी तक की पेशी पड़ गई थी और जज साहब के कडे़ रवैये को ठंडा करने के लिए एकाएक सीनियर एडवोकेट अनमोल रत्न सिद्धू को नियुक्त कर इस मामले में ट्रस्ट ने अपना पक्ष रख जान छुड़ाई थी । इसके बाद मौजूदा डीसी साक्षी साहनी की अगुवाई में इस प्लॉट की अलॉटमेंट की गई थी । जिसके दो दिन पहले ट्रस्ट ने अलॉटमेंट लैटर भी जारी कर दिया। ऐसे में एक बात जरुर है कि या तो ट्रस्ट की मौजूदा वकील अपना बेहतर परफोरमेंस नहीं दे पा रही या फिर इन केसों में कोई बड़ी लापरवाही या सांठगांठ का खेल ट्रस्ट पर भारी पड़ रहा है।
The-Legal-Branch-Of-Improvement-Trust-Is-In-The-News-The-Number-Of-Losing-Cases-Has-Increased