लुधियाना के डीसी वरिंदर कुमार को बदल प्रमोटी आईएएस अमरपाल सिंह लुधियाना के डिप्टी कमिश्नर लगाने की चर्चाएं तेज हो गई है । चर्चा है कि कि लुधियाना इंप्रूवमेंट ट्रस्ट की ओर से करवाई गई मॉडल टाउन एक्सटेंशन की 3.79 एकड जमीन की ई-ऑक्शन में उनकी रिपोर्ट इस तबादले का बड़ा कारण बताई जा रही है । वरिंदर शर्मा की ओर से ही इंप्रूवमेंट की ओर से करवाई 3.79 एकड़ जमीन पर उनसे डीसी रेट रिजर्व ना करवाये जाने की रिपोर्ट के चलते ही सरकार को यह ई-ऑक्शन रद्द करनी पड़ी थी। हालांकि इस दौरान विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के नेताओं की ओर से इस ई-ऑक्शन में 250 से 350 करोड़ के घोटाले के आरोप चेयरमैन सहित कई नेताओं पर जड़े थे । सूत्र बताते हैं कि लुधियाना के कैबिनेट मंत्री भारत भूषण आशू भी डीसी की कारगुजारी से अधिक खुश नहीं है और ओर उनकी ओर से भी लुधियाना में आए पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के समक्ष उनकी ट्रांसफर का मुद्दा उठाया गया था, लेकिन तब चन्नी की और से डीसी का पक्ष ले लिया गया था। कहा जा रहा कि इसी के चलते लुधियाना में हुई पहली कैबिनेट बैठक के बाद कैबिनेट मंत्री और उनके नजदीकी सीएम चन्नी की सर्कट हाउस में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पहुंचे और इसके बाद एक निजी रिसोर्ट में हुई प्रोग्रेसिव पंजाब समिट में भी न शामिल हो अपनी नाराजगी को जाहिर कर दिया था। बड़ी बात है कि जहां एक तरफ पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी चरणजीत सिंह चन्नी की ओर से भ्रष्टाचार को खत्म करने का दावा किया जाता रहा है वहीं दूसरी ओर अभी तक इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के जिन अफसरों जिन अफसरों अफसरों के जिन अफसरों जिन अफसरों अफसरों की ओर से 3.79 एकड़ जमीन की ई-ऑक्शन में अगर किसी अफसर की मिलीभगत से कोई बडी धांधली को अंजाम देने की कोशिश की जा रही थी तो उन अफसरों पर अभी तो कोई कार्रवाई सरकार की ओर क्यों नहीं की और इसके उलट ईमानदारी का सबूत देने वाले लुधियाना के डीसी को शहर से से चलता करने की कोशिश क्यों की जा रही है। ------ प्रमोटी आईएएस को लुधियाना का डीसी लगाना बन सकता है बड़ा मुद्दा, रहे हैं बादल के नजदीकी इस पूरे मामले का दूसरा पहलू यह है कि लुधियाना में जिस आईएएस अधिकारी अधिकारी को डिप्टी कमिश्नर का चार्ज देने का नाम चर्चा में चल रहा है, वह पीसीएस प्रमोटी अमरपाल सिंह (मौजूदा स्टेट ट्रांसपोर्ट कमिश्नर) हैं । यह पहली बार होगा कि किसी प्रमोटी आईएएस को लुधियाना के डिप्टी कमिश्नर का चार्ज दिया जा रहा हो। साल 2017 में अमरपाल सिंह को पीसीएस से प्रमोट प्रमोट कर आईएएस बनाया गया था और उन्हें यह नौकरी भी तरस के आधार पर उनके पिता जो सिविल सर्जन थे, की मौत के चलते दी गई थी। प्रमोटी आईएएस होने के चलते ही होने के चलते ही अभी तक उन्हें किसी छोटे शहर तक का डिप्टी कमिश्नर नहीं लगाया गया, लेकिन उनकी कैबिनेट मंत्री भारत भूषण आशू के साथ नजदीकी के चलते उन्हें लुधियाना के डीसी ( जिस पर अब तक तक कई सीनियर आईएएस अधिकारी ही चार्ज अधिकारी ही चार्ज चार्ज संभालते रहे हैं ) का चार्ज दिए जाने की चर्चाओं से लुधियाना की राजनीति गर्म है। बड़ी बात है कि आईएएस अधिकारी अमरपाल सिंह कि बादलों से नजदीकी भी जग जाहिर है अकाली भाजपा कार्यकाल में हुए आयरन ओर (iron ore) घोटाले में अमरपाल सिंह (जो कि उस समय पीसीएस अधिकारी थे) का नाम जुड़ा था लेकिन तब उनकी बादलों के साथ नजदीकी के चलते उन्हें इस घोटाले से बचा लिया गया था और एक आईएएस अधिकारी पर इसकी गाज गिरा दी गई थी। हालांकि लुधियाना में अभी तक कोई भी सरकार हिंदू और सिख वोट बैंक के धयान में रख लुधियाना में डीसी और पुलिस कमिश्नर की नियुक्ति में बैलेंस बनाकर चलती रही है । इसी के चलते लुधियाना में हिंदू डीसी या सिख पुलिस कमिश्नर के लिहाज से नियुक्ति की जाती रही है, लेकिन अब अगर इन दोनों पदों पर जट सिख की नियुक्ति हो जाती है तो आगामी विधानसभा चुनाव में भी पंजाब सरकार को इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसके साथ साथ राजनीतिक दिन जो इलेक्शन कोड के साथ शुरू होने वाले हैं और उस दौरान भी एक प्रमोटी आईएएस को लुधियाना के डीसी की बागडोर थमाना किसी भी सरकार की मुश्किलों में इजाफा कर सकता है। वही पनसप में बतौर एमडी रहे अमरपाल सिंह की कैबिनेट मंत्री भारत भूषण आशू के साथ नजदीकी नजदीकी भी दूसरी राजनीतिक पार्टियों के लिए इलेक्शन के दिनों में बड़ा मुद्दा बना सकती है।
Discussions Intensified To Replace Ludhiana Dc Varinder Kumar