फूड एंड सप्लाई डिपार्टमेंट में करोड़ों रुपए का ट्रांसपोर्ट टेंडर घोटाला मामले में विजिलेंस की ओर से एफआईआर दर्ज कर एक्स मंत्री भारत भूषण आशू की गिरफ्तारी के बाद उनके नज़दीकियों की मुश्किलें बढ़ती दिखाई दे रही हैं । खासकर लुधियाना के मेयर बलकार सिंह संधू जिन्हें मेयर बनवाने में भारत भूषण आशू की अहम भूमिका जगजाहिर है। यही कारण है कि वे आशू के हमेशा से यस बॉस रहे हैं। इन्हीं कारणों से विजिलेंस की ओर से अब मेयर बलकार सिंह से उनकी और उनके परिवारिक सदस्यों की प्रॉपर्टी का ब्यौरा मांगा गया है जिसके लिए उन्हें कल यानि सोमवार को विजिलेंस ऑफिस पहुंचना था लेकिन वह नहीं पहुंचे। सूत्र बताते हैं इसका बड़ा कारण पिछले 3 सालों में उनके और उनके परिवार की और से खरीदी प्रॉपर्टी भी विजिलेंस ऑफिस तक न पहुंच पाने के कारणों में एक बड़ा कारण है, जिसका पूरा लेखा जोखा तैयार किया जा रहा है। बात करें लुधियाना नगर निगम की तो इसमें ठेकेदारों से ली जाने वाली कमीशन और बड़े कामों में होने वाली सेटिंग हमेशा से एक बहुत बड़ा मुद्दा बनता आया है। अगर नगर निगम में बलकार सिंह संधू के बतौर मेयर रहते मुद्दों की बात करें तो कई ऐसे मुद्दे हैं जो प्रिंट मीडिया में सुर्खियां बनते रहे हैं। जिनमें स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत होने वाले डेवलपमेंट प्रोजेक्ट में बड़ा घोटाला करने के राजनीतिक आरोप लगते रहे है। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में कांट्रेक्टर को टेंडर मिलने से लेकर इस पूरे प्रोजेक्ट में इस्तेमाल होने वाला मैटेरियल को लेकर चलने वाला रिश्वत का खेल आज तक किसी से छुपा नहीं है, लेकिन केवल सत्ता पक्ष के पावरफुल लोग ही सही मायनों में इसका फायदा उठा पाते हैं। लुधियाना नगर निगम में भी स्मार्ट सिटी के प्रोजेक्टो में भी टेंडर से लेकर इसमें इस्तेमाल किए जाने वाला मैटेरियल जिसमें अधिक मात्रा टाइलों की है, में कमीशन का बहुत बड़ा खेल रहता है और इसके लिए ठेकेदारों में भी बड़ा कंपटीशन देखा जाता है। लेकिन अगर काम किसी चहेते ठेकेदार को देना हो तो उसे कुछ पर्सेंट लेस पर ही टेंडर अलॉट कर दिया जाता है और यह पूरा खेल केवल सेटिंग के बलबूते अंजाम दिया जाता है। बलकार सिंह संधू के मेयर बनने के बाद से 100 करोड़ से अधिक के स्मार्ट सिटी के काम लगभग कंप्लीट हो चुके है और इस काम में बांटा गया कमीशन विजिलेंस की जांच का विषय भी बनेगा। इसके साथ-साथ नगर निगम में सड़कों के टेंडरों में भी कमीशन का बड़ा खेल खेले जाने के आरोप यहीं पर टेंडर डालने वाले कुछ ठेकेदारों की ओर से मेयर बलकार सिंह सहित पूर्व मंत्री आशु पर लगाए गए थे। शहर में चर्चा है कि पूर्व मंत्री के किसी नजदीकी नेता की ओर से जहां साउथ सिटी में 2 एकड़ के करीब जमीन और 30 एकड़ के करीब जमीन होशियारपुर में खरीदी गई है और उक्त नेता की ओर से भी विजिलेंस में जाने से पहले अपना लेन देन का रिकॉर्ड दुरुस्त किया जा रहा है । ------- लुधियाना की बिल्डिंग ब्रांच में करोड़ों की ठगी का खेल नगर निगम के साथ करोड़ों रुपए की ठगी की बात करें तो यह ठगी नगर निगम की बिल्डिंग शाखा के जरिए अंजाम दी गई है।अगर पिछले 4 सालों में शहर में बनी बड़ी कमर्शियल बिल्डिंग का ब्यौरा जुटाया जाए तो इसमें 100 करोड़ से भी अधिक बड़ी ठगी का खेल सामने आ सकता है। यह पूरा खेल सत्ता पक्ष और तत्कालीन नगर निगम कमिश्नर की मिलीभगत के साथ खेला गया है। भले ही नगर निगम के खाते में यह करोड़ों रुपया ना आया हो लेकिन बिल्डिंग बनवाने वाले की जेब से करोड़ों रुपया निकल कर कई नेताओं, नगर निगम से जुड़े अफसरों की जेबों में जरूर गया है। बड़ी बात है कि लुधियाना नगर निगम की बिल्डिंग ब्रांच में पूर्व मंत्री भारत भूषण आशू और उनकी पत्नी ममता आशु का पूरा सिक्का चलता था और यही कारण है कि बहुत से कमर्शियल बिल्डिंग बनवाने वाले सीधा नगर निगम जाने की बजाए आशु के नज़दीकियों से ही संपर्क साधते थे। इतना ही नहीं खुद कैबिनेट मंत्री भारत भूषण आशू की पत्नी भी बिल्डिंग ब्रांच से काम करवाने के लिए सीधे अफसरों से संपर्क में रहती थी। इन कामों को करवाने में कोई रिश्वत ली गई या उस सेटिंग की गई यह भी आगे चलकर विजिलेंस की जांच का केंद्र बन सकता है। वहीं नगर निगम में तहबाजारी एक ऐसी ब्रांच है जिसमें हर महीने करोड़ों रुपया नगर निगम की हद के भीतर रेहड़ी फड़ी, मंडी वालों से कच्चे और पक्के में सुपरीटेंडेंट से लेकर और ग्राउंड पर उतरने वाले इंस्पेक्टर और सेवादारों की और से इकट्ठा किया जाता है। जानकार बताते हैं कि जोन वाइज उन्ही सुपरिटेंडेंट और इंस्पेक्टरों की ड्यूटी फील्ड में लगाई जाती थी जो मेयर और उनके आलाकमान की गुड बुक में हो। ऐसा स्टाफ ही फील्ड से रिकवरी करके लाता था, इसमें कितनी रिकवरी नगर निगम के खाते में गई और कितनी आशीर्वाद रखने वाले नेताओं की जेब में गई, यह भी आगे चलकर विजिलेंस की जांच का केंद्र रह सकता है। ---------- पार्किंग और आउट सोर्सिंग का टेंडर अक्सर रहा चर्चा में नगर निगम की ओर से शहर में कई पार्किंग साइटें हर साल ठेके पर दी जाती हैं और इसके साथ-साथ एक बड़ा टेंडर जिसमें नगर निगम में आउट सोर्स के जरिए मैन पावर उपलब्ध करवाई जाती है, के टेंडर के साथ भी मेयर बलकार सिंह संधू का नाम जुड़ता रहा है । ये आम आदमी में चर्चा का विषय रहा है कि मेयर की ओर से यह टेंडर अपने खासम खास लोगों को दिए गए हैं। कई बार तो यह बातें भी सामने आई है कि कहने को यह टेंडर उनके खासमखास के पास है लेकिन पीछे से इन्हें कोई और ही चला रहा है। आगे चलकर यह मामला भी अगर विजिलेंस की जांच में आता है तो इसमें भी कई तरह की परतें खुल सकती हैं।
Mayor Balkar Singh Sandu On Vigilance Radar