September 17, 2026 12:37:29
सीईटीपी चलाने को लेकर दायर अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई कल, केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने भी उठाए कईं

सीईटीपी चलाने को लेकर दायर अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई कल, केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने भी उठाए कईं सवाल

- सीईटीपी निर्माण व इसके चालू होने के बावजूद घिरती दिख रही लुधियाना की डाइंग इंडस्ट्री

Jul21,2025 | Desk | Ludhiana

यशपाल शर्मा, लुधियाना

बुडढ़ा नाला में बढ़ते प्रदूषण को रोकने को लेकर लुधियाना की डाइंग इंडस्ट्री की ओर से शुरु किए सीईटीपीज के बावजूद लुधियाना की होजरी व डाइंग इंडस्ट्री पर कार्रवाई की तलवार लगातार मंडराती दिखाई दे रही है। आपको बता दें कि इन तीनों सीईटीपी को चलाने को लेकर दायर तीनों अवमानना याचिकाओं पर कल कोर्ट में सुनवाई की जानी है। ये याचिकाएं पब्लिक एक्शन कमेटी मत्तेवाड़ा की ओर से दायर की गई हैं।  नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की ओर से 4 नवंबर 2024 को ये आदेश जारी किया था कि डाइंग इंडस्ट्री के ट्रीटेड पानी को भी बुडढ़ा दरिया में नहीं छोड़ा जाए। लेकिन इसके बावजूद तीनों सीईटीपी को चलाए जाने पर सीईटीपी प्रबंधन व पीपीसीबी अफसरों के खिलाफ कोर्ट के आदेशों की पालना न करने पर अदालत में अवमानना याचिका दायर कर दी थी। इतना ही नहीं इस पूरे मामले में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय भी अब सख्त रवैया अपनाता दिखाई दे रहा है। भारत सरकार के पर्यावरण मंत्रालय ने 40 और 50 एमएलडी क्षमता वाले इन बड़े सीईटीपी को एक लंबा कारण बताओ नोटिस जारी कर चुका हैं। जिसमें कईं नए और बेहद गंभीर सवालों पर जबाव मांगा गया है। पर्यावरण मंत्रालय की ओर से कुल 17 बिंदुओं पर सवाल खडे़ किए हैं और इसके लिए डाइंग एसोसिएशनों को एक महीना का समय भी दिया गया था। लेकिन ऐसा न करने की सूरत में कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई हैं। वहीं बात करें दूसरी लुधियाना की डाइंग इंडस्ट्री लगातार अपने पक्ष में साफ करती रही है कि सीईटीपी से ट्रीटेड डिस्चार्ज खेतीबाड़ी के लिए इस्तेमाल हो सके, इसके लिए चैनल का निर्माण पंजाब सरकार व पीपीसीबी के सहयोग से किया जाना था, जो उनकी ओर से नहीं किया गया। लेकिन अब इस पूरे मामले की गाज इंडस्ट्री पर गिराई जा रही है, जबकि डाइंग इंडस्ट्री मालिक करोड़ों रुपए अपनी जेब से खर्च कर चुके हैं। 


केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की ओर से जारी नोटिस में पूछे गए सवाल में कुछ अहम बिंदु ये हैं।


1) 2013 में दी गई पर्यावरणीय मंज़ूरी में एक विशिष्ट शर्त थी कि उपचारित पानी बुड्ढा नदी में नहीं छोड़ा जाएगा, जिसका उल्लंघन किया गया है।


2) परियोजना प्रस्तावक (डाइंग मालिकों का एक समूह) ने पंजाब प्रदूषण बोर्ड द्वारा जारी स्थापना सहमति पत्र की प्रति उपलब्ध नहीं कराई।


3) किसानों को पानी के बारे में पर्याप्त जानकारी देने के लिए कोई रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई कि यह डाइंग उद्योग का इस्तेमाल किया जाने वाला पानी है।


4) परियोजना प्रस्तावक ने पर्यावरण प्रबंधन रिपोर्ट साझा नहीं की।


5)  ग्रीन बेल्ट बना पेड़ लगाने के लिए कुछ नहीं किया गया।


6) पर्यावरण प्रबंधन योजना के बिंदुओं पर अमल नहीं किया गया।


7) छह महीने के भीतर प्रस्तुत की जाने वाली रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई।


8) पर्यावरण मंत्रालयों को सूचित किए बिना 40 और 50 एमएलडी के संयंत्र स्थापित किए गए।


9) इन्हें चालू रखने की सहमति पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अस्वीकार कर दी है, इसके अलावा पाँच अन्य विभागों की स्वीकृति ली जानी थी, जो नहीं ली गई।


10) सीईटीपी के संचालन का डेटा वेबसाइट पर लगातार अपलोड किया जाना था, जो नहीं किया गया।




Hearing-On-Contempt-Petitions-Filed-Regarding-Running-Of-Cetp-Tomorrow-Union-Environment-Ministry-Also-Raised-Many-Questions



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