गर्मियों की शुरुआत के साथ जहां तापमान में रोजाना बढ़ोतरी हो रही है वहीं दूसरी ओर पंजाब के लोगों के लिए बिजली संकट की स्थिति बनती दिखाई दे रही है इसका बड़ा कारण है कि थर्मल प्लांटों में कोयले की शॉर्टेज। बात करें पंजाब में बिजली उत्पादन करने वाले थर्मल प्लांटों की तो इनमें 5 थर्मल प्लांट सबसे अहम है जो पंजाब की बिजली की मांग को पूरा करने में सक्षम है। मेगावाट में क्षमता रखने वाले इन थर्मल प्लांट में रोपड़ थर्मल प्लांट( 840) mw गोविंद वाल साहिब थर्मल प्लांट (540) mw, राजपुरा थर्मल प्लांट (1400) mw,, तलवंडी साबो थर्मल प्लांट (1980) mw, लहरा मोहब्बत थर्मल प्लांट (1925) mw सबसे बड़े प्लांट हैं। बात करें सरकारी थर्मल प्लांट की तो इनमें अभी 20 दिन का कोयला बाकी है जबकि प्राइवेट थर्मल प्लांट में कोयले की हालत अधिक पतली दिखाई दे रही है। जहां पर 3 से लेकर 6 दिन का ही कोयला थर्मल प्लांटों में उपलब्ध है। पिछले 1 महीने में कोयले के दामों में करीब 300 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी हुई है, जिसके कारण प्राइवेट थर्मल प्लांट कोयले की खरीद करने में उलझती दिखाई दे रही है। यही कारण है कि इनमें कोयले की शॉर्टेज अब गंभीर स्थिति में पहुंचता दिखाई दे रहा है। अगर जल्द इनमें कोयले की खरीद नहीं की जाती तो इन थर्मल प्लांटों को बंद करने की नौबत आ सकती है। जिसके कारण इंडस्ट्री और आम पब्लिक को बिजली कट भी झेलने पड़ सकते हैं। इतना ही नहीं पंजाब में बिजली संकट बढ़ने का दूसरा बड़ा कारण गर्मियों के दिनों में बिजली की डिमांड बढ़ना रहता है और अभी गर्मियों की शुरुआत में ही अगर कोयले के संकट की स्थिति बनती दिखाई दे रही है तो मई-जून में इस बार अधिक स्थिति खराब होने के भी कयास अभी से लगाए जा रहे हैं। इस बारे पंजाब के बिजली मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ का कहना है कि इसमें कोई शक नहीं कि पंजाब में के थर्मल प्लांटों में कोयले की शॉर्टेज है और उनकी ओर से एक टीम झारखंड भेजी गई है ताकि कोयले की जल्द से जल्द खरीद कर बिजली उत्पादन को सुनिश्चित रखा जाए।
Coal Shortage In Power Thermal Plants In Punjab