यशपाल शर्मा, लुधियाना प्लॉट अलॉटमैंट के घपले में पंजाब विजीलैंस ब्यूरो द्वारा गिरफ्तार किए गए अमृतसर इम्प्रूवमैंट ट्रस्ट के पूर्व चेयरमैन दिनेश बस्सी की नियुक्ति दौरान पद का दुरुपयोग करने संबंधी शुरु हुई जांच के दौरान करोड़ों रुपए का घोटाला सामने आने की बात कहीं जा रही हैं। केवल प्लाटों की अलॉटमेंट ही नहीं, ब्लकि 300 से 400 करोड़ के टेंडरों की अलॉटमेंट भी बढ़ी अनियमितताएं सामने आईं हैं। इसके अलावा, अलॉट किए गए वेरका मिल्क बूथों, अलग-अलग व्यक्तियों को जारी किए गए कमर्शियल/ रिहायशी प्लॉट और ट्रस्ट कार्यालय में से अलग-अलग प्लॉटों की गुम हुई फाइलें आदि बारे नगर सुधार ट्रस्ट अमृतसर के अधिकारियों/ कर्मचारियों की मिलीभगत होने संबंधी विजिलैंस को सबूत मिले हैं, जिस संबंध में और गहन जांच जारी है। प्रवक्ता के मुताबिक बस्सी ने अलग-अलग कमर्शियल/ रिहायशी प्लॉटों को नियमों के विरुद्ध जाकर गैर कानूनी ढंग से अपने करीबियों को अलॉट करके अपने पद का अनुचित लाभ लिया है, जिसमें कमर्शियल प्लॉट एस.सी.ओ. नंबर 79, 80, 81 ड्रिस्ट्रिक शॉपिंग कॉम्पलैक्स और रिहायशी प्लॉट नंबर ई-88, ई-317, रणजीत एवैन्यू अमृतसर में हैं। इसके अलावा ड्रिस्ट्रिक्ट शॉपिंग कॉम्पलैक्स रणजीत एवैन्यू अमृतसर में कॉमर्शियल प्लॉट नंबर 135-136 के निर्माण को सरकार के नियमों के उलट जाकर ग़ैर कानूनी तरीके से करवाया है। बस्सी की ओर से विजिलेंस के समक्ष किए जा रहे नए नए खुलासों के बाद आज कोर्ट ने उनके रिमांड का पीरियड़ दो दिन ओर बढ़ा दिया। भले ही आज पुलिस रिमांड बस्सी का दो दिन बढ़ा, लेकिन लुधियाना के कईं कांग्रेसी नेताओं के भी हाथ पैर फूलने लगे हैं। लुधियाना में कईं कांग्रेसी नेता हैं, जो दिनेश बस्सी के काफी करीबी हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि अगले कुछ ही समय में स्टेट विजिलेंस लुधियाना ट्रस्ट में भी दबिश दे सकती है और जिस लिहाज से अमृतसर के पूर्व चेयरमैन दिनेश बस्सी अपने घोटाले की परतें खोलते जा रहे हैं, उस लिहाज से लुधियाना में भी बड़ा कुछ सामने आ सकता है। -------- लुधियाना इंप्रूवमेंट ट्रस्ट भी चीफ विजिलेंस की जांच के दायरे में, अफसरों की बढ़ी मुश्किलें इंंप्रूवमेंट ट्रस्ट के पूर्व चेयरमेन रमण बाला सुब्रामनियम के कार्यकाल दौरान हुई अनियमिताओं को लेकर पंजाब में कांग्रेस की सरकार बदलते ही लोकल गर्वमेंट के मुख्य जांच अफसर व चीफ विजिलेंस आफिसर राजीव सेकेड़ी की ओर से दबिश दी गई थी। सीवीओ टीम को प्राप्त हुई डेढ़ दर्जन भर के करीब शिकायतों की जांच को रिकार्ड लेने ये टीम लुधियाना ट्रस्ट का रिकार्ड खंगाल रही है। इनमें से अधिककतर शिकायतें ट्रस्ट के सेल्स ब्रांच से संबंधित थे और इसके अलावा कुछ घटिया सड़क निर्माण को लेकर भी उक्त टीम ने इंजीनियरिंग विंग से भी कुछ दस्तावेज मांगे हैं। इस टीम ने आज अहम तौर पर पूर्व चेयरमैन रमण बाला सुब्रमानियम की प्राइवेट लैंड में बनी कोठी के साथ कब्जाई गई सरकारी जमीन मामले में ट्रस्ट में स्टाफ से पूछताछ की गई। इसके अलावा ऋषि नगर में करीब 250 करोड़ रुपए कीमत की पॉश साढे़ तीन एकड़ जमीन पर एलडीपी प्लॉट में हुई बड़े घोटालें संबंधी भी सीवीओ ने रिकार्ड मांगा है। इसके साथ कईं अन्य एलडीपी प्लाटों व ई आक्शन में बेची गई प्रॉपटियों के मामला संबंधी भी उक्त टीम ने ईओ कुलजीत कौर व स्टाफ से पूछताछ की।इसके साथ साथ उक्त टीम ने पूर्व चेयरमैन के कार्यकाल में हुई रजिस्ट्री एग्रीमेंट संंबंधी भी कईं फाइलें अपने कब्जे में ली हैं। इसके अलावा उक्त टीम ने पक्खोवाल रोड के निर्माण मेें घटिया मैटीरियल इस्तेमाल, माडल टाउन गोल मार्केट पार्क के एस्टीमेट व खर्च का भी ब्यौरा मांगा है। ------ पूर्व चेयरमैन रमण बाला सुब्रमानियम की कोठी के साथ कब्जाए पार्क में उलझा ट्रस्ट बात करें इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के एक्स चेयरमैन रमण बाला सुब्रामानियम की ओर से बीआरएस नगर एल ब्लॉक के साथ प्राइवेट लैंड में बनाई अपनी कोठी के साथ सरकारी जमीन को पार्क की शक्ल में कब्जाने का मामला आज सीवीओ जांच का हॉट केस रहा। बताया जाता है कि इस जमीन को पूर्व चेयरमैन की कोठी के साथ जो़ड़ने के लिए एक एसडीओ ने पूरी सरकारी प्लानिंग को ही बदल डाला और जिस लिहाज से रमण बाला सुब्रामनियम को फायदा दिया जा सकता, उस लिहाज से इसका ले आउट तैयार कर पार्क तैयार कर दिया गया और पार्क पर गेट लगा इस आउट साइडर के लिए लॉक कर दिया गया। इस सरकारी पार्क में अब कोठी मालिक अपनी कारें पार्क करते हैं और दिखावे को ट्रस्ट अफसरों ने इस पार्क में से चेयरमैन के घर का जनरेटर उठवा आई वाॅश का काम जरुर किया है। सीवीओ ने इस पूरी पार्क को व इसके आसपास की गई ब्यूटीफिकेशन में खर्च हुए सरकारी फंड का भी लेखा जोखा मांगा था, लेकिन जानकारी मुताबिक ट्रस्ट अफसर ये रिकार्ड देने में कतरा रहे हैं। ऋषि नगर 250 करोड़ की जमीन में एलडीपी देने का विवाद गर्माया सीवीओ की जांच में ऋषि नगर वाई ब्लॉक के साथ 100 फुटी रोड पर करीब 250 करोड़ कीमत की करीब साढे़ तीन एकड़ जमीन पर नियमों को ताक में रख दिए गए एलडीपी प्लॉट का मामले को लेकर चंडीगढ़ से जबाव पूछे जा रहे हैं। लेकिन अंदरखाते इसकी फाइल भी दबाने की कोशिश की जा रही है। जांच टीम को सेल ब्रांच का कहना था कि अन्य स्कीम में प्लॉट न होने की सूरत में इस जमीन पर प्लॉट दिए गए हैं, लेकिन दूसरी स्कीम की एलडीपी यहां देने में बांटे गए लाखों रुपए व एलडीपी होल्डर्स को दिए गए करोड़ों रुपए के फायदे का खेल साफ दिखाई दे रहा है। ट्रस्ट के तत्कालीन चेयरमैन की मिलीभगत से इस पॉश जमीन में अपने चहेतों को ये करोड़ों की कीमत के प्लाट मोटी रिश्वत लेकर आलॉट कर दिए गए। जबकि शहीद भगत सिंह नगर व ट्रांसपोर्ट नगर में 500 गज या इससे छोटे 300 -400 गज के प्लॉट उपलब्ध न होने के बावजूद करोड़ों रुपए की सरकारी जमीन में बड़ा घोटाला कर दिया गया। ट्रस्ट अफसरों का कहना था कि इस स्पेशल पर्पज जमीन के लिए उनकी ओर से सरकार से इस स्कीम में अमेंडमेंट करवा इसमें 500 गज के प्लाट काटने की मंजूरी ली थी, लेकिन बड़ी बात है कि इस मंजूरी में ये कहीं नहीं था कि इस जमीन पर एलडीपी प्लॉट दिए जाएंगे।
Two Days Remand Extended To Dinesh Bassi But Many Congressmen In Tension