पूरे पंजाब में दिग्गज कंपनी के तौर पर पहचान बनाने वाली लुधियाना की SEL TEXTILES LIMITED कंपनी की ओर से करीब सात साल पहले बैंकों के साथ् किए गए 1530 करोड़ रुपए के फ्रॉड मामले में इंफ्रोर्समेंट डायरेक्टोरेट ( ईडी ) ने बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए उक्त लार्ज इंडस्ट्री से जुड़ी करीब 828 करोड़ की प्रॉपर्टीज व मशीनरी को सीज कर केस में अटैच कर लिया है। अटैच की गई कुछ संपत्तियों में अलवर, हिसार, श्री मुक्तसर साहिब, शहीद भगत सिंह नगर (नवांशहर) और लुधियाना स्थित मैसर्स एसईएल टेक्सटाइल्स लिमिटेड की जमीन बिल्डिंग और मशीनरी शामिल हैं। साल 2020 में सेंट्रल बैंक की ओर से मेसर्स एसईएल टेक्सटाइल्स लिमिटेड के खिलाफ 1530 करोड़ रुपए के गबन की एफआईआर सीबीआई में दर्ज करवाई थी। इसके बाद ईडी की ओर से इस एफआईआर के ही बेस पर मनी लॉड्रिंग एक्ट 2002 के तहत अपनी जांच शुरु की थी। उक्त कंपनी के डायरेक्टर्स पर करोड़ों रुपए के लोन के गबन का आरोप है। ईडी द्वारा की गई जांच से पता चला है कि मैसर्स एसईएल टेक्सटाइल्स लिमिटेड और उसके डायरेक्टर्स ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले बैंकों के कंसोर्टियम से ली गई ऋण राशि को धोखाधड़ी से विभिन्न कार्यप्रणाली का उपयोग करके शर्तों के उल्लंघन कर सहायक कंपनियों में इंवेस्टमेंट की और इसका लोन का डायवर्जन गलत ओर कर दिया। जिसके बाद प्राप्त ऋण की शर्तें; माल और सेवाओं की खरीद के बहाने संबंधित पार्टियों को किए गए अग्रिम भुगतान जो कभी भी वास्तविक नहीं थे। इसके अलावा लोन के व्यक्तिगत उपयोग के लिए रिहायशी व इंडस्ट्रियल प्रॉपर्टीज व संपत्ति खरीदना; बिचौलियों के माध्यम से मशीनरी के आयात के एवज में किए गए भुगतान, जिसके लिए आयात 10 साल से अधिक बीत जाने के बाद भी लंबित है और निर्यात आय की वसूली नहीं हुई है। इस पूरे मामले की जांच चल रही है और बैंकों के फंड की रिकवरी को ही उनसे संबंधित प्रॉपर्टीज को अटैच किया गया है। गौर हो कि इस कंपनी के एमडी नीरज सलूजा इस मामले में पटियाला जेल में बंद हैं और उनके मामले में हाईकोर्ट में केस भी चल रहा है। इस मामले में दो दिन पहले ही हाईकोर्ट में बहस भी हुई है, जिसका फैसला कोर्ट ने रिजर्व रखा है।
Ed Attaches Property And Machinery Worth Rs 828 Crore In 1530 Crore Bank Fraud Case Of Sel Textiles