यशपाल शर्मा, लुधियाना नए साल 2023 के आगमन से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी की ओर से जिला शहरी प्रधान के पद पर नए प्रधान के तौर पर रजनीश धीमान की नियुक्ति कर दी है। अब शहर की जनता और भाजपा के कार्यकर्ता यह नजर टिकाए हैं कि क्या अब धीमान की टीम में जिले की मजबूती को कार्यकारिणी में नए चेहरे लाए जाएंगे या फिर से वही पुराने चेहरे जो जिले की राजनीति के आसपास लंबे समय से एक छत्रराज करते आए हैं, क्या उन्हें फिर से अहम पदों की बागडोर संभाल दी जाएगी। बात करें भाजपा की तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पार्टी पार्टी का ग्राफ चरम पर ला खड़ा किया है और इसी का नतीजा है कि चुनाव में उम्मीदवार का मजबूत चेहरा ना होने के बावजूद वे अपनी सीट पर चुनाव जीतता है । लेकिन लुधियाना में यह चमत्कार किसी भी सीट पर देखने को नहीं मिला। इसका बड़ा कारण है कि लुधियाना में जिस स्तर पर पार्टी के पुराने चेहरों को बदलने की जरूरत है उस ओर अभी तक पार्टी या संगठन के किसी नेता ने काम तक नहीं किया। जिले की राजनीति पर कुछ पुराने नेताओं के चहेते ही कब्जा किए हुए हैं और यह नेता पार्टी में किसी नए चेहरे को आगे लाना नहीं चाहते। इसी का नतीजा है कि पार्टी इन्हीं नेताओं के हाथों की कठपुतली बनकर रह गई है। पार्टी के यही पुराने नेता किसी नए चेहरे को जिले की राजनीति में उभरने तक नहीं देते और इसी का नतीजा है कि जब जिले की नई कार्यकारिणी का गठन होना होता है तो पार्टी को नए चेहरे नहीं दिखते और फिर से वही पुराने चेहरे जिनको पब्लिक पूरी तरह से रिजेक्ट कर चुकी है, उन्हीं पर सफलता का दांव खेला जाता है। बात करें लुधियाना जिला कार्यकारिणी की तो इसमें जिला प्रधान के अलावा दो महासचिव पूरे जिले को चलाने का अहम रोल अदा करते हैं, लेकिन अगर पिछले 6- 8 सालों का रिकॉर्ड देखा जाए तो आला नेताओं के करीबी जिनका ग्राउंड में कोई बड़ा वोट बैंक तक नहीं है, उन्हें पार्टी की बागडोर थमा दी जाती है। बाद में फिर चाहे पार्षद चुनाव हो या विधानसभा चुनाव हो उसमें बड़ी सफलता अर्जित नहीं हो पाती। चर्चा तो अब भी यही है कि मौजूदा पार्टी के प्रदेश महासचिव जीवन गुप्ता अपने करीबी कातेंदू शर्मा को महासचिव के पद पर रिपीट करवाएंगे। यानी कांतेंदु शर्मा का महासचिव के पद पर आना तह माना जा रहा है। ----------------- पार्टी के लिए काम करने की बजाए, खींची जाती है टांगे बात करें जिला लुधियाना की कारगुजारी का तो विधानसभा चुनाव में शहरी और गठजोड़ कर लड़ी गई सभी सीटों पर भाजपा को हार का मुंह देखना पड़ा । इस हार के बाद जिला भाजपा पूरी तरह से लुधियाना जिले की राजनीति से ही गायब हो गई । बात करें इनके नेताओं की तो केवल कुर्सियों पर बैठकर बयानबाजी तक और प्रिंट मीडिया में फोटो लगवाने तक इनकी राजनीति सीमित होकर रह गई। प्रदेश की राजनीति पर कब्जा करने वाली आम आदमी पार्टी के नेताओं की ओर से कई मौके भाजपा नेताओं को दिए गए लेकिन कुछ एक नेताओं को छोड़ पार्टी की जिला कार्यकारिणी पूरी तरह से इन मौकों को भुनाने में फेल साबित हुई। देखने में यह बात भी सामने आई है कि संगठन को इस समय पार्टी के लिए काम करने वाले नेताओं की जरूरत है लेकिन पार्टी में हालात ऐसे बने हुए हैं की कोई दूसरा चेहरा या नेता तरक्की ना कर जाए इसको लेकर टांगे खींच कर या आला नेताओं के कान भर कर पार्टी को तरक्की की राह पर चलने से रोक रही है। पंजाब में भाजपा को मजबूत स्थिति में लाने के लिए इस समय संगठन के लिए बेहतर काम करने वालों की जरूरत तो है ही लेकिन जिनका पब्लिक में आधार हो या अच्छा वोट बैंक को ऐसे लोगों पर दांव खेलने की जरूरत है । इसमें कोई शक नहीं संगठन के लिए अच्छा काम करने वाला व्यक्ति अच्छा वोट बैंक भी साथ रखता हो, यह जरूरी नहीं है। लेकिन संगठन को तरक्की की राह पर पहुंचाना उसका अहम कर्तव्य है लेकिन वह इसको भी पूरा नहीं कर कर पाए तो सवाल उठना लाजमी है। --------- पार्षद चुनाव से पहले नए जिला प्रधान पर बड़ी जिम्मेदारी भाजपा की मौजूदा जिला राजनीति से जुड़े एक्टिव नेता फिर से पुष्पेंद्र सिंगल को रिपीट कर उन्हें जिला प्रधान बनवाना चाहते थे, लेकिन संगठन की चाल अब पहले जैसी नहीं रही यह रजनीश धीमान की नियुक्ति से साबित हो चुका है। लेकिन केवल जिला प्रधान ही नहीं बल्कि जिले की राजनीति में अहम रोल रखने वाले पदों पर भी इसी तरह के बदलाव की जरूरत है । नए चेहरों को मौका मिलना चाहिए और पार्टी के विस्तार को नए चेहरों की एंट्री भी बेहद जरूरी है । यही कारण है कि जब पार्षद चुनावों की बारी आती है तो फिर से पार्टी को पुराने हारे हुए चेहरे ही दिखाई देते हैं और उन पर ही जीत का दाव खेला जाता है ।असल में इस वक्त पार्टी में बड़े विस्तार को नए नए चेहरे ढूंढ कर लाने की वर्किंग पर काम करना जरूरी है, ताकि पार्षद चुनाव में भी ऐसे चेहरे जिले की राजनीति को एक मुकाम तक ले जा पाएंगे। ऐसे में इसका अहम जिम्मा मौजूदा जिला प्रधान रजनीश धीमान के कंधों पर ही रहेगा। इसके लिए उनको विधायक पद पर चुनाव लड़े नेताओं की भी मदद लेनी होगी, क्योंकि इन नेताओं को यह भली-भांति पता रहता है कि उनके चुनाव में किस-किस नेता या वर्कर ने खुद को साबित किया है। अगर जिला व संगठन मिलकर इस वर्किंग पर काम करें तो भाजपा आने वाले समय में बड़े वोट बैंक को जुटाने में कामयाब हो सकती है।
District Bjp Inside Story New Year New President And Will There Be New Faces In The New Team