यशपाल शर्मा, लुधियाना इंप्रूवमेंट ट्रस्ट में घोटालों के आरोपों में फंसे कांग्रेसी नेता व पूर्व चेयरमैन रमण बाला सुब्रामनियम की इंद्र नगर में बनी कोठी पर आज विजिलेंस ब्यूरो की टीम करीब दो घंटे से डेरा जमाए हुए है। जानकारी मुताबिक विजिलेंस की ये टेक्नीकल टीम मोहाली से आई हुई है और ये टीम इंच टैप लेकर घर के हर एक कोने की पैमाइश कर रही है। बताया जाता है कि इस टीम की ओर से पैमाइश कर कोठी की वेल्यूएशन कोर्ट में दी जानी है। बड़ी बात है कि रमण बाला सुब्रामनियम की कोठी के भी बडे़ किस्से सामने आते रहे हैं। करीब 300 से 400 गज में करोड़ों रुपए खर्च कर इस कोठी को रमण बाला सुब्रामनियम ने इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के चेयरमैन के पद पर रहते ही बनवाना शुरु किया और करीब दो साल के भीतर इस कोठी को तैयार कर लिया गया। इस कोठी को फाइव स्टार लुक देने को इसके साथ लगते इंप्रूवमेंट ट्रस्ट की ग्रीन बेल्ट पर भी कब्जा कर लिया गया और इस ग्रीन बेल्ट को पार्क की शेप देने को लाखों रुपए सरकारी खजाने से खर्च डाला गया। पार्क में ऐसी ग्रिल, मार्बल व गेट का इस्तेमाल किया गया, जिसका इस्तेमाल इंप्रूवमेंट ट्रस्ट ने आज किसी दूसरे पार्क को बनाने में खर्च नहीं किया। इतना ही नहीं इस कोठी की प्राइवेट जमीन से एंट्री है, इसलिए यहां पर सरकारी खर्च से चौराहा व लैंड स्केपिंग करवाई गई। मौके पर लगे खजूर के पेड़ जो सरकारी खर्च से लगाए गए हैं, ये अपने आप में सरकारी खजाने की बर्बादी काे दशार्ता है। विजिलेंस की टेक्नीकल टीम इस बात का आंकलन करेगी कि कोठी के निर्माण में कितने स्कवेयर फुट का खर्चा किया गया है और सामान खरीद के बिल बिल कितने के हैं। कोठी की डिजाइनिंग में महंगे आर्किटेक्ट व एसई की कमीशन की बातें भी चर्चा में बात अगर रमण बाला सुब्रामनियम के कार्यकाल में हुए घोटालों की हो रही है तो वाजिब है कि पूर्व चेयरमैन भी इसमें कहीं न कहीं इंवोल्व हुए होंगे। इस दौरान ये भी चर्चा उठी थी कि रमण बाला सुब्रामनियम की इस कोठी की डिजाइनिंग एक बडे़ आर्किटेक्ट के जरिए करवाई गई। इस आर्किटेक्ट के भी लुधियाना इंप्रूवमेंट ट्रस्ट से संबंध थे। बाद में ये भी चर्चा रही कि बाला सुब्रामनियम ने अपने चेयरमैन के लंबे कार्यकाल में एसई की कुर्सी खाली रखी और इस पर एक एक्सईन स्तर के अफसर को एडिशनल चार्ज दिला दिया। ये चर्चा रही कि इंप्रूवमेंट ट्रस्ट में करवाए गए करोड़ों रुपए के डेवलपमेंट वर्क की कमीशन जो एसई के साइन के नाम पर ली गई, वे चेयरमैन को दी जाती रही। ऐसे में इस कोठी को फाइव स्टार बनाने में एसई के हिस्से की लाखों रुपए कमीशन खर्च की गई। ----------- रिव्यू पटिशन डालने में उलझा विजिलेंस व्यूरो भले ही रमण बाला सुब्रामनियम हाईकोर्ट से मिली रिलीफ के चलते इंप्रूवमेंट ट्रस्ट घोटाला मामला में अभी बाहर चल रहे हैं, लेकिन अभी तक ट्रस्ट ने कोर्ट के इन आर्डरों को अमल में लाते हुए रमण को नोटिस नहीं किया है। विजिलेंस हाईकोर्ट के आदेशों के खिलाफ रिव्यू पटिशन डालने की तैयारी में जुटी है और इसकी तैयारी पिछले 15 दिनों से की जा रही है। कोर्ट में इस रिव्यू को दाखिल करने से पहले कईं तरह की कमी पेशियों को विजिलेंस दूर करने में जुटी है। जिसके चलते लगातार इसमें देरी होती चली जा रही है।
Vigilance Camp On Raman Bala Subramaniam Luxurious Kothi Built At The Cost Of Crores