नगर निगम ए जोन में आज शहर के विभिन्न हिस्सों में पार्किंग ठेकों की ई आक्शन में हाईप्रोफाइल ड्रामा देखने को मिला। जिसमें बीआरएस नगर मार्केट, किप्स मार्केट, माडल टाउन मार्केट व भदौड़ हाउस की पार्किंग साइट शामिल थी। इस पूरे ड्रामे के पीछे एक आप विधायक, एक जोनल कमिश्नर व एक ठेकेदार की पूरी प्लानिंग थी, लेकिन ये कामयाब नहीं हो पाई और आज होने वाली चार ई आक्शन को रदद कर दिया गया। हुआ यूं कि आज नगर निगम ए जोन में चार पार्किंग साइट की ई आक्शन होनी थी। जिसमें करीब पांच ठेकेदारों व तीन सोसाइटियों की ओर से हिस्सा लिया जाना था। लेकिन सोसायटी के अलावा इस आक्शन में हिस्सा लेने वाले पांच कांट्रेक्टरों को सुबह 10.45 बजे मोबाइल पर मैसेज आया कि उन्हें इस ई आक्शन से डिस क्वालिफाई किया जाता है और इसका कारण ई आक्शन में तीन कोप्रेटिव सोसाइटी का होना बताया गया। सरकार के नियमों मुताबिक 60 लाख से नीचे के कामों में पहली प्रमुखता काेप्रेटिव सोसायटी को देनी बनती है। बस इसी मैसेज के बाद पूरा हाईप्रोफाइल ड्रामा शुरु हुआ। इस ई आक्शन दीपक मदान कंपनी, गोर्जियस इंटरप्राइसिस, द्रविड सिक्योरिटी, नीरज जोशी व इंद्र ट्रेडिंग कंपनी नाम के पांच कांट्रेक्टर हिस्सा ले रहे थे और इन सभी को कोप्रेटिव सोसायटी के चलते डिस क्वालिफाई कर दिया गया। उधर दूसरी सभी चार साइट में तीन तीन कापेरेटिव सोसाइटी होने के चलते ई आक्शन भी आरंभ हो गई। वहीं दूसरी ओर से डिस क्वालीफाई ठेकेदारों ने पहले राजनीतिक दबाव बनाना चाहा, तो पता चला कि इन सोसायटी के लिए एक आम आदमी पार्टी का विधायक इंट्रेस्टेड हैं और वे अपने ठेकेदार को ये काम दिलाना चाहता है। जिसके बाद डिस क्वालिफाई ठेकेदारों ने अपनी टेक्नीकल पड़ताल आरंभ की और पता लगाया कि क्या ये कोपेरेटिव सोसाईटी पार्किंग ठेके में हिस्सा ले सकती हैं तो किसी ने बताया कि ये लेबर के जरिए सोसाइटी बनती हैं। ऐसे में शायद ये पार्किंग नीलामी में नहीं हिस्सा ले सकती। जिसके बाद इस बात को लेकर हंगामा खड़ा होता चला गया और नगर निगम ने करीब पाैने एक बजे एकाएक सभी ई आक्शन सस्पेंड कर दी। टेंडर की शर्ताे में ये मजेदार बात भी देखने को मिली कि जहां पहले बैंक गारंटी के तौर पर दस परसेंट आफ द बिड अमाउंट ली जाती थी, लेकिन इस बार ये शर्त कांट्रेक्टरों के लिए बेहद भारी कर दी गई। जिसमें बैंक गारंटी को बिड अमाउंट के बराबर कर दिया गया। बताया जाता है कि इसमें भी एक जोनल कमिश्नर स्तर के अफसर की मिलीभगत थी, जबकि कापेरेटिव सोसाइटी के लिए बैंक गारंटी की कोई शर्त तक नहीं थी। इससे साफ है कि नगर निगम के अफसर चाहते थे कि ये काम सोसाइटी वाले ठेकेदार को ही मिले। बताया जाता है कि ये कोपरेटिव सोसाइटी सिस्टम के जरिए सभी पार्किंग पर कब्जा करने की ये पूरी योजना आज से पांच साल पहले पार्किंग ठेकेदारों का किंग कहे जाने वाला ठेकेदार की ओर से ही रची जा रही थी।
High Profile Drama In E Auction Of Parking Contract In Mc